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फीस अदायगी का दबाव बना रहे स्कूल संचालक
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कोरोना काल में बंद रहे स्कूलों ने छात्रों को प्रमोट करने से पहले मांगी पूरी माफी
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। स्कूल संचालकों ने कक्षा एक से आठ तक के बच्चों से कोरोना काल की पूरी फीस वसूली के लिए मनमानी शुरू कर दी है। इसको लेकर अभिभावकों में आक्रोश है। उन्होंने तहसील प्रशासन से मनमानी करने वाले स्कूलों संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
कोरोना काल में शासन ने स्कूल बंद कर दिए थे। जिस कारण बच्चे स्कूल नहीं गए। शासन के आदेश पर कक्षा एक से आठ तक के स्कूल एक मार्च से खुले हैं। इस पर स्कूल संचालकों की मनमानी शुरू हो गई है। शासन का आदेश है कि कक्षा एक से आठ तक के बच्चों की परीक्षा नहीं होगी, बल्कि उन्हें अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया जाए। शासन के आदेश पर अमल कराने को लेकर स्कूल संचालकों ने अभिभावकों पर फीस वसूली का दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
अभिभावक संजय, दीपक, विनीत, मोहित, सचिन का कहना है कि स्कूल संचालक बच्चों को अगली कक्षा में प्रमोट करने के लिए पूरी फीस जमा किए जाने की शर्त लगा रहे हैं। इसकी शिकायत करने पर वे नाराज हो जाते हैं। वहीं, तहसील प्रशासन भी उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा है। जिसके चलते उनके बच्चों के भविष्य पर तलवार लटकी है। अभिभावकों का कहना है कि उनको कोरोना संकट में बंद रहे स्कूलों की एकमुश्त रकम जमा करने में पसीने छूट रहे हैं। उनका मानसिक और आर्थिक शोषण हो रहा है।
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बड़ौत। स्कूल संचालकों ने कक्षा एक से आठ तक के बच्चों से कोरोना काल की पूरी फीस वसूली के लिए मनमानी शुरू कर दी है। इसको लेकर अभिभावकों में आक्रोश है। उन्होंने तहसील प्रशासन से मनमानी करने वाले स्कूलों संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
कोरोना काल में शासन ने स्कूल बंद कर दिए थे। जिस कारण बच्चे स्कूल नहीं गए। शासन के आदेश पर कक्षा एक से आठ तक के स्कूल एक मार्च से खुले हैं। इस पर स्कूल संचालकों की मनमानी शुरू हो गई है। शासन का आदेश है कि कक्षा एक से आठ तक के बच्चों की परीक्षा नहीं होगी, बल्कि उन्हें अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया जाए। शासन के आदेश पर अमल कराने को लेकर स्कूल संचालकों ने अभिभावकों पर फीस वसूली का दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
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अभिभावक संजय, दीपक, विनीत, मोहित, सचिन का कहना है कि स्कूल संचालक बच्चों को अगली कक्षा में प्रमोट करने के लिए पूरी फीस जमा किए जाने की शर्त लगा रहे हैं। इसकी शिकायत करने पर वे नाराज हो जाते हैं। वहीं, तहसील प्रशासन भी उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा है। जिसके चलते उनके बच्चों के भविष्य पर तलवार लटकी है। अभिभावकों का कहना है कि उनको कोरोना संकट में बंद रहे स्कूलों की एकमुश्त रकम जमा करने में पसीने छूट रहे हैं। उनका मानसिक और आर्थिक शोषण हो रहा है।
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