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विश्व शांति और कल्याण के लिए यज्ञ किया
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बड़ौत। श्री 1008 पार्श्वनाथ मंदिर नेहरू में श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ मंदिर कमेटी के तत्वावधान में चल रहे अष्टानिक महापर्व का रविवार को धूमधाम से समापन हो गया। अंतिम दिन श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की पूजा के साथ महायज्ञ का आयोजन किया गया। इसमें आहुतियां देकर विश्व शांति की कामना की गई।
पंडित नरेश जैन के सानिध्य में सौधर्म इंद्र संजय जैन, रश्मि जैन, यज्ञ नायक जयपाल जैन व शकुंतला जैन, धनपति कुबेर नीशू जैन व माही जैन ने रत्न वर्षा की। सर्वप्रथम श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा, भक्तामर पूजा व विधान किया गया। इसके पश्चात श्री सिद्ध चक्र विधान की पूजा की गई। विश्व के कल्याण एवं शांति की कामना के लिए महायज्ञ किया गया। इसके बाद बैंडबाजों के साथ श्रीजी को वेदी में विराजमान किया गया। विधानाचार्य नरेश जैन ने कहा आदमी जिंदगी भर नीति, अनीति, पाप, पुण्य, बेईमानी, अत्याचार, भ्रष्टाचार, अहंकार, निंदा, चुगली, मिलावटखोरी कर धन कमाता है, संपदा इकट्ठा करता है। संतान और परिवार के लिए मकान, जमीन, जायदाद, गाड़ी, बंगला, सोना, चांदी एकत्रित करता है, लेकिन जब मरता है तो सब कुछ यहीं छोड़ जाता है। ये सच्चाई, हकीकत, सच, सत्य जानता तो है पर मानता नहीं है। रात्रि में श्रीजी की संगीतमयी भव्य आरती की गई। सतीश जैन, प्रदीप जैन के मधुर भजनों पर भक्त झूमने लगे। विधान में सत्येंद्र जैन, अनिल जैन, आदिश जैन, रवि जैन, सुमंत जैन, संजीव जैन, पवन जैन मौजूद रहे।
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पंडित नरेश जैन के सानिध्य में सौधर्म इंद्र संजय जैन, रश्मि जैन, यज्ञ नायक जयपाल जैन व शकुंतला जैन, धनपति कुबेर नीशू जैन व माही जैन ने रत्न वर्षा की। सर्वप्रथम श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा, भक्तामर पूजा व विधान किया गया। इसके पश्चात श्री सिद्ध चक्र विधान की पूजा की गई। विश्व के कल्याण एवं शांति की कामना के लिए महायज्ञ किया गया। इसके बाद बैंडबाजों के साथ श्रीजी को वेदी में विराजमान किया गया। विधानाचार्य नरेश जैन ने कहा आदमी जिंदगी भर नीति, अनीति, पाप, पुण्य, बेईमानी, अत्याचार, भ्रष्टाचार, अहंकार, निंदा, चुगली, मिलावटखोरी कर धन कमाता है, संपदा इकट्ठा करता है। संतान और परिवार के लिए मकान, जमीन, जायदाद, गाड़ी, बंगला, सोना, चांदी एकत्रित करता है, लेकिन जब मरता है तो सब कुछ यहीं छोड़ जाता है। ये सच्चाई, हकीकत, सच, सत्य जानता तो है पर मानता नहीं है। रात्रि में श्रीजी की संगीतमयी भव्य आरती की गई। सतीश जैन, प्रदीप जैन के मधुर भजनों पर भक्त झूमने लगे। विधान में सत्येंद्र जैन, अनिल जैन, आदिश जैन, रवि जैन, सुमंत जैन, संजीव जैन, पवन जैन मौजूद रहे।
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