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गठबंधन के खिलाफ हैं स्थानीय नेता
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Fri, 03 Jun 2016 11:55 PM IST
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राजनीति
- फोटो : demo
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बागपत में नेताजी और छोटे चौधरी की मुलाकात और दोस्ताने की चर्चाओं के बीच स्थानीय कार्यकर्ताओं ने विरोध के सुर तेज कर दिए हैं। सपा युवजन सभा के जिलाध्यक्ष ने गठबंधन पर बयान जारी कर विरोध जताया है। उधर, रालोद कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर गठबंधन का विरोध कर रहे हैं।
शिष्टाचार के नाम पर हुई दोनों बड़े नेताओं की मुलाकात के नतीजे क्या होंगे, यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन दोनों पार्टियों के स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं के सब्र का बांध टूट चुका है। शुक्रवार को सपा युवजन सभा के जिलाध्यक्ष डॉ तरुण देव ने बयान जारी कर कहा कि मुस्लिम समाज में संभावित गठबंधन को लेकर रोष है। मुजफ्फरनगर दंगे के चलते मुस्लिम इसके विरोध में हैं। इससे सपा को नुकसान होने की संभावना है।
गठबंधन हुआ तो इसका विरोध किया जाएगा। विरोध करने वालों में अफजल रटौल, महताब, सलीम, महेश, इरफान, आलम खां, जीशान कुरैशी मौजूद रहे।
उधर, सोशल मीडिया पर भी संभावित गठबंधन का विरोध चल रहा है। व्हाट्स ऐप पर संयोजक पीड़ित संघ ग्रुप पर अनुज सरोहा ने पोस्ट किया था कि अगर रालोद सपा से मिलती है तो वह रालोद के साथ नहीं हैं। फिर वह भाजपा के साथ चले जाएंगे।
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नितिन प्रधान ने यहां पोस्ट किया है कि पार्टियों को इतनी बेचैनी तो मोदी और शरीफ की मुलाकात से नहीं हुई थी, जितनी मुलायम और अजित सिंह की मुलाकात से हो गई है। आदित्य प्रधान ने पोस्ट में गठबंधन पर सिर्फ इतना लिखा कि 'माया ओनल’। अनुज सरोहा की दूसरी पोस्ट में लिखा गया है कि रालोद सपा में क्यों जा रही है। इसके अलावा अन्य जितने भी ग्रुप हैं, उनमें गठबंधन पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
पीड़ित संघ में बड़े-बड़े रालोद नेता
व्हाट्स ऐप ग्रुप संयोजक पीड़ित संघ में रालोद के बड़े-बड़े नेता शामिल हैं। इनमें पूर्व विधायक अजय तोमर, पूर्व जिलाध्यक्ष अनिल जैन, प्रधान राजू सिरसली, पूर्व जिला पंचायत सदस्य योगेश धामा, जिला पंचायत सदस्य लेखराज समेत कई बड़े नाम दिए गए हैं। हालांकि इनमें से किसी ने गठबंधन पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
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शिष्टाचार के नाम पर हुई दोनों बड़े नेताओं की मुलाकात के नतीजे क्या होंगे, यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन दोनों पार्टियों के स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं के सब्र का बांध टूट चुका है। शुक्रवार को सपा युवजन सभा के जिलाध्यक्ष डॉ तरुण देव ने बयान जारी कर कहा कि मुस्लिम समाज में संभावित गठबंधन को लेकर रोष है। मुजफ्फरनगर दंगे के चलते मुस्लिम इसके विरोध में हैं। इससे सपा को नुकसान होने की संभावना है।
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गठबंधन हुआ तो इसका विरोध किया जाएगा। विरोध करने वालों में अफजल रटौल, महताब, सलीम, महेश, इरफान, आलम खां, जीशान कुरैशी मौजूद रहे।
उधर, सोशल मीडिया पर भी संभावित गठबंधन का विरोध चल रहा है। व्हाट्स ऐप पर संयोजक पीड़ित संघ ग्रुप पर अनुज सरोहा ने पोस्ट किया था कि अगर रालोद सपा से मिलती है तो वह रालोद के साथ नहीं हैं। फिर वह भाजपा के साथ चले जाएंगे।
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नितिन प्रधान ने यहां पोस्ट किया है कि पार्टियों को इतनी बेचैनी तो मोदी और शरीफ की मुलाकात से नहीं हुई थी, जितनी मुलायम और अजित सिंह की मुलाकात से हो गई है। आदित्य प्रधान ने पोस्ट में गठबंधन पर सिर्फ इतना लिखा कि 'माया ओनल’। अनुज सरोहा की दूसरी पोस्ट में लिखा गया है कि रालोद सपा में क्यों जा रही है। इसके अलावा अन्य जितने भी ग्रुप हैं, उनमें गठबंधन पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
पीड़ित संघ में बड़े-बड़े रालोद नेता
व्हाट्स ऐप ग्रुप संयोजक पीड़ित संघ में रालोद के बड़े-बड़े नेता शामिल हैं। इनमें पूर्व विधायक अजय तोमर, पूर्व जिलाध्यक्ष अनिल जैन, प्रधान राजू सिरसली, पूर्व जिला पंचायत सदस्य योगेश धामा, जिला पंचायत सदस्य लेखराज समेत कई बड़े नाम दिए गए हैं। हालांकि इनमें से किसी ने गठबंधन पर कोई टिप्पणी नहीं की है।