{"_id":"61aa55a6c5488861ae7ad689","slug":"bahraich-bahraich-news-lko6072743116","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकारों की हीलाहवाली से परियोजना पूरी होने में लग गए 43 साल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकारों की हीलाहवाली से परियोजना पूरी होने में लग गए 43 साल
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बहराइच। 78 करोड़ की सरयू नहर परियोजना के समय से पूरा न होने के कारण यह परियोजना 9802 करोड़ में पूरी हो सकी। 1978 में जब यह योजना शुरू की गई थी तो इसके समापन का लक्ष्य 1985 दिया गया था, लेकिन पूर्व की सरकारों की हीलाहवाली के कारण इस योजना को पूरा होते होते 43 साल लग गए। मात्र चार वर्ष में इस अधूरी योजना को पूरा कर लिया गया। अब इस परियोजना से तीस लाख किसानों के साढ़े 14 लाख हेक्टेयर जमीन आसानी से सिंचित होंगे। ये बातें जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने प्रेसवार्ता के दौरान बताई। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का लाभ नौ जिलों के किसानों को होगा। उन्होंने विकास के हालात पर चर्चा करते हुए बताया कि केंद्र में जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनी तब अधूरी परियोजनाओं की समीक्षा की गई।
उस दौरान पता चला कि लंबे समयों से देश की 99 बड़ी परियोजनाएं लटकी पड़ी हैं। परियोजनाएं खूब शुरू कराई गई, लेकिन काम किसी पर नहीं कराया गया। सरयू नहर परियोजना का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि यह परियोजना 1978 में शुरू की गई थी, जिसे 1985 में पूर्ण होना था। यही नहीं उन दिनों इस परियोजना की कुल लागत 78 करोड़ थी। पूर्व की सरकारों की लापरवाही के कारण ही इस पर 9802 करोड़ रुपए खर्च करना पड़ा।
उन्होंने बताया कि 2017 में जब योगी आदित्यनाथ की सरकार आई तब प्रधानमंत्री ने इस अधूरी परियोजना को पूर्ण करने का टास्क दिया। चार वर्षों में सरकार ने पूरी परियोजना को बनाकर तैयार कर दिया। बताया कि इस परियोजना से गोंडा, बलरामपुर, बस्ती, महराजगंज, गोरखपुर, श्रावस्ती, बहराइच, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर की साढ़े 14 लाख हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी। इससे 30 लाख किसानों को फायदा मिलेगा। बताया कि 24 जनवरी 1950 से अब तक कोई बड़ी परियोजना पूर्ण नहीं हुई है। यह पहली परियोजना है जब भाजपा सरकार ने पूरी की है।
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कैबिनेट मंत्री महेंद्र सिंह ने बताया कि इस परियोजना लखीमपुर से गोरखपुर के बीच बहने वाली पांच नदियों को एक दूसरे से जोड़ेगी। बताया कि घाघरा नदी गिरिजा बैराज से जुड़ेगी। गिरिजा बैराज से सरयू नदी जुड़ेगी। सरयू से राप्ती नदी जुड़ेगी। राप्ती से बाढ़ गंगा और बाढ़ गंगा से रूढ़ी नदी एक दूसरे से जुड़ेगी।
महेंद्र सिंह ने बताया कि सरयू नहर परियोजना सिंचाई के क्षेत्र में देश की सबसे बड़ी परियोजना है। इस परियोजना को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में मात्र चार वर्ष में पूरा कर लिया गया है। इस परियोजना का पहला खाका 1972 में खींचा गया था। 1978 में काम शुरू किया गया था। 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार आने के पहले तक इस परियोजना को लेकर कुछ नहीं हो सका था। जब यूपी में बीजेपी सरकार आई तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मात्र चार वर्षों में पूरा करा दिया।
सिंचाई ठेकेदार समिति की ओर से सरयू नहर योजना से जुड़े ठेकेदारों ने कैबिनेट मंत्री महेंद्र सिंह से भुगतान की मांग की है। ठेकेदारों का कहना है कि उन्होंने सरयू नहर में काम किया है, लेकिन भुगतान रुका हुआ है। वह भुगतान के लिए प्रतिदिन अफसरों के दफ्तरों का चक्कर लगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई ठेके बड़ी बड़ी कंपनियों को दिए जा रहे हैं, इससे स्थानीय ठेकेदार बेरोजगार हो रहे हैं। इस पर अंकुश लगाया जाए। इस मौके पर अब्दुल्ला, पीके सिंह, सालिम, राकेश पांडेय, विन्नू सिंह, जमाल, गंगाराम, बाबूलाल आदि मौजूद रहे।
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उस दौरान पता चला कि लंबे समयों से देश की 99 बड़ी परियोजनाएं लटकी पड़ी हैं। परियोजनाएं खूब शुरू कराई गई, लेकिन काम किसी पर नहीं कराया गया। सरयू नहर परियोजना का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि यह परियोजना 1978 में शुरू की गई थी, जिसे 1985 में पूर्ण होना था। यही नहीं उन दिनों इस परियोजना की कुल लागत 78 करोड़ थी। पूर्व की सरकारों की लापरवाही के कारण ही इस पर 9802 करोड़ रुपए खर्च करना पड़ा।
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उन्होंने बताया कि 2017 में जब योगी आदित्यनाथ की सरकार आई तब प्रधानमंत्री ने इस अधूरी परियोजना को पूर्ण करने का टास्क दिया। चार वर्षों में सरकार ने पूरी परियोजना को बनाकर तैयार कर दिया। बताया कि इस परियोजना से गोंडा, बलरामपुर, बस्ती, महराजगंज, गोरखपुर, श्रावस्ती, बहराइच, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर की साढ़े 14 लाख हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी। इससे 30 लाख किसानों को फायदा मिलेगा। बताया कि 24 जनवरी 1950 से अब तक कोई बड़ी परियोजना पूर्ण नहीं हुई है। यह पहली परियोजना है जब भाजपा सरकार ने पूरी की है।
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कैबिनेट मंत्री महेंद्र सिंह ने बताया कि इस परियोजना लखीमपुर से गोरखपुर के बीच बहने वाली पांच नदियों को एक दूसरे से जोड़ेगी। बताया कि घाघरा नदी गिरिजा बैराज से जुड़ेगी। गिरिजा बैराज से सरयू नदी जुड़ेगी। सरयू से राप्ती नदी जुड़ेगी। राप्ती से बाढ़ गंगा और बाढ़ गंगा से रूढ़ी नदी एक दूसरे से जुड़ेगी।
महेंद्र सिंह ने बताया कि सरयू नहर परियोजना सिंचाई के क्षेत्र में देश की सबसे बड़ी परियोजना है। इस परियोजना को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में मात्र चार वर्ष में पूरा कर लिया गया है। इस परियोजना का पहला खाका 1972 में खींचा गया था। 1978 में काम शुरू किया गया था। 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार आने के पहले तक इस परियोजना को लेकर कुछ नहीं हो सका था। जब यूपी में बीजेपी सरकार आई तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मात्र चार वर्षों में पूरा करा दिया।
सिंचाई ठेकेदार समिति की ओर से सरयू नहर योजना से जुड़े ठेकेदारों ने कैबिनेट मंत्री महेंद्र सिंह से भुगतान की मांग की है। ठेकेदारों का कहना है कि उन्होंने सरयू नहर में काम किया है, लेकिन भुगतान रुका हुआ है। वह भुगतान के लिए प्रतिदिन अफसरों के दफ्तरों का चक्कर लगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई ठेके बड़ी बड़ी कंपनियों को दिए जा रहे हैं, इससे स्थानीय ठेकेदार बेरोजगार हो रहे हैं। इस पर अंकुश लगाया जाए। इस मौके पर अब्दुल्ला, पीके सिंह, सालिम, राकेश पांडेय, विन्नू सिंह, जमाल, गंगाराम, बाबूलाल आदि मौजूद रहे।