डॉल्फिनों की उछलकूद से महरूम होंगे कतर्निया आने वाले पर्यटक

Bahraich Updated Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
बिछिया (बहराइच)। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के बीचोबीच से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी अचानक सूख गई है। गैंगेटिक डॉल्फिन की उछलकूद तो गुम हुई ही, धूप सेंकते घड़ियाल और मगरमच्छ भी गायब हो गए हैं। शीतकाल में प्रवास के लिए आने वाले साइबेरियन पक्षी की चहचहाहट भी अब नहीं सुनाई देती। इस कारण अब जब कतर्नियाघाट पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है तो यहां आने वाले लोगों को निराशा हाथ लगेगी। कारण है चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज के फाटक खोलना। जिससे गेरुआ और कैड़ियाला नदी का पानी घाघरा में समा जाता है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में नेपाल के पहाड़ से आधा दर्जन पहाड़ी नाले जंगल के बीच से होकर बहते हैं। इसके अलावा प्रमुख नदी गेरुआ और कौड़ियाला भी जंगल की सुरम्यता को बढ़ाती है। यह दोनों नदियां चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज पर संगम करती हैं। यहां से घाघरा नदी का उद्गम होता है। बैराज के फाटक की साफ-सफाई हर 6 महीने पर होती है। इसके चलते बैराज के सभी फाटक खोल दिए जाते हैं। इस पर गेरुआ और कौड़ियाला नदियों का पूरा पानी घाघरा नदी में जा गिरता है, जिससे नेपाल की दोनों नदियां सूखी नजर आती हैं। इस बार भी दो दिन पूर्व चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज पर मरम्मत के लिए सभी फाटक खोल दिए गए हैं।
जिसके चलते 24 घंटे में नदी पूरी तरह से सूख गई है। पानी के साथ ही जलीय जीव गैंगेटिक डॉल्फिन, मगरमच्छ और घड़ियाल भी घाघरा में गए या नेपाल सीमा की ओर नदी के गहरे पानी में गए हैं, पता नहीं। इस समय गेरुआ नदी की हालत यह है कि आराम से लोग पैदल नदी पार कर रहे हैं। अचानक गेरुआ नदी के सूखने से प्रवास के लिए आए साइबेरियन पक्षी भी नहीं दिख रहे हैं। नदी के सूखने से कतर्निया आने वाले पर्यटकों को तो निराशा होगी ही, डॉल्फिन की उछलकूद और साइबेरियन पक्षियों का दीदार भी पर्यटक नहीं कर सकेंगे।
जलीय जीवों को नहीं होगा नुकसान : आरके सिंह
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के प्रभागीय वनाधिकारी आरके सिंह का कहना है कि नदी के सूखने से जलीय जीवों को कोई खास नुकसान नहीं होगा। यह जलीय जीव घाघरा व गेरुआ नदी के नेपाल सीमा में इकट्ठा नदी के पानी में चले जाते हैं। पुन: नदी का पानी बढ़ने पर जलीय जीव अपने पुराने स्थान पर लौट आते हैं।
साइबेरियन पक्षियों का अभाव खलेगा
डीएफओ ने कहा कि जलीय जीव तो अधिकांशत: सुरक्षित रहेंगे लेकिन साइबेरियन पक्षियों का अभाव जरूर खलेगा। क्योंकि नवंबर से जनवरी के मध्य का समय ऐसा है जब साइबेरियन देशों से आने वाले पक्षी लोगों के आकर्षण का केंद्र होते हैं।
वर्ष में दो बार होती है नदी के सूखने की स्थिति
चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज के अवर अभियंता आरए शर्मा का कहना है कि प्रतिवर्ष अप्रैल से मई के मध्य व अक्तूबर से नवंबर के मध्य बैराज के गेटों की मरम्मत, पेटिंग के लिए फाटक पूरी तरह से ऊपर उठा दिए जाते हैं। जिस कारण दोनों नदियों का पानी घाघरा में चला जाता है। इससे नदी सूखी नजर आती है। उन्होंने कहा कि इस बार 27 अक्तूबर को क्लोजर होना था लेकिन मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के चलते एक सप्ताह देरी से क्लोजर किया गया। कहा कि यह स्थिति एक से डेढ़ माह तक रहने की संभावना है। फाटक बंद करने पर धीरे-धीरे पानी फिर इकट्ठा होगा और नदी पुराने स्वरूप में आ जाएगी।

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