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करमोहना गांव में टहल रही बाघिन
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उर्रा (बहराइच)। करमोहना गांव में एक बाघिन गन्ने व गोभी के खेत में बार-बार आकर लौट जा रही है। बाघिन के गर्भवती होने की संभावना है। ग्रामीण दहशत में है।
रविवार को वन दरोगा ने टीम के साथ मुआयना कर ग्रामीणों को सतर्क रहने की हिदायत दी है। बहराइच वन प्रभाग का चकिया रेंज कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र जंगल से लगा हुआ है।
संरक्षित वन क्षेत्र के बाघ और तेंदुए चकिया रेंज में पहुंचकर चहलकदमी करते हैं। चकिया रेंज का करमोहना गांव सीमा पर है। गांव निवासी नंदजी के गोभी, निरंजन, मुसाफिर के गन्ने के खेत में बाघिन आ रही है।
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चारों तरफ पद चिन्ह बने हुए हैं। यह सिलसिला शुक्रवार से जारी है। प्रतिदिन गन्ने के खेत में बाघिन के जाने से ग्रामीण दहशत में हैं। सभी घर से नहीं निकल रहे हैं।
ठिकाने की तलाश में खेतों का कर रही रुख
चकिया के वन क्षेत्राधिकारी जहीर मिर्जा ने बताया कि वन दरोगा अविनाश तिवारी को टीम के साथ मौके पर भेजा गया। बाघिन का इस तरह से खेत में आना उसके गर्भवती होने का प्रमाण है।
वह ठिकाने की तलाश में खेतों की ओर रुख कर रही है। ग्रामीण सतर्क रहें। ऐसे में वह हमलावर भी हो सकती है। वन दरोगा ने बताया कि बाघिन के फिर से क्षेत्र में आने की संभावना है।
ऐसे में ग्रामीण झुंड में खेतों की ओर जाए। सीमा से सटे जंगल का रुख न करें। बाघ या तेंदुए के मूवमेंट पर गोला-पटाखा दागें।
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रविवार को वन दरोगा ने टीम के साथ मुआयना कर ग्रामीणों को सतर्क रहने की हिदायत दी है। बहराइच वन प्रभाग का चकिया रेंज कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र जंगल से लगा हुआ है।
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संरक्षित वन क्षेत्र के बाघ और तेंदुए चकिया रेंज में पहुंचकर चहलकदमी करते हैं। चकिया रेंज का करमोहना गांव सीमा पर है। गांव निवासी नंदजी के गोभी, निरंजन, मुसाफिर के गन्ने के खेत में बाघिन आ रही है।
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चारों तरफ पद चिन्ह बने हुए हैं। यह सिलसिला शुक्रवार से जारी है। प्रतिदिन गन्ने के खेत में बाघिन के जाने से ग्रामीण दहशत में हैं। सभी घर से नहीं निकल रहे हैं।
ठिकाने की तलाश में खेतों का कर रही रुख
चकिया के वन क्षेत्राधिकारी जहीर मिर्जा ने बताया कि वन दरोगा अविनाश तिवारी को टीम के साथ मौके पर भेजा गया। बाघिन का इस तरह से खेत में आना उसके गर्भवती होने का प्रमाण है।
वह ठिकाने की तलाश में खेतों की ओर रुख कर रही है। ग्रामीण सतर्क रहें। ऐसे में वह हमलावर भी हो सकती है। वन दरोगा ने बताया कि बाघिन के फिर से क्षेत्र में आने की संभावना है।
ऐसे में ग्रामीण झुंड में खेतों की ओर जाए। सीमा से सटे जंगल का रुख न करें। बाघ या तेंदुए के मूवमेंट पर गोला-पटाखा दागें।