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थर्मल पावर प्लांट में होगा पराली का उपयोग
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बागपत के खेकड़ा कृषि विज्ञान केंद्र पर आयोजित पराली फसल अवशेष प्रबंधन पर आयोजित कार्यशाला मे मं?
- फोटो : KAHKRA
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पराली फसल अवशेष प्रबंधन पर राष्ट्रीय विद्युत मिशन की कार्यशाला में दी गई जानकारी
अधिकारियों ने प्रोजेक्टर के माध्यम से पराली को जलाने के बजाय लाभकारी बनाने के बारे में बताया
संवाद न्यूज एजेंसी
खेकड़ा (बागपत)। अब पराली का इस्तेमाल बिजली बनाने में होगा। इससे बिजली बनाने में कोयले की मांग भी कम होगी। पराली बिजली बनाने वाले प्लांट खरीदेंगे। इससे किसान को मुनाफा होगा। कृषि विज्ञान केन्द्र के सभागार में बुधवार को पराली फसल अवशेष प्रबंधन पर राष्ट्रीय विद्युत मिशन की कार्यशाला में किसानों को इसके संबंध में जानकारी दी गई।
कार्यशाला का शुभारंभ एनपीटीआई फरीदाबाद के महानिदेशक डा. तृप्ता ठाकुर ने किया। राष्ट्रीय विद्युत मिशन से जुडे़ अधिकारियों ने किसानों को प्रोजेक्टर के माध्यम से पराली को जलाने के बजाय लाभकारी बनाने के बारे में बताया। बताया कि यह अभियान बिजली उत्पादन बढ़ाने, प्रदूषण कम करने और किसानों की आमदनी बढ़ाने से जुड़ा है। इस योजना में कोयला से बनने वाली बिजली परियोजनाओं में पांच फीसदी बायोमास का इस्तेमाल अनिवार्य किया जा रहा है। सरकार के इस कदम से किसानों को लगभग 15,000 करोड़ रुपये की वार्षिक आमदनी होगी। पराली का इस्तेमाल बिजली बनाने में होगा तो दिल्ली-एनसीआर में होने वाला वायु प्रदूषण भी कम होगा। साथ ही बिजली उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी। कार्यशाला में बायोमास के मिशन डायरेक्टर सुदीप नाग, डीवीसी के मुख्य अभियंता सुशील कुमार, केन्द्रीय विकास प्राधिकरण के मुख्य अभियंता संजीव कुमार कस्सी, एसवीपीयूटी मेरठ के निदेशक विस्तार डॉ. पीके सिंह, डॉ. इंदू माहेश्वरी, डॉ. मंजू, डॉ. एनवी कुमार, प्रभजोत सिंह, क्षितिज जैन, केवीके प्रभारी डॉ. संदीप चौधरी, किसान राजेश कुमार, श्रीपाल, अशोक कुमार, बालेश्वर, देवेंद्र राणा, ओमप्रकाश मलिक, बिजेंद्र सिंह, पप्पू, मुकेश, रविंद्र, प्रदीप कुमार आदि शामिल रहे।
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अधिकारियों ने प्रोजेक्टर के माध्यम से पराली को जलाने के बजाय लाभकारी बनाने के बारे में बताया
संवाद न्यूज एजेंसी
खेकड़ा (बागपत)। अब पराली का इस्तेमाल बिजली बनाने में होगा। इससे बिजली बनाने में कोयले की मांग भी कम होगी। पराली बिजली बनाने वाले प्लांट खरीदेंगे। इससे किसान को मुनाफा होगा। कृषि विज्ञान केन्द्र के सभागार में बुधवार को पराली फसल अवशेष प्रबंधन पर राष्ट्रीय विद्युत मिशन की कार्यशाला में किसानों को इसके संबंध में जानकारी दी गई।
कार्यशाला का शुभारंभ एनपीटीआई फरीदाबाद के महानिदेशक डा. तृप्ता ठाकुर ने किया। राष्ट्रीय विद्युत मिशन से जुडे़ अधिकारियों ने किसानों को प्रोजेक्टर के माध्यम से पराली को जलाने के बजाय लाभकारी बनाने के बारे में बताया। बताया कि यह अभियान बिजली उत्पादन बढ़ाने, प्रदूषण कम करने और किसानों की आमदनी बढ़ाने से जुड़ा है। इस योजना में कोयला से बनने वाली बिजली परियोजनाओं में पांच फीसदी बायोमास का इस्तेमाल अनिवार्य किया जा रहा है। सरकार के इस कदम से किसानों को लगभग 15,000 करोड़ रुपये की वार्षिक आमदनी होगी। पराली का इस्तेमाल बिजली बनाने में होगा तो दिल्ली-एनसीआर में होने वाला वायु प्रदूषण भी कम होगा। साथ ही बिजली उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी। कार्यशाला में बायोमास के मिशन डायरेक्टर सुदीप नाग, डीवीसी के मुख्य अभियंता सुशील कुमार, केन्द्रीय विकास प्राधिकरण के मुख्य अभियंता संजीव कुमार कस्सी, एसवीपीयूटी मेरठ के निदेशक विस्तार डॉ. पीके सिंह, डॉ. इंदू माहेश्वरी, डॉ. मंजू, डॉ. एनवी कुमार, प्रभजोत सिंह, क्षितिज जैन, केवीके प्रभारी डॉ. संदीप चौधरी, किसान राजेश कुमार, श्रीपाल, अशोक कुमार, बालेश्वर, देवेंद्र राणा, ओमप्रकाश मलिक, बिजेंद्र सिंह, पप्पू, मुकेश, रविंद्र, प्रदीप कुमार आदि शामिल रहे।
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