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कटान में 28 मकान समायेे धोबिनपुरवा गांव खतरे में
बहराइच
Updated Sat, 17 Sep 2016 11:01 PM IST
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बहराइच के महसी के गोलागंज टेपरी में शनिवार को कटान कर रही घाघरा नदी।
- फोटो : अमर उजाला
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तराई और नेपाल के पहाड़ों पर दो दिन से रुक-रुक कर हो रही वर्षा के चलते घाघरा नदी में अचानक कटान तेज हो गई है। गोलागंज टेपरी गांव के कहारनपुरवा व कैसरगंज के नईबस्ती गांव में नदी ने कटान करते हुए 26 मकानों को रात से अब तक लील लिया है।
वहीं महसी का धोबिनपुरवा गांव भी नदी के निशाने पर आ गया है। गांव निवासी दो ग्रामीणों के मकान नदी की लहरों में समाहित हो गए। 250 बीघा खेती योग्य जमीन भी नदी की कटान की भेंट चढ़ी है। इससे हड़कंप मचा हुआ है लेकिन कटान रोकने के कोई उपाय नहीं हो सके हैं न ही क्षेत्र में राजस्वकर्मी दिखाई पड़ रहे हैं।
घाघरा नदी की कटान कुछ दिनों से बंद थी। लगा था कि नदी के किनारे बसे गांव के ग्रामीणों को राहत मिलेगी, लेकिन अचानक नदी की लहरों ने फिर कहर बरपाना शुरू कर दिया है। तराई में बीते दो दिनों से रुक-रुक कर वर्षा हो रही है।
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नेपाल के पहाड़ों पर भी पानी बरस रहा है। इसका नतीजा यह है कि घाघरा की लहरों ने महसी और कैसरगंज तहसील क्षेत्र में कटान तेज कर दी है। महसी के गोलागंज टेपरी कहारनपुरवा गांव में नदी ने कटान करते हुए गंगाराम, किशनलाल, छबीले, अर्जुन, संतराम, पृथ्वीराज, मनोज, प्रमोद, जगदीश, देशराज, सुघरा समेत 18 ग्रामीणों के मकानों का अस्तित्व खत्म कर दिया।
जैसे-तैसे इन ग्रामीणों ने गृहस्थी को बचाया। लेकिन सपनों के आशियाने को नदी में समाहित होते देखने को मजबूर रहे। नदी की लहरों ने इसी ग्राम पंचायत के मजरा धोबिनपुरवा को भी निशाने पर ले लिया है।
गांव निवासी संदीप कुमार और गुलाबचंद्र के मकान शनिवार सुबह नदी की लहरों में समाहित हो गए। जिससे अन्य ग्रामीणों में हड़कंप मचा हुआ है। लोग गृहस्थी समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं।
उधर कैसरगंज के गोड़हिया नईबस्ती गांव में भी नदी ने कटान करते हुए सहारे, प्रेमचंद, बदलू समेत आठ मकानों को लील लिया है। सूचना के बावजूद अब तक कटान रोकने के कोई उपाय नहीं हुए हैं।
ग्रामीण परेशान हैं। गोलागंज टेपरी के ग्राम प्रधान ओमकार सिंह ने बताया कि नदी की कटान के चलते बाहरपुरवा, भयापुरवा, जोगापुरवा और लोनियनपुरवा गांव के निकट खेती योग्य जमीन भी नदी के उस पार कट रही है। रात से अब तक लगभग 250 बीघा जमीन नदी में समाहित हुई है। तहसील को सूचना दी गई है। लेकिन राहत और बचाव कार्य शून्य है।
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वहीं महसी का धोबिनपुरवा गांव भी नदी के निशाने पर आ गया है। गांव निवासी दो ग्रामीणों के मकान नदी की लहरों में समाहित हो गए। 250 बीघा खेती योग्य जमीन भी नदी की कटान की भेंट चढ़ी है। इससे हड़कंप मचा हुआ है लेकिन कटान रोकने के कोई उपाय नहीं हो सके हैं न ही क्षेत्र में राजस्वकर्मी दिखाई पड़ रहे हैं।
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घाघरा नदी की कटान कुछ दिनों से बंद थी। लगा था कि नदी के किनारे बसे गांव के ग्रामीणों को राहत मिलेगी, लेकिन अचानक नदी की लहरों ने फिर कहर बरपाना शुरू कर दिया है। तराई में बीते दो दिनों से रुक-रुक कर वर्षा हो रही है।
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नेपाल के पहाड़ों पर भी पानी बरस रहा है। इसका नतीजा यह है कि घाघरा की लहरों ने महसी और कैसरगंज तहसील क्षेत्र में कटान तेज कर दी है। महसी के गोलागंज टेपरी कहारनपुरवा गांव में नदी ने कटान करते हुए गंगाराम, किशनलाल, छबीले, अर्जुन, संतराम, पृथ्वीराज, मनोज, प्रमोद, जगदीश, देशराज, सुघरा समेत 18 ग्रामीणों के मकानों का अस्तित्व खत्म कर दिया।
जैसे-तैसे इन ग्रामीणों ने गृहस्थी को बचाया। लेकिन सपनों के आशियाने को नदी में समाहित होते देखने को मजबूर रहे। नदी की लहरों ने इसी ग्राम पंचायत के मजरा धोबिनपुरवा को भी निशाने पर ले लिया है।
गांव निवासी संदीप कुमार और गुलाबचंद्र के मकान शनिवार सुबह नदी की लहरों में समाहित हो गए। जिससे अन्य ग्रामीणों में हड़कंप मचा हुआ है। लोग गृहस्थी समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं।
उधर कैसरगंज के गोड़हिया नईबस्ती गांव में भी नदी ने कटान करते हुए सहारे, प्रेमचंद, बदलू समेत आठ मकानों को लील लिया है। सूचना के बावजूद अब तक कटान रोकने के कोई उपाय नहीं हुए हैं।
ग्रामीण परेशान हैं। गोलागंज टेपरी के ग्राम प्रधान ओमकार सिंह ने बताया कि नदी की कटान के चलते बाहरपुरवा, भयापुरवा, जोगापुरवा और लोनियनपुरवा गांव के निकट खेती योग्य जमीन भी नदी के उस पार कट रही है। रात से अब तक लगभग 250 बीघा जमीन नदी में समाहित हुई है। तहसील को सूचना दी गई है। लेकिन राहत और बचाव कार्य शून्य है।