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शरद पूर्णिमा पर मंदिरों में हुए धार्मिक अनुष्ठान
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संवाद न्यूज एजेंसी
खेकड़ा। शरद पूर्णिमा के अवसर पर क्षेत्र के मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। भंडारे में हजारों श्रद्धालुुुओं ने प्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ उठाया।
शरद पूर्णिमा पर नगर के मोहल्ला औरंगाबाद, चक्रसेनपुर स्थित प्राचीन शिव मंदिर, शिव मंदिर रामपुर, बालाजी, शिव मंदिर अहिरान, बाबा काले सिंह आदि मंदिरों में भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। श्रद्धालुुओं ने पूजा-अर्चना की। इसके बाद खीर का प्रसाद वितरित किया गया। भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ उठाया।
पंडित उमेश चंद कोत्स ने बताया कि शरद पूर्णिमा के अवसर पर मां लक्ष्मी संग चंद्रमा की आराधना की जाती है। इस अवसर पर चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है। मां लक्ष्मी भक्तों के लिए धन का भंडार खोल देती हैं। इस दिन की गई छोटी सी पूजा और खीर का प्रसाद के साथ दीर्घायु होने का वरदान देती हैं।
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मान्यता है कि धवल चांदनी में मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण के लिए आती हैं। शास्त्रों के अनुसार शरद पूर्णिमा की मध्य रात्रि के बाद मां लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर बैठकर धरती के मनोहर दृश्य का आनंद लेती हैं। साथ ही यह भी देखती हैं कि कौन भक्त रात में जागकर उनकी भक्ति कर रहा है। मान्यता है कि इस रात में मां लक्ष्मी की उपासना करने से उनकी कृपा होती है।
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खेकड़ा। शरद पूर्णिमा के अवसर पर क्षेत्र के मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। भंडारे में हजारों श्रद्धालुुुओं ने प्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ उठाया।
शरद पूर्णिमा पर नगर के मोहल्ला औरंगाबाद, चक्रसेनपुर स्थित प्राचीन शिव मंदिर, शिव मंदिर रामपुर, बालाजी, शिव मंदिर अहिरान, बाबा काले सिंह आदि मंदिरों में भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। श्रद्धालुुओं ने पूजा-अर्चना की। इसके बाद खीर का प्रसाद वितरित किया गया। भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ उठाया।
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पंडित उमेश चंद कोत्स ने बताया कि शरद पूर्णिमा के अवसर पर मां लक्ष्मी संग चंद्रमा की आराधना की जाती है। इस अवसर पर चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है। मां लक्ष्मी भक्तों के लिए धन का भंडार खोल देती हैं। इस दिन की गई छोटी सी पूजा और खीर का प्रसाद के साथ दीर्घायु होने का वरदान देती हैं।
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मान्यता है कि धवल चांदनी में मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण के लिए आती हैं। शास्त्रों के अनुसार शरद पूर्णिमा की मध्य रात्रि के बाद मां लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर बैठकर धरती के मनोहर दृश्य का आनंद लेती हैं। साथ ही यह भी देखती हैं कि कौन भक्त रात में जागकर उनकी भक्ति कर रहा है। मान्यता है कि इस रात में मां लक्ष्मी की उपासना करने से उनकी कृपा होती है।