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आधा दर्जन से अधिक केंद्रों पर होती है भ्रूण की जांच, पर अब खैर नहीं
Updated Wed, 07 Jun 2017 12:21 AM IST
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छह केंद्रों पर होती है भ्रूण की जांच
बहराइच। भ्रूण की जांच कराना अपराध है। बेटी की हत्या करना पाप है। इसके बावजूद जिले में धड़ल्ले से अल्ट्रासाउंड सेंटरों और नर्सिंगहोम पर भ्र्रूण की जांच होती है। चोरी छिपे हो रहे इस धंधे में प्रतिमाह लाखों के वारे-न्यारे होते हैं। बीते वर्ष ऐसे आठ मामले सामने आए, लेकिन बाद में सभी मामले रफा-दफा हो गए। शहर के आधा दर्जन से अधिक केंद्रों पर चोरी छिपे भ्रूण की जांच की जाती है। वहीं ग्रामीण अंचलों में स्थित अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर भी लिंग जांच का खेल चलता है। लेकिन प्रशासन और स्वास्थ्य महकमा चुप्पी साधे हुए है। सरकार की मुखबिर योजना से लगा है कि शायद अब भ्रूण जांच पर अंकुश लग सकेगा।
बहराइच काफी पिछड़ा जिला है। इसके बावजूद यहां स्थित अल्ट्रासाउंड सेंटर और नर्सिंगहोम भ्रूण जांच करवाने में पीछे नहीं हैं। कुछ स्थानों पर तो भ्रूण जांच का ठेका भी लिया जाता है। गौरतलब हो कि जिले में 20 प्राइवेट और दो सरकारी अल्ट्रासाउंड सेंटर स्थापित हैं। जबकि 37 नर्सिंगहोम संचालित हो रहे हैं। प्राइवेट अल्ट्रासाउंड सेंटरों में से आधा दर्जन अल्ट्रासाउंड ऐसे हैं, जहां पर भ्रूण जांच का ठेका लिया जाता है। दो हजार से 12 हजार रुपये तक वसूली होती है। इसके बाद मनमाफिक भ्रूण जांच न निकलने पर गर्भपात भी करवाया जाता है। लेकिन स्वास्थ्य महकमा अंजान बना हुआ है। अब सरकार ने भ्रूण हत्या रोकने के लिए मुखबिर योजना लांच की है। जिसके तहत इस टीम में स्वास्थ्य विभाग के अलावा प्रशासनिक विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल होंगे, जो भ्रूण जांच करने वाले अल्ट्रासाउंड सेंटर व नर्सिंगहोम पर नजर रखेंगे। इससे शायद भ्रूण हत्या पर अंकुश लग सके।
इंसेट
आठ मामले आ चुके सामने, सभी हुए रफा-दफा
वर्ष 2016 व 17 में भ्रूण हत्या के आठ मामले सामने आए। इनमें छह मामले जिला अस्पताल के निकट संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटरों से संबंधित थे। जबकि दो मामले अलग स्थानों के हैं। हालांकि मामले बाद में रफा-दफा हो गए।
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इंसेट
माह में 2800 महिलाओं की होती जांच
जिला अस्पताल में प्रतिमाह औसतन लगभग 210 गर्भवती महिलाओं की जांच होती है। हालांकि भ्रूण परीक्षण से अस्पताल प्रशासन इंकार कर रहा है। गर्भ में पल रहे बच्चे की स्थिति जांचने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जाता है। वहीं निजी सेंटरों पर लगभग 2600 महिलाओं की जांच प्रतिमाह होती है। यहां सब तरह की जांच होती है। हालांकि अब तक कार्रवाई किसी भी सेंटर के खिलाफ नहीं हुई है।
कोट
टीम गठित कर होगी जांच, करेंगे कार्रवाई
मुखबिर योजना भ्रूण हत्या पर बेहतर तरीके से शिकंजा कसने में कामयाब होगा। योजना के तहत टीम में स्वास्थ्य के अलावा प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी शामिल होंगे। जरूरत पड़ी तो पुलिस विभाग की भी मदद ली जाएगी। सेंटरों पर औचक छापेमारी कर अभिलेख देखे जाएंगे। अल्ट्रासाउंड मशीनों की स्थिति जांच कर कार्रवाई करेंगे।
डॉ. अरुणलाल सीएमओ
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बहराइच। भ्रूण की जांच कराना अपराध है। बेटी की हत्या करना पाप है। इसके बावजूद जिले में धड़ल्ले से अल्ट्रासाउंड सेंटरों और नर्सिंगहोम पर भ्र्रूण की जांच होती है। चोरी छिपे हो रहे इस धंधे में प्रतिमाह लाखों के वारे-न्यारे होते हैं। बीते वर्ष ऐसे आठ मामले सामने आए, लेकिन बाद में सभी मामले रफा-दफा हो गए। शहर के आधा दर्जन से अधिक केंद्रों पर चोरी छिपे भ्रूण की जांच की जाती है। वहीं ग्रामीण अंचलों में स्थित अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर भी लिंग जांच का खेल चलता है। लेकिन प्रशासन और स्वास्थ्य महकमा चुप्पी साधे हुए है। सरकार की मुखबिर योजना से लगा है कि शायद अब भ्रूण जांच पर अंकुश लग सकेगा।
बहराइच काफी पिछड़ा जिला है। इसके बावजूद यहां स्थित अल्ट्रासाउंड सेंटर और नर्सिंगहोम भ्रूण जांच करवाने में पीछे नहीं हैं। कुछ स्थानों पर तो भ्रूण जांच का ठेका भी लिया जाता है। गौरतलब हो कि जिले में 20 प्राइवेट और दो सरकारी अल्ट्रासाउंड सेंटर स्थापित हैं। जबकि 37 नर्सिंगहोम संचालित हो रहे हैं। प्राइवेट अल्ट्रासाउंड सेंटरों में से आधा दर्जन अल्ट्रासाउंड ऐसे हैं, जहां पर भ्रूण जांच का ठेका लिया जाता है। दो हजार से 12 हजार रुपये तक वसूली होती है। इसके बाद मनमाफिक भ्रूण जांच न निकलने पर गर्भपात भी करवाया जाता है। लेकिन स्वास्थ्य महकमा अंजान बना हुआ है। अब सरकार ने भ्रूण हत्या रोकने के लिए मुखबिर योजना लांच की है। जिसके तहत इस टीम में स्वास्थ्य विभाग के अलावा प्रशासनिक विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल होंगे, जो भ्रूण जांच करने वाले अल्ट्रासाउंड सेंटर व नर्सिंगहोम पर नजर रखेंगे। इससे शायद भ्रूण हत्या पर अंकुश लग सके।
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आठ मामले आ चुके सामने, सभी हुए रफा-दफा
वर्ष 2016 व 17 में भ्रूण हत्या के आठ मामले सामने आए। इनमें छह मामले जिला अस्पताल के निकट संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटरों से संबंधित थे। जबकि दो मामले अलग स्थानों के हैं। हालांकि मामले बाद में रफा-दफा हो गए।
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माह में 2800 महिलाओं की होती जांच
जिला अस्पताल में प्रतिमाह औसतन लगभग 210 गर्भवती महिलाओं की जांच होती है। हालांकि भ्रूण परीक्षण से अस्पताल प्रशासन इंकार कर रहा है। गर्भ में पल रहे बच्चे की स्थिति जांचने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जाता है। वहीं निजी सेंटरों पर लगभग 2600 महिलाओं की जांच प्रतिमाह होती है। यहां सब तरह की जांच होती है। हालांकि अब तक कार्रवाई किसी भी सेंटर के खिलाफ नहीं हुई है।
कोट
टीम गठित कर होगी जांच, करेंगे कार्रवाई
मुखबिर योजना भ्रूण हत्या पर बेहतर तरीके से शिकंजा कसने में कामयाब होगा। योजना के तहत टीम में स्वास्थ्य के अलावा प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी शामिल होंगे। जरूरत पड़ी तो पुलिस विभाग की भी मदद ली जाएगी। सेंटरों पर औचक छापेमारी कर अभिलेख देखे जाएंगे। अल्ट्रासाउंड मशीनों की स्थिति जांच कर कार्रवाई करेंगे।
डॉ. अरुणलाल सीएमओ