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कतर्नियाघाट में बढ़ा घड़ियालों का परिवार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jun 2016 10:37 PM IST
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कतर्नियाघाट में निकले नन्हें मेहमान
- फोटो : अमर उजाला
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घड़ियालों की नई जिंदगी ने कतर्निया के गेरुआ नदी में टापुओं पर शुक्रवार को दस्तक दे दी। घड़ियालों के 15 घोंसलों से 1050 नन्हें मेहमान निकले जिन्हें वन विभाग ने सुरक्षित गेरुआ नदी में छोड़ा। इस बार तापमान के उतार-चढ़ाव से वनाधिकारी चिंतित थे लेकिन सही समय से दो दिन पहले घोंसलों से बच्चे निकले।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी घड़ियालों के कुनबों को बढ़ाने में मददगार मानी जाती है। अनुमान के मुताबिक नदी में करीब 300 घड़ियाल हैं। प्रति वर्ष फरवरी-मार्च माह में घड़ियाल नदी के टापू वाले स्थानों पर अंडे देकर उन्हें बालू के घोंसले में सहेजते हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो एक घोसले में 60 से 65 अंडे होते हैं। बालू में ढकने के बाद मादा घड़ियाल अंडों के प्रति निश्चिंत हो जाती हैं। मध्य जून का समय अंडों से बच्चों के निकलने का होता है। इस बार तराई का मौसम अधिक गर्म होने के चलते दो दिन पहले ही ब्रीडिंग शुरू हो गई।
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कतर्नियाघाट के प्रभागीय वनाधिकारी आशीष तिवारी के मुताबिक सुबह भवनियापुर घाट पर निगरानी टीम भ्रमण कर रही थी तो कुछ घोंसलों से उन्हें चहचहाहट की आवाज सुनाई पड़ी। वन कर्मियों ने देखा तो पता चला कि 15 घोसलों से 1050 नन्हे घड़ियाल निकले।
टीम ने उन्हें गेरुआ नदी में छोड़ दिया है। इस बार मादा घड़ियालों ने 38 स्थानों पर घोसलें बनाकर अंडे सहेजे हैं। प्रतिदिन घोसलों की निगरानी हो रही है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी दबीर हसन ने बताया कि अंडों से बच्चों के निकलने के लिए नदी क्षेत्र का तापमान 41 डिग्र्री से अधिक होना चाहिए।
इस बार तापमान अधिक रहा है। इसके चलते समय से दो दिन पूर्व ही ब्रीडिंग शुरू हो गई। एक घोसले में औसतन 60 से 65 अंडे होते हैं। ऐसे में इस बार कम से कम 1800 नन्हे घड़ियाल निकलने का अनुमान वन विभाग को है।
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी घड़ियालों के कुनबों को बढ़ाने में मददगार मानी जाती है। अनुमान के मुताबिक नदी में करीब 300 घड़ियाल हैं। प्रति वर्ष फरवरी-मार्च माह में घड़ियाल नदी के टापू वाले स्थानों पर अंडे देकर उन्हें बालू के घोंसले में सहेजते हैं।
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विशेषज्ञों की मानें तो एक घोसले में 60 से 65 अंडे होते हैं। बालू में ढकने के बाद मादा घड़ियाल अंडों के प्रति निश्चिंत हो जाती हैं। मध्य जून का समय अंडों से बच्चों के निकलने का होता है। इस बार तराई का मौसम अधिक गर्म होने के चलते दो दिन पहले ही ब्रीडिंग शुरू हो गई।
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कतर्नियाघाट के प्रभागीय वनाधिकारी आशीष तिवारी के मुताबिक सुबह भवनियापुर घाट पर निगरानी टीम भ्रमण कर रही थी तो कुछ घोंसलों से उन्हें चहचहाहट की आवाज सुनाई पड़ी। वन कर्मियों ने देखा तो पता चला कि 15 घोसलों से 1050 नन्हे घड़ियाल निकले।
टीम ने उन्हें गेरुआ नदी में छोड़ दिया है। इस बार मादा घड़ियालों ने 38 स्थानों पर घोसलें बनाकर अंडे सहेजे हैं। प्रतिदिन घोसलों की निगरानी हो रही है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी दबीर हसन ने बताया कि अंडों से बच्चों के निकलने के लिए नदी क्षेत्र का तापमान 41 डिग्र्री से अधिक होना चाहिए।
इस बार तापमान अधिक रहा है। इसके चलते समय से दो दिन पूर्व ही ब्रीडिंग शुरू हो गई। एक घोसले में औसतन 60 से 65 अंडे होते हैं। ऐसे में इस बार कम से कम 1800 नन्हे घड़ियाल निकलने का अनुमान वन विभाग को है।