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सारे पाप कर्मों की जड़ लोभ और तृष्णा
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Sat, 10 Sep 2016 01:28 AM IST
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खेकड़ा में दशलक्षण पर्व पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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दशलक्षण पर्व के दौरान दिगंबर जैन मंदिर में श्रद्धालुओं ने उत्तम धर्म की पूजा की। जैन साध्वी कीर्तिमती माता ने कहा सारे पाप कर्मों की जड़ लोभ और तृष्णा है।
शुक्रवार को दिगंबर जैन मंदिर में प्रर्यूषण पर्व उत्साहपूर्वक और भक्ति माहौल में धूमधाम से मनाया गया। विधानाचार्य सतीश शास्त्री ने श्री जी का अभिषेक, शांति धारा और आराधना की। तत्वार्थ सूत्र का वचन और शाम को श्रावक प्रतिक्रमण और सामूहिक आरती की।
श्रद्धालुओं ने उत्तम शौच धर्म की पूजा की। जैन साध्वी कीर्तिमति माता ने कहा स्वर्ण मृग के लोभ में मर्यादा पुरुषोत्तम राम को सीता का हरण झेलना पड़ा। लोभी कौरव संख्या बल में अधिक होने पर भी परास्त होकर अपना राज्य खो बैठे। ऐसे लोभ को छोड़कर संतोष धारण कर अपना आत्म कल्याण करना चाहिए। सतीश शास्त्री ने लोभ को पाप का बाप बताते हुए तृष्णा को नागिन के सामान दुखदायी और पापों की जननी बताया।
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विषय भोगों की तृष्णा एवं लोभ कपय से बचकर अपने जीवन में उत्तम शौच धारण करने को उत्तम बताया। श्रद्धालुओं द्वारा धार्मिक गीतों पर नृत्य किया। इसमें सुधीर जैन, प्रमोद जैन, राकेश मित्तल, आनंद जैन, प्रवीण जैन, बिन्नो, सुनील जैन, पुनीत जैन, अनमोल जैन, सार्थक मौजूद रहे।
धूमधाम से मनेगी विश्वकर्मा जयंती
बागपत। शहर में विश्वकर्मा भगवान की जयंती 17 सितंबर को धूमधाम के साथ मनाई जाएगी। विक्रम सिंह पांचाल ने बताया अग्रवाल धर्मशाला से कार्यक्रम की शुभारंभ होगा। इस मौके पर हवन, प्रसाद वितरण, भंडारा, शोभा यात्रा निकाली जाएगी।
लोभ समता भाव का शत्रु है
खेकड़ा। दशलक्षण पर्व के चलते जैन मंदिरों में भगवान के अभिषेक, शांति धारा पूजन पंच परमेष्ठी विधान का आयोजन हुआ। उत्तम सत्य के महत्व पर प्रकाश डाला।
दशलक्षण पर्व के चौथे दिन शुक्रवार को नगर के जैन कॉलेज मार्ग स्थित भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में ब्रहमचारिणी कल्पना दीदी के सानिध्य में सर्व प्रथम सुबह सात बजे भगवान का अभिषेक हुआ।
इसके पश्चात शांति धारा सामूहिक पूजन विधि विधान के साथ कराया । साथ ही पंच परमेष्ठी विधान में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। विधान की समाप्ति पर ब्रह्मचारिणी कल्पना दीदी ने उत्तम के सत्य के महत्व प्रकाश डालते हुए कहा आत्मा की स्वच्छता का निर्मल होना ही शौच धर्म कहलाता है।
यह धर्म लोभ के अभाव में प्रकट होता है। लोभ समता भाव का शत्रु है। इसलिए लोभ का त्याग कर अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए। तभी मनुष्य का कल्याण संभव है। रात्रि में शास्त्र प्रवचन प्रश्न मंच का आयोजन कराया। प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर बड़ागांव, त्रिलोक तीर्थ धाम बड़ागांव, श्री शांति नाथ दिगंबर जैन मंदिर में भी धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया।
उत्तम शौच धर्म को अंगीगार कर पूजा की
बड़ौत। दशलक्षण पर्व के चौथे दिन नगर के मंदिरों में जैन समाज के लोगों ने उत्तम शौच धर्म को अंगीगाकर पूजा अर्चना की और मंदिरों में चले रहे विविधों में अर्घ्य भी प्रदान किए। बड़ा जैन मंदिर में दिगंबर जैन युवा मंच द्वारा चलाएं जार रहे महामंडल विधान में भगवान चंद्र प्रभु का अभिषेक किया।
विविध आठ पूजा की, इसमें धातु की द्वीप पूजा दिशा विजय मेरन की धातु की चारों दिशा मध्य की विजय मेरनू के नेत्र कोण सिद्ध की विजय मेरु के विदेह संबंधी, विजय मेहर के पद्चिह्न संबंधी व अन्य क्रियाएं की। छोटा जैन मंदिर मेें दिगंबर जैन मेें भगवान का अभिषेक की। अतिथि भवन में पूजा हुई।
शाम को एक शाम शहीदों के नाम पर कार्यक्रम हुआ। इसमें सुनील जैन, अतुल, दिनेश, वकील, आरके जैन, संदीप जैन, टीसी जैन, सतीश, प्रदीप, श्रवण जैन आदि रहे। वहीं अजित नाथ मंदिर मेें विधिन में नित्य नियम की पूजा की।
घर की सफाई जरूरी
बड़ौत। दिगंबर जैन अतिथि भवन में विहर्ष सागर महाराज ने कहा अतिथि के आगमन से पूर्व घर की सफाई जरूरी है। विजा पर्व से भूमि की पूजा आवश्यक है। इसी प्रकार सत्य से पूर्व आत्म की सफाई आवश्यक है। उन्होंने उत्तम शौच धर्म पर भी चर्चा की।
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शुक्रवार को दिगंबर जैन मंदिर में प्रर्यूषण पर्व उत्साहपूर्वक और भक्ति माहौल में धूमधाम से मनाया गया। विधानाचार्य सतीश शास्त्री ने श्री जी का अभिषेक, शांति धारा और आराधना की। तत्वार्थ सूत्र का वचन और शाम को श्रावक प्रतिक्रमण और सामूहिक आरती की।
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श्रद्धालुओं ने उत्तम शौच धर्म की पूजा की। जैन साध्वी कीर्तिमति माता ने कहा स्वर्ण मृग के लोभ में मर्यादा पुरुषोत्तम राम को सीता का हरण झेलना पड़ा। लोभी कौरव संख्या बल में अधिक होने पर भी परास्त होकर अपना राज्य खो बैठे। ऐसे लोभ को छोड़कर संतोष धारण कर अपना आत्म कल्याण करना चाहिए। सतीश शास्त्री ने लोभ को पाप का बाप बताते हुए तृष्णा को नागिन के सामान दुखदायी और पापों की जननी बताया।
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विषय भोगों की तृष्णा एवं लोभ कपय से बचकर अपने जीवन में उत्तम शौच धारण करने को उत्तम बताया। श्रद्धालुओं द्वारा धार्मिक गीतों पर नृत्य किया। इसमें सुधीर जैन, प्रमोद जैन, राकेश मित्तल, आनंद जैन, प्रवीण जैन, बिन्नो, सुनील जैन, पुनीत जैन, अनमोल जैन, सार्थक मौजूद रहे।
धूमधाम से मनेगी विश्वकर्मा जयंती
बागपत। शहर में विश्वकर्मा भगवान की जयंती 17 सितंबर को धूमधाम के साथ मनाई जाएगी। विक्रम सिंह पांचाल ने बताया अग्रवाल धर्मशाला से कार्यक्रम की शुभारंभ होगा। इस मौके पर हवन, प्रसाद वितरण, भंडारा, शोभा यात्रा निकाली जाएगी।
लोभ समता भाव का शत्रु है
खेकड़ा। दशलक्षण पर्व के चलते जैन मंदिरों में भगवान के अभिषेक, शांति धारा पूजन पंच परमेष्ठी विधान का आयोजन हुआ। उत्तम सत्य के महत्व पर प्रकाश डाला।
दशलक्षण पर्व के चौथे दिन शुक्रवार को नगर के जैन कॉलेज मार्ग स्थित भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में ब्रहमचारिणी कल्पना दीदी के सानिध्य में सर्व प्रथम सुबह सात बजे भगवान का अभिषेक हुआ।
इसके पश्चात शांति धारा सामूहिक पूजन विधि विधान के साथ कराया । साथ ही पंच परमेष्ठी विधान में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। विधान की समाप्ति पर ब्रह्मचारिणी कल्पना दीदी ने उत्तम के सत्य के महत्व प्रकाश डालते हुए कहा आत्मा की स्वच्छता का निर्मल होना ही शौच धर्म कहलाता है।
यह धर्म लोभ के अभाव में प्रकट होता है। लोभ समता भाव का शत्रु है। इसलिए लोभ का त्याग कर अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए। तभी मनुष्य का कल्याण संभव है। रात्रि में शास्त्र प्रवचन प्रश्न मंच का आयोजन कराया। प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर बड़ागांव, त्रिलोक तीर्थ धाम बड़ागांव, श्री शांति नाथ दिगंबर जैन मंदिर में भी धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया।
उत्तम शौच धर्म को अंगीगार कर पूजा की
बड़ौत। दशलक्षण पर्व के चौथे दिन नगर के मंदिरों में जैन समाज के लोगों ने उत्तम शौच धर्म को अंगीगाकर पूजा अर्चना की और मंदिरों में चले रहे विविधों में अर्घ्य भी प्रदान किए। बड़ा जैन मंदिर में दिगंबर जैन युवा मंच द्वारा चलाएं जार रहे महामंडल विधान में भगवान चंद्र प्रभु का अभिषेक किया।
विविध आठ पूजा की, इसमें धातु की द्वीप पूजा दिशा विजय मेरन की धातु की चारों दिशा मध्य की विजय मेरनू के नेत्र कोण सिद्ध की विजय मेरु के विदेह संबंधी, विजय मेहर के पद्चिह्न संबंधी व अन्य क्रियाएं की। छोटा जैन मंदिर मेें दिगंबर जैन मेें भगवान का अभिषेक की। अतिथि भवन में पूजा हुई।
शाम को एक शाम शहीदों के नाम पर कार्यक्रम हुआ। इसमें सुनील जैन, अतुल, दिनेश, वकील, आरके जैन, संदीप जैन, टीसी जैन, सतीश, प्रदीप, श्रवण जैन आदि रहे। वहीं अजित नाथ मंदिर मेें विधिन में नित्य नियम की पूजा की।
घर की सफाई जरूरी
बड़ौत। दिगंबर जैन अतिथि भवन में विहर्ष सागर महाराज ने कहा अतिथि के आगमन से पूर्व घर की सफाई जरूरी है। विजा पर्व से भूमि की पूजा आवश्यक है। इसी प्रकार सत्य से पूर्व आत्म की सफाई आवश्यक है। उन्होंने उत्तम शौच धर्म पर भी चर्चा की।