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शिक्षक सेवानिवृत्त हुए तो स्कूलों में लग गए ताले
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छपरौली में बंद पड़ा समाज कल्याण विभाग का स्कूल
- फोटो : BAGHPAT
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बागपत। जिले में समाज कल्याण विभाग की ओर से चार प्राइमरी विद्यालयों में से दो में शिक्षकों की भर्ती नहीं होने पर ताला लटक गया। इन स्कूलों में पढ़ने वाले 205 बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अब इन बच्चों का परिषदीय विद्यालयों में पंजीकरण कराया जा रहा है।
जिले में समाज कल्याण विभाग की ओर से चार विद्यालयों का संचालन किया जा रहा था। इन विद्यालयों का संचालन प्रबंध समिति करती है, जबकि शिक्षकों की तैनाती समाज कल्याण विभाग की ओर से की जाती है। विभाग की ओर से संचालित किरठल गांव के श्री रविदास प्राइमरी पाठशाला में तैनात शिक्षक वर्ष 2019 में सेवानिवृत्त हो गए थे, इसके बाद वहां किसी भी शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई।
इसके अलावा छपरौली के जग जीवनराम वैदिक प्राइमरी पाठशाला में तैनात शिक्षक 2020 में सेवानिवृत्त हो गए थे। जहां पंजीकृत छात्र-छात्राओं को शिक्षा देने के लिए बड़ौत के रविदास वैदिक पाठशाला में तैनात शिक्षक को नए शिक्षक की तैनाती होने तक संबद्ध कर दिया था।
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अब शासन ने समाज कल्याण विभाग में शिक्षकों की तैनाती पर रोक लगा दी। छपरौली के जगजीवन राम वैदिक प्राइमरी पाठशाला पर संबद्ध शिक्षक ने भी आना बंद कर दिया। शिक्षकों की कमी के कारण दोनों विद्यालयों पर ताला लटक गया है।
15 का हुआ दाखिला, 70 रोज आ रहे स्कूल
छपरौली की जगजीवन राम प्राइमरी पाठशाला में संबद्ध शिक्षक बच्चों को पढ़ाने का कार्य कर रहे थे। 20 मई तक 85 विद्यार्थी पंजीकृत थे। शिक्षक भर्ती पर रोक लगने के बाद शिक्षक ने आना बंद कर दिया। 16 जून से विद्यालय खुलने के बाद वहां पढ़ने वाले 15 का दाखिला अभिभावकों ने प्राइमरी पाठशाला नंबर एक में कराया है, जबकि 70 अभी भी बैग लेकर स्कूल आ रहे हैं और बिना पढ़ाई किए ही वापस लौट रहे हैं।
193 विद्यार्थियों को पढ़ा रहे पांच शिक्षक
समाज कल्याण विभाग के बड़ौत की रविदास वैदिक पाठशाला में चार शिक्षक 147 छात्र-छात्राओं और सूप गांव की रविदास प्राइमरी पाठशाला में एक शिक्षक 46 विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं।
अभिभावक ने की स्कूल खुलवाने की मांग
अभिभावक सरोज, अशोक, संजय, श्रीओम ने बताया कि प्राइमरी पाठशाला नंबर एक उनके घर से काफी दूर है। बच्चे घर के पास ही पढ़ाई करते थे तो कोई दिक्कत नहीं थी। घर से दूर इनको भेजने में डर लगता है। उन्होंने जल्द शिक्षक तैनात कर स्कूल संचालित कराने की मांग की।
बेसिक शिक्षा व समाज कल्याण के स्कूलों में मिलने वाली सुविधाएं
बेसिक शिक्षा विभाग व समाज कल्याण विभाग के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को मिलने वाली सुविधाएं अलग-अलग है। दोनों विभागों के स्कूलों में विद्यार्थियों को ड्रेस, मिड-डे मील का वितरण किया जाता है, जबकि समाज कल्याण विभाग के स्कूल में जूते, मौजे, स्वेटर का वितरण नहीं होता।
अनुसूचित जाति के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए शुरू किए गए थे स्कूल
समाज कल्याण अधिकारी तुलिका शर्मा ने बताया कि अनुसूचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए अनुसूचित बाहुल्य क्षेत्रों में विद्यालयों का संचालन शुरू किया गया था। इन विद्यालयों में परिषदीय विद्यालयों की तर्ज पर निशुल्क पुस्तक, ड्रेस उपलब्ध कराई जाती थी। तीन माह पहले शासन स्तर से विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति न करने के आदेश मिले थे। शिक्षकों की नियुक्ति न होने के कारण स्कूल बंद हो गए।
कोट...
समाज कल्याण विभाग के किरठल और छपरौली के स्कूल में शिक्षक की तैनाती के लिए शासन को पत्र लिखा गया था। अब स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती पर रोक लग गई है। शिक्षकों की तैनाती नहीं होने के कारण वहां पढ़ने वाले बच्चों का दाखिला बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में कराया जा रहा है। - तुलिका शर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी
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जिले में समाज कल्याण विभाग की ओर से चार विद्यालयों का संचालन किया जा रहा था। इन विद्यालयों का संचालन प्रबंध समिति करती है, जबकि शिक्षकों की तैनाती समाज कल्याण विभाग की ओर से की जाती है। विभाग की ओर से संचालित किरठल गांव के श्री रविदास प्राइमरी पाठशाला में तैनात शिक्षक वर्ष 2019 में सेवानिवृत्त हो गए थे, इसके बाद वहां किसी भी शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई।
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इसके अलावा छपरौली के जग जीवनराम वैदिक प्राइमरी पाठशाला में तैनात शिक्षक 2020 में सेवानिवृत्त हो गए थे। जहां पंजीकृत छात्र-छात्राओं को शिक्षा देने के लिए बड़ौत के रविदास वैदिक पाठशाला में तैनात शिक्षक को नए शिक्षक की तैनाती होने तक संबद्ध कर दिया था।
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अब शासन ने समाज कल्याण विभाग में शिक्षकों की तैनाती पर रोक लगा दी। छपरौली के जगजीवन राम वैदिक प्राइमरी पाठशाला पर संबद्ध शिक्षक ने भी आना बंद कर दिया। शिक्षकों की कमी के कारण दोनों विद्यालयों पर ताला लटक गया है।
15 का हुआ दाखिला, 70 रोज आ रहे स्कूल
छपरौली की जगजीवन राम प्राइमरी पाठशाला में संबद्ध शिक्षक बच्चों को पढ़ाने का कार्य कर रहे थे। 20 मई तक 85 विद्यार्थी पंजीकृत थे। शिक्षक भर्ती पर रोक लगने के बाद शिक्षक ने आना बंद कर दिया। 16 जून से विद्यालय खुलने के बाद वहां पढ़ने वाले 15 का दाखिला अभिभावकों ने प्राइमरी पाठशाला नंबर एक में कराया है, जबकि 70 अभी भी बैग लेकर स्कूल आ रहे हैं और बिना पढ़ाई किए ही वापस लौट रहे हैं।
193 विद्यार्थियों को पढ़ा रहे पांच शिक्षक
समाज कल्याण विभाग के बड़ौत की रविदास वैदिक पाठशाला में चार शिक्षक 147 छात्र-छात्राओं और सूप गांव की रविदास प्राइमरी पाठशाला में एक शिक्षक 46 विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं।
अभिभावक ने की स्कूल खुलवाने की मांग
अभिभावक सरोज, अशोक, संजय, श्रीओम ने बताया कि प्राइमरी पाठशाला नंबर एक उनके घर से काफी दूर है। बच्चे घर के पास ही पढ़ाई करते थे तो कोई दिक्कत नहीं थी। घर से दूर इनको भेजने में डर लगता है। उन्होंने जल्द शिक्षक तैनात कर स्कूल संचालित कराने की मांग की।
बेसिक शिक्षा व समाज कल्याण के स्कूलों में मिलने वाली सुविधाएं
बेसिक शिक्षा विभाग व समाज कल्याण विभाग के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को मिलने वाली सुविधाएं अलग-अलग है। दोनों विभागों के स्कूलों में विद्यार्थियों को ड्रेस, मिड-डे मील का वितरण किया जाता है, जबकि समाज कल्याण विभाग के स्कूल में जूते, मौजे, स्वेटर का वितरण नहीं होता।
अनुसूचित जाति के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए शुरू किए गए थे स्कूल
समाज कल्याण अधिकारी तुलिका शर्मा ने बताया कि अनुसूचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए अनुसूचित बाहुल्य क्षेत्रों में विद्यालयों का संचालन शुरू किया गया था। इन विद्यालयों में परिषदीय विद्यालयों की तर्ज पर निशुल्क पुस्तक, ड्रेस उपलब्ध कराई जाती थी। तीन माह पहले शासन स्तर से विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति न करने के आदेश मिले थे। शिक्षकों की नियुक्ति न होने के कारण स्कूल बंद हो गए।
कोट...
समाज कल्याण विभाग के किरठल और छपरौली के स्कूल में शिक्षक की तैनाती के लिए शासन को पत्र लिखा गया था। अब स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती पर रोक लग गई है। शिक्षकों की तैनाती नहीं होने के कारण वहां पढ़ने वाले बच्चों का दाखिला बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में कराया जा रहा है। - तुलिका शर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी