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खिलौनों संग पौष्टिक आहार, कुपोषण का होगा मुफ्त इलाज
Bahraich
Updated Fri, 24 Jan 2014 05:46 AM IST
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बहराइच। खिलौनों के साथ पौष्टिक आहार और समुचित इलाज, ये अब जिला अस्पताल में मुहैया होगा, वो भी निशुल्क। शासन ने दो लाख रुपये की लागत से जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना को हरी झंडी दी है। यहां अति कुपोषित बच्चों को इलाज के साथ पौष्टिक भोजन दिया जाएगा। साथ ही, स्वस्थ माहौल देने के लिए केंद्र की दीवारें आकर्षण तरीके से सजाई जाएंगी और बच्चों का मन लगाने के लिए खिलौने भी उपलब्ध रहेंगे। बच्चे की मां को पौष्टिक भोजन बनाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। विशेषज्ञ चिकित्सक व न्यूट्रीशियंस की देखरेख में बहराइच को कुपोषण मुक्त करने का प्रयास होगा।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक तराई में पांच वर्ष से कम उम्र के 42 फीसदी बच्चों का वजन उनकी उम्र के हिसाब से कम है, जबकि सात फीसदी बच्चे अति गंभीर रूप से कुपोषित हैं। इन बच्चों में मृत्यु की संभावना नौ गुना अधिक होती है। प्रदेश के 22 जिलों में बच्चों की स्थिति काफी नाजुक है, जिसमें बहराइच भी शामिल है। शासन जिले में कुपोषण पर रोकथाम के लिए पोषण पुनर्वास स्थापित करवाएगा। एनआरएचएम निदेशक अमित घोष ने पोषण पुनर्वास केंद्र स्थापना को हरी झंडी दिखाई है। इस पर दो लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। 10 बच्चों को भर्ती किए जाने की व्यवस्था होगी, जिनका विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में मुफ्त इलाज किया जाएगा।
न्यूट्रीशियंस की देखरेख में पौष्टिक आहार दिया जाएगा। केंद्र पर बच्चे की मां के रहने की व्यवस्था होगी। बच्चे की मां को पौष्टिक भोजन बनाने के लिए प्रशिक्षित भी किया जाएगा। केंद्र से सटा हुआ सुलभ शौचालय व रसोई बनाए जाने का निर्देश है। वार्ड से सटा बरामदा भी होना अनिवार्य है।
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मेडिकल व पैरामेडिकल स्टाफ की होगी तैनाती
पोषण पुनर्वास केंद्र के संचालन के लिए चिकित्सा अधिकारी, न्यूट्रीशन काउंसलर, स्टॉफ नर्स, रसोइया, केयर टेकर की तैनाती की जाएगी। चिकित्सा अधिकारी की तैनाती भारत सरकार से अनुमोदन के बाद होगी। सभी कर्मियों की तैनाती संविदा पर होगी।
अपर निदेशक स्वास्थ्य रखेंगे नजर
कुपोषित बच्चों को 10-15 दिन तक केंद्र में भर्ती किया जाएगा। आवश्यक सुधार अथवा जटिलता होने पर चार सप्ताह तक बच्चे को भर्ती रखा जा सकता है। वजन में 15 फीसदी बढ़ोतरी, भूख लगना, शरीर पर सूजन न होने, अन्य बीमारी के लक्षण के उपचार होने पर ही रोगी बच्चे को छुट्टी दी जाएगी। इसके बाद दो माह में चार बार 15 दिन के अंतराल पर फॉलोअप किया जाएगा। चिकित्सा अधिकारियों को इसकी रिपोर्ट सीएमओ व अपर निदेशक स्वास्थ्य को भेजनी होगी। इस संपूर्ण कार्यक्रम के अनुश्रवण व मूल्यांकन की जिम्मेदारी अपर निदेशक स्वास्थ्य की होगी।
शीघ्र शुरू होगा पोषण पुनर्वास केंद्र का काम
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के जिला प्रोजेक्ट मैनेजर मनीष विसारिया ने बताया कि दो लाख की लागत से जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना की स्वीकृति मिली है। शीघ्र इसकी स्थापना का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. माहेश्वरी पांडेय से बात हुई है। केंद्र की स्थापना के बाद कुपोषित बच्चों को लाभ मिलेगा।
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स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक तराई में पांच वर्ष से कम उम्र के 42 फीसदी बच्चों का वजन उनकी उम्र के हिसाब से कम है, जबकि सात फीसदी बच्चे अति गंभीर रूप से कुपोषित हैं। इन बच्चों में मृत्यु की संभावना नौ गुना अधिक होती है। प्रदेश के 22 जिलों में बच्चों की स्थिति काफी नाजुक है, जिसमें बहराइच भी शामिल है। शासन जिले में कुपोषण पर रोकथाम के लिए पोषण पुनर्वास स्थापित करवाएगा। एनआरएचएम निदेशक अमित घोष ने पोषण पुनर्वास केंद्र स्थापना को हरी झंडी दिखाई है। इस पर दो लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। 10 बच्चों को भर्ती किए जाने की व्यवस्था होगी, जिनका विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में मुफ्त इलाज किया जाएगा।
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न्यूट्रीशियंस की देखरेख में पौष्टिक आहार दिया जाएगा। केंद्र पर बच्चे की मां के रहने की व्यवस्था होगी। बच्चे की मां को पौष्टिक भोजन बनाने के लिए प्रशिक्षित भी किया जाएगा। केंद्र से सटा हुआ सुलभ शौचालय व रसोई बनाए जाने का निर्देश है। वार्ड से सटा बरामदा भी होना अनिवार्य है।
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मेडिकल व पैरामेडिकल स्टाफ की होगी तैनाती
पोषण पुनर्वास केंद्र के संचालन के लिए चिकित्सा अधिकारी, न्यूट्रीशन काउंसलर, स्टॉफ नर्स, रसोइया, केयर टेकर की तैनाती की जाएगी। चिकित्सा अधिकारी की तैनाती भारत सरकार से अनुमोदन के बाद होगी। सभी कर्मियों की तैनाती संविदा पर होगी।
अपर निदेशक स्वास्थ्य रखेंगे नजर
कुपोषित बच्चों को 10-15 दिन तक केंद्र में भर्ती किया जाएगा। आवश्यक सुधार अथवा जटिलता होने पर चार सप्ताह तक बच्चे को भर्ती रखा जा सकता है। वजन में 15 फीसदी बढ़ोतरी, भूख लगना, शरीर पर सूजन न होने, अन्य बीमारी के लक्षण के उपचार होने पर ही रोगी बच्चे को छुट्टी दी जाएगी। इसके बाद दो माह में चार बार 15 दिन के अंतराल पर फॉलोअप किया जाएगा। चिकित्सा अधिकारियों को इसकी रिपोर्ट सीएमओ व अपर निदेशक स्वास्थ्य को भेजनी होगी। इस संपूर्ण कार्यक्रम के अनुश्रवण व मूल्यांकन की जिम्मेदारी अपर निदेशक स्वास्थ्य की होगी।
शीघ्र शुरू होगा पोषण पुनर्वास केंद्र का काम
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के जिला प्रोजेक्ट मैनेजर मनीष विसारिया ने बताया कि दो लाख की लागत से जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना की स्वीकृति मिली है। शीघ्र इसकी स्थापना का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. माहेश्वरी पांडेय से बात हुई है। केंद्र की स्थापना के बाद कुपोषित बच्चों को लाभ मिलेगा।