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पंचायत चुनाव में रालोद का परचम लहराया
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Tue, 03 Nov 2015 12:59 AM IST
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बागपत में जिला पंचायत सदस्य के चुनाव परिणाम ने फिर से रालोद में जान फूंक दी है। जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में रालोद का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा, जबकि प्रदीप ठाकुर को छोड़कर सपा को तीन सीटें निकालने में भी पसीने छूट गए। बसपा की हालत भी सपा से अधिक अच्छी नहीं रही। बसपा के भी तीन ही उम्मीदवार जीत का वरण कर सके हैं।
जिला पंचायत के चुनावों में पूरी तरह से रालोद ही छाया रहा। जिला पंचायत अध्यक्ष योगेश धामा के साथ उनकी पत्नी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रेनू धामा और उनकी भाभी अलका धामा ने रिकार्ड तोड़ वोटें हासिल कर जिले में रालोद के दबदबे को बरकरार रखा।
रालोद के लेखराज ने भी करीब छह हजार वोटों से अधिक से जीत हासिल कर अपना असर छोड़ा। उनके अलावा रालोद समर्थित धीरज उज्ज्वल की भाभी लोकेश देवी, पुष्पेंद्र, बीना, राजेंद्र, निशांत, अनुज, विराज, सुशीला, रविंद्र बली समेत 13 उम्मीदवारों ने विजयश्री हासिल की। इस जीत से रालोद समर्थकों में भारी जोश है। जगह-जगह बैठकें कर सम्मानित किया जा रहा है।
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इस चुनाव में सपा और बसपा ने अपनी साख जरूर बचा ली है। हालांकि सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रदीप ठाकुर को छोड़कर अन्य दोनों सीटों पर अंत तक कड़ा मुकाबला रहा। प्रदेश सरकार में पशुधन विभाग के सलाहकार चौधरी साहब सिंह की पत्नी मिथलेश की अंत तक के बूथ की काउंटिंग तक सांसें अटकी रहीं।
मात्र 51 वोटों से ही परिणाम उनके पक्ष में गया, जबकि वार्ड 17 में ओमकार यादव समेत सपा के कई धुरंधर खड़े हो गए। इसका नुकसान भी सपा को उठाना पड़ा। यहां सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ओमकार सिंह यादव के अलावा जिला पंचायत सदस्य अभयवीर यादव और छात्र सभा के प्रदेश कार्यकारिणी में सदस्य रहे नितिन यादव भी जोरदार तरीके से लड़े, जिसके चलते ओमकार यादव को मात्र 88 मतों से ही जीत हासिल हो सकी। यहां तो ओमकार यादव और फखरुद्दीन को छोड़कर अन्य की जमानत भी नहीं बच सकी।
बसपा समर्थित दीपक यादव ने जोरदार तरीके से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। मुबस्सिर और सुधा सोलंकी के सिर भी जीत का सेहरा बंधा। हालांकि वार्ड नंबर 13 के निर्देश को छोड़कर अन्य कोई छाप नहीं छोड़ पाया। इन चुनावों ने भाजपा और कांग्रेस की जिले में हकीकत बयां कर दी है। भाजपा और कांग्रेस का एक भी समर्थित प्रत्याशी कहीं भी संघर्ष करता नजर नहीं आया। कांग्रेस का तो कोई नामलेवा भी नजर नहीं आया।
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जिला पंचायत के चुनावों में पूरी तरह से रालोद ही छाया रहा। जिला पंचायत अध्यक्ष योगेश धामा के साथ उनकी पत्नी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रेनू धामा और उनकी भाभी अलका धामा ने रिकार्ड तोड़ वोटें हासिल कर जिले में रालोद के दबदबे को बरकरार रखा।
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रालोद के लेखराज ने भी करीब छह हजार वोटों से अधिक से जीत हासिल कर अपना असर छोड़ा। उनके अलावा रालोद समर्थित धीरज उज्ज्वल की भाभी लोकेश देवी, पुष्पेंद्र, बीना, राजेंद्र, निशांत, अनुज, विराज, सुशीला, रविंद्र बली समेत 13 उम्मीदवारों ने विजयश्री हासिल की। इस जीत से रालोद समर्थकों में भारी जोश है। जगह-जगह बैठकें कर सम्मानित किया जा रहा है।
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इस चुनाव में सपा और बसपा ने अपनी साख जरूर बचा ली है। हालांकि सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रदीप ठाकुर को छोड़कर अन्य दोनों सीटों पर अंत तक कड़ा मुकाबला रहा। प्रदेश सरकार में पशुधन विभाग के सलाहकार चौधरी साहब सिंह की पत्नी मिथलेश की अंत तक के बूथ की काउंटिंग तक सांसें अटकी रहीं।
मात्र 51 वोटों से ही परिणाम उनके पक्ष में गया, जबकि वार्ड 17 में ओमकार यादव समेत सपा के कई धुरंधर खड़े हो गए। इसका नुकसान भी सपा को उठाना पड़ा। यहां सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ओमकार सिंह यादव के अलावा जिला पंचायत सदस्य अभयवीर यादव और छात्र सभा के प्रदेश कार्यकारिणी में सदस्य रहे नितिन यादव भी जोरदार तरीके से लड़े, जिसके चलते ओमकार यादव को मात्र 88 मतों से ही जीत हासिल हो सकी। यहां तो ओमकार यादव और फखरुद्दीन को छोड़कर अन्य की जमानत भी नहीं बच सकी।
बसपा समर्थित दीपक यादव ने जोरदार तरीके से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। मुबस्सिर और सुधा सोलंकी के सिर भी जीत का सेहरा बंधा। हालांकि वार्ड नंबर 13 के निर्देश को छोड़कर अन्य कोई छाप नहीं छोड़ पाया। इन चुनावों ने भाजपा और कांग्रेस की जिले में हकीकत बयां कर दी है। भाजपा और कांग्रेस का एक भी समर्थित प्रत्याशी कहीं भी संघर्ष करता नजर नहीं आया। कांग्रेस का तो कोई नामलेवा भी नजर नहीं आया।