बदहाली से जूझते बागपत में अब पानी का भी टोटा
सोमवार को दिल्ली-सहारनपुर रोड स्थित रालोद कार्यालय पर कार्यकर्ताओं की बैठक में विधायक ने कहा कि रालोद गन्ना भुगतान को लेकर चिंतित है। जनपद में किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है। इस संबंध में जिलाधिकारी, मंडलायुक्त, मुख्य अभियंता गंगा से मिलकर दबाव भी बनाया गया, लेकिन पानी नहीं मिला। मात्र 300 क्यूसेक पानी मिला, जो न के बराबर है। उन्होंने बताया कि 1994 में पांच राज्यों के बंटवारे में पानी उप्र की मुलायम सरकार ने अन्य राज्यों को दे दिया था। इसका नुकसान आज पश्चिमी उप्र का किसान उठा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में मंगलवार को रालोद का प्रतिनिधिमंडल गन्ना भुगतान और पानी की समस्या को लेकर जिलाधिकारी से मिलेगा। यह समाधान नहीं होता तो आंदोलन किया जाएगा। पूर्व विधायक अजय कुमार ने कहा कि प्रदेश की सरकार बहरी सरकार है। अब आंदोलन की जरूरत है। अब किसानों से हो रहे अन्याय को लेकर लड़ाई के अलावा कुछ नहीं रह गया है। युवा रालोद के जिलाध्यक्ष प्रमेंद्र तोमर ने कहा कि युवा कार्यकर्ताओं में गन्ना भुगतान को लेकर आक्रोश व्याप्त है और कभी भी यह आक्रोश सड़कों पर फूट सकता है।
अध्यक्षता महावीर सिंह और संचालन हरबीर सिंह ने किया। बैठक में वीरसैन, रणवीर सूप, इंद्रपाल, रालोद के मंडल अध्यक्ष सुखवीर सिंह गठिना, रामबीर सिंह, राजेंद्र हेवा, मुनेश बरवाला, सुभाष चंद, सत्यवीर, रामचरण शास्त्री, कर्म सिंह, देवपाल राणा, देशपाल खोखर आदि उपस्थित रहे।
सूखी नहरों से मुरझाए किसानों के अरमान
बड़ौत। लगातार बढ़ती हुई तपिश ने जहां लोगों को बेहाल कर दिया है, वहीं नहरों में पानी के अभाव और मानसून की बेरुखी से किसानों की फसलें सूख रही है। पानी के अभाव में गन्ने की फसल पर संकट गहरा गया है। उधर सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने किसानों के लिए गंगनहर के अफसरों से पानी मांगा तो उन्होंने आवश्यक 600 क्यूसेक पानी की बजाए मात्र 200 क्यूसेक ही पानी छोड़ा है। जनपद से गुजर रही एक मात्र पूर्वी यमुना नहर के साथ रजवाहे और माइनर सूखे पड़े हैं। इससे किसानों की फसलें सूख रही हैं।
जिले में करीब 70 प्रतिशत भूमि पर गन्ने की फसल का उत्पादन किया जाता है। मगर पानी के अभाव के चलते गन्ने की फसलें सूख रही है। किसान यशवीर तोमर, राजवीर तोमर, जयवीर तोमर, सचिन चौहान, अमित, हरबीर, जयचंद, श्याम सिंह सहित अन्य ने बताया कि एक तो जनपद की विद्युत व्यवस्था सही नहीं है। उधर, नहरों मे पानी के अभाव के चलते फसलें सूख रही हैं।