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Baghpat News: कभी मैं पीर आंखों की, कभी अंगार लिखती हूं
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फोटो - 12
संवाद न्यूज एजेंसी
छपरौली। कस्बे में चल रहे पंचकल्याक प्रतिष्ठा महोत्सव के समापन पर बुधवार को कवि सम्मेलन हुआ, जिसमें मेरठ, राजस्थान, दिल्ली से आए कवियों ने अपनी कविताओं पर जमकर तालियां बटोरीं।
सम्मेलन का शुभारंभ कवयित्री सपना सोनी ने भगवान महावीर वंदना से किया। इसके बाद उन्होंने शृंगार रस की कविता कभी मैं पीर आंखों की, कभी अंगार लिखती हूूं, कभी शमशीर सहने की कभी शृंगार लिखती हूं से खूब तालियां बटोरीं। श्रृंगार रस के कवि इन्द्रजीत ने लोग कहते हैं कि मैं खूब पीता हूं, मैं तो जज्बे को अपने जीता हूं कविता सुनाई। नवोदित कवि पीके आजाद ने मैं ऊर्जा का पर्याय हूं, मैं भारत की गौरव गाथा हूं सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। युवा कवि सौरभ जैन सुमन ने शहीद के नाम पर कविता सुनाकर दर्शकों को भावुक कर दिया। दिनेश रघुवंशी ने तुम्हारे बिना मेरा संसार नहीं है, अंगुली पकड़कर तूने चलना सिखाया, मैं आज कुछ कर सकूं, तूने मुझे काबिल बनाया सुनाकर मां की ममता को उजागर किया। कवि डॉ़ प्रवीण शुक्ला ने जलसा है, आनन्द है, एक नशा है, अनगिनत अभिलाषा लिए हुए ये आंखें हमारी है पर जमकर तालियां बटोरीं। हास्य कवि अनिल अग्रवंशी ने अपनी कविताओं से लोगों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष प्रदुमन जैन, राजीव जैन, दीपक जैन, महेश जैन, सचिन जैन मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
छपरौली। कस्बे में चल रहे पंचकल्याक प्रतिष्ठा महोत्सव के समापन पर बुधवार को कवि सम्मेलन हुआ, जिसमें मेरठ, राजस्थान, दिल्ली से आए कवियों ने अपनी कविताओं पर जमकर तालियां बटोरीं।
सम्मेलन का शुभारंभ कवयित्री सपना सोनी ने भगवान महावीर वंदना से किया। इसके बाद उन्होंने शृंगार रस की कविता कभी मैं पीर आंखों की, कभी अंगार लिखती हूूं, कभी शमशीर सहने की कभी शृंगार लिखती हूं से खूब तालियां बटोरीं। श्रृंगार रस के कवि इन्द्रजीत ने लोग कहते हैं कि मैं खूब पीता हूं, मैं तो जज्बे को अपने जीता हूं कविता सुनाई। नवोदित कवि पीके आजाद ने मैं ऊर्जा का पर्याय हूं, मैं भारत की गौरव गाथा हूं सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। युवा कवि सौरभ जैन सुमन ने शहीद के नाम पर कविता सुनाकर दर्शकों को भावुक कर दिया। दिनेश रघुवंशी ने तुम्हारे बिना मेरा संसार नहीं है, अंगुली पकड़कर तूने चलना सिखाया, मैं आज कुछ कर सकूं, तूने मुझे काबिल बनाया सुनाकर मां की ममता को उजागर किया। कवि डॉ़ प्रवीण शुक्ला ने जलसा है, आनन्द है, एक नशा है, अनगिनत अभिलाषा लिए हुए ये आंखें हमारी है पर जमकर तालियां बटोरीं। हास्य कवि अनिल अग्रवंशी ने अपनी कविताओं से लोगों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष प्रदुमन जैन, राजीव जैन, दीपक जैन, महेश जैन, सचिन जैन मौजूद रहे।
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