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बुलंद इरादों के दम पर बनाई खास पहचान
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गायघाट (बहराइच)। दोनों पैरों से दिव्यांग मिथिलेश जायसवाल ने प्रकृति प्रेम व गौरैया संरक्षण के कार्यों के दम पर जिले में अपनी अलग पहचान बनाई है। सभी दिव्यांगों के लिए प्रेरणा श्रोत मिथिलेश को राज्य स्तर पर कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। विश्व दिव्यांग दिवस की पूर्व संध्या पर स्थानीय लोगों ने मिथिलेश के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी।
मोतीपुर तहसील के ग्राम पंचायत गुलरा के मजरा भज्जापुरवा निवासी मिथिलेश जायसवाल दोनों पैरों से दिव्यांग है। मिथिलेश ने दिव्यांगता को मात देकर जिले में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। गांव में परचून की दुकान चलाकर जीवन यापन कर रहे मिथिलेश 2005 से गौरैया संरक्षण व पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं। मिथिलेश साहित्य सृजन का भी कार्य करते हैं। इनकी प्रतिभा का ही दम है कि इनकी रचनाएं आकाशवाणी लखनऊ व नेपाल रेडियो बागेश्वरी एफएम पर प्रसारित हो चुकी हैं।
गौरैया संरक्षण की सेवा के लिए इन्हें 2019 में चैतन्य वेलफेयर फाउंडेशन की ओर से प्रकृति रत्न सम्मान, नेपाल की साहित्यिक संस्था अवधी सांस्कृतिक प्रतिष्ठान द्वारा अवधी श्री सम्मान, समाज भूषण सम्मान व अवध भारती संस्थान द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। गत वर्ष दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा सृजनशील दिव्यांग व्यक्ति के रूप में उत्कृष्ट कार्य करने पर इन्हें राज्य स्तरीय पुरस्कार भी दिया था। अब तक 700 से अधिक पौधों का रोपण व गौरैया संरक्षण के लिए 100 से अधिक घोंसले का वितरण कर चुके मिथिलेश दिव्यांगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं। मिथिलेश ने बताया कि व्यक्ति को जीवन जीने के लिए संघर्ष करना चाहिए, न कि अपना दुखड़ा रोना चाहिए।
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मोतीपुर तहसील के ग्राम पंचायत गुलरा के मजरा भज्जापुरवा निवासी मिथिलेश जायसवाल दोनों पैरों से दिव्यांग है। मिथिलेश ने दिव्यांगता को मात देकर जिले में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। गांव में परचून की दुकान चलाकर जीवन यापन कर रहे मिथिलेश 2005 से गौरैया संरक्षण व पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं। मिथिलेश साहित्य सृजन का भी कार्य करते हैं। इनकी प्रतिभा का ही दम है कि इनकी रचनाएं आकाशवाणी लखनऊ व नेपाल रेडियो बागेश्वरी एफएम पर प्रसारित हो चुकी हैं।
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गौरैया संरक्षण की सेवा के लिए इन्हें 2019 में चैतन्य वेलफेयर फाउंडेशन की ओर से प्रकृति रत्न सम्मान, नेपाल की साहित्यिक संस्था अवधी सांस्कृतिक प्रतिष्ठान द्वारा अवधी श्री सम्मान, समाज भूषण सम्मान व अवध भारती संस्थान द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। गत वर्ष दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा सृजनशील दिव्यांग व्यक्ति के रूप में उत्कृष्ट कार्य करने पर इन्हें राज्य स्तरीय पुरस्कार भी दिया था। अब तक 700 से अधिक पौधों का रोपण व गौरैया संरक्षण के लिए 100 से अधिक घोंसले का वितरण कर चुके मिथिलेश दिव्यांगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं। मिथिलेश ने बताया कि व्यक्ति को जीवन जीने के लिए संघर्ष करना चाहिए, न कि अपना दुखड़ा रोना चाहिए।
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