लोगों का दिल पसीजा, अफसरों का नहीं
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निवाड़ा गांव की इमराना उर्फ इरफाना का कहना है कि उसकी तीन वर्षीय बेटी गुलनाद पिछले कई दिन से बुखार से पीड़ित थी। उसका बागपत के जिला अस्पताल में उपचार चल रहा था। बृहस्पतिवार को हालत खराब हो जाने के बाद चिकित्सकों ने उसे मेरठ के लिए रेफर कर दिया था। मेरठ अस्पताल में उसकी बेटी की मौत हो गई थी। सरकारी एंबुलेंस के चालकों ने उसकी बेटी का शव को निवाड़ा गांव में लाने से इंकार कर दिया था। उसके पास इतने रुपये नहीं थे कि वह प्राइवेट एंबुलेंस करके आ सके।
उसने वहां के डाक्टरों समेत पूरे स्टाफ को इस बारे में बचाया, लेकिन किसी ने कोई मद्द नहीं की। बाद में कई लोगों ने उसकी मद्द की। इसमें एक पुलिस वाला भी शामिल है। उसके बाद दो हजार रुपये में प्राइवेट एंबुलेंस से अपनी बेटी के शव को लेकर गांव में पहुंची। गांव के एक व्यक्ति से एक हजार रुपये लेकर अपनी बेटी के शव का सुपुर्द-ए-खाक किया। घटना को लेकर उसका रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है।