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धर्म ही परम सुख-शांति का उपाय है : विशुद्ध सागर

Thu, 21 Sep 2023 09:34 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 21 Sep 2023 09:34 AM IST
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Religion is the solution to ultimate happiness and peace: Vishuddha Sagar
फोटो संख्या 4
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बड़ौत। जैनाचार्य विशुद्धसागर महाराज ने कहा कि धर्म ही परम सुख-शांति का उपाय है, इसलिए किसी के साथ छल मत करो।
जैन मुनि ने बुधवार को ऋषभ सभागार में श्रावक संयम संस्कार शिविर के मध्य प्रवचन किए। कहा कि धर्म ही मंगल है, धर्म ही उत्तम है, धर्म ही शरण है और धर्म ही परम सुख-शांति का उपाय है। संसार-सागर से पार होने के लिए धर्म जहाज के समान है और तारने वाले निर्ग्रंथ गुरु हैं। गुरु ही शरण हैं। मान के अभाव होने पर मार्दव धर्म प्रकट होता है। कुल, रूप, जाति, बुद्धि, तप, शास्त्र ज्ञान आदि में किंचित भी अभिमान नहीं करना, मार्दव धर्म है। मृदुता, नम्रता का भाव ही मार्दव धर्म है। मान विष के समान है, जो भवों-भवों में संताप देता है। छल, कपट और मान नरक के रास्ते पर ले जाते हैं। अहंकारी, मानी निश्चित ही मरण कर नरकादि दुर्गतियों को प्राप्त करता है। नम्रता, सरलता पूज्य पुरुषों की कुल-विद्या है। अहंकार, मान दुष्टता का चिह्न है।
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