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32 नेस्ट में पल रहा घड़ियालों का परिवार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 31 May 2016 10:27 PM IST
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कुनबा बढ़ाने के लिए मुफीद गेरुआ नदी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कतर्निया घाट सेंक्चुरी में गेरुआ नदी के टापू पर घड़ियाल और मगरमच्छ का नया कुनबा 32 अलग-अलग घोसलों में पल रहा है। यह घोसले भवनियापुर गांव के सामने और टावर समेत गेरुआ नदी में टापू पर चार स्थानों पर चिन्हित किए गए हैं।
डेढ़ माह बाद नेस्ट से नई जिंदगियों की शुरुआत होगी। इनकी सुरक्षा के लिए वन विभाग ने पांच टीमें गठित की हैं। चौबीस घंटे कांबिंग की जा रही है। टापुओं की ओर सैलानियों की बोट ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
कतर्निया घाट संरक्षित वन क्षेत्र के मध्य से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी घड़ियाल, मगरमच्छ और डाल्फिन का कुनबा बढ़ाने के लिए मुफीद मानी जाती है। प्रति वर्ष मार्च माह से अप्रैल के अंत तक घड़ियाल और मगरमच्छ अंडे देते हैं।
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इन अंडों को नर और मादा घड़ियाल नदी के टापू में नेस्ट बनाकर सहेजते हैं। इस बार भी घड़ियालों द्वारा नेस्ट बनाने की प्रकिया मई माह के प्रथम सप्ताह तक चली। संरक्षित वन क्षेत्र के प्रभागीय वनाधिकारी आशीष तिवारी के मुताबिक गेरुआ नदी में चार स्थानों पर घड़ियाल और मगरमच्छ के 32 नेस्ट चिन्हित किए गए हैं।
इनकी सुरक्षा के लिए वन दरोगा और वन रक्षकों की अगुआई में पांच टीमें गठित की गईं हैं। यह टीमें निरंतर गश्त कर रही हैं। उन्होंने बताया कि घड़ियाल और मगरमच्छ के बच्चे 15 जून के आसपास नेस्ट से निकलेंगे तब इन्हें नदी में सुरक्षित छोड़ा जाएगा।
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डेढ़ माह बाद नेस्ट से नई जिंदगियों की शुरुआत होगी। इनकी सुरक्षा के लिए वन विभाग ने पांच टीमें गठित की हैं। चौबीस घंटे कांबिंग की जा रही है। टापुओं की ओर सैलानियों की बोट ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
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कतर्निया घाट संरक्षित वन क्षेत्र के मध्य से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी घड़ियाल, मगरमच्छ और डाल्फिन का कुनबा बढ़ाने के लिए मुफीद मानी जाती है। प्रति वर्ष मार्च माह से अप्रैल के अंत तक घड़ियाल और मगरमच्छ अंडे देते हैं।
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इन अंडों को नर और मादा घड़ियाल नदी के टापू में नेस्ट बनाकर सहेजते हैं। इस बार भी घड़ियालों द्वारा नेस्ट बनाने की प्रकिया मई माह के प्रथम सप्ताह तक चली। संरक्षित वन क्षेत्र के प्रभागीय वनाधिकारी आशीष तिवारी के मुताबिक गेरुआ नदी में चार स्थानों पर घड़ियाल और मगरमच्छ के 32 नेस्ट चिन्हित किए गए हैं।
इनकी सुरक्षा के लिए वन दरोगा और वन रक्षकों की अगुआई में पांच टीमें गठित की गईं हैं। यह टीमें निरंतर गश्त कर रही हैं। उन्होंने बताया कि घड़ियाल और मगरमच्छ के बच्चे 15 जून के आसपास नेस्ट से निकलेंगे तब इन्हें नदी में सुरक्षित छोड़ा जाएगा।