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बड़ौत में मुनि सुब्रतनाथ मंदिर का भव्य वेदी शिलान्यास, श्रीजी की प्रतिमा स्थापित की
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत
Updated Wed, 12 Oct 2016 03:56 PM IST
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भ्ाव्य वेदी शिलान्यास में मौजूद श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला
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बड़ौत। दिल्ली रोड स्थित आचार्य धर्मसागर साधुवृत्ति आश्रम में विहर्ष सागर महाराज के सानिध्य में भगवान मुनि सुब्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर का भव्य वेदी शिलान्यास किया गया। श्रीजी की प्रतिमा स्थापित की गई।
मंगलवार की सुबह दिगंबर जैन अतिथि भवन से संसघ मुनि संघ बैंडबाजे के साथ नगर के विभिन्न मार्गों से होती हुई साधुवृत्ति आश्रम पहुंची। वहां मुनि विहर्ष सागर महाराज ने 10 दिनों की कठिन तपस्या, दिव्य दर्शन तथा मंगल आशीर्वाद दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ झंडारोहण से सुनील कुमार जैन, चित्र अनावरण गौरव जैन, दीप प्रज्ज्वलन मुकेश जैन, मंच उद्घाटन जैन वीर विहर्ष ग्रुप ने किया।
भव्य वेदी शिलान्यास की प्रथम स्वर्ण शिला स्नेहलता, अतुल जैन, अनुज जैन द्वारा रखी गई। इस अवसर पर विहर्ष सागर महाराज ने कहा कि दशहरा का अर्थ है, जो दस से हार गया वह पांच इंद्रियां, चार कषाय और एक मन से हार जाता है। जो इन पर विजय पा जाता है उसके लिए विजयदशमी मनाई जाती है।
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विजयदशमी के दिन कुछ जलाना है तो अपने शरीर के मन के अंदर रह रहे अहंकार, क्रोध, आडंबर, बुरे विचारों, बड़े बुजुर्गों के तिरस्कार की वृत्ति को जलाओं और आत्मा का कल्याण करों। कार्यक्रम में गुरु पूजा सुशील जैन, शास्त्र भेंट नानक जैन द्वारा किया गया। शिलान्यास की समस्त विधिविधान पूजन श्रेयांस जैन तथा अजित कुमार शास्त्री के निर्देशन में हुई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आर के जैन ने किया। पंकज जैन, अजय जैन, राकेश जैन, बालकिशन जैन, अखिलेश जैन, सुरेंद्र जैन, राजेश जैन, संदीप जैन, अंकुर जैन, राजीव अर्पित जैन रहे।
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मंगलवार की सुबह दिगंबर जैन अतिथि भवन से संसघ मुनि संघ बैंडबाजे के साथ नगर के विभिन्न मार्गों से होती हुई साधुवृत्ति आश्रम पहुंची। वहां मुनि विहर्ष सागर महाराज ने 10 दिनों की कठिन तपस्या, दिव्य दर्शन तथा मंगल आशीर्वाद दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ झंडारोहण से सुनील कुमार जैन, चित्र अनावरण गौरव जैन, दीप प्रज्ज्वलन मुकेश जैन, मंच उद्घाटन जैन वीर विहर्ष ग्रुप ने किया।
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भव्य वेदी शिलान्यास की प्रथम स्वर्ण शिला स्नेहलता, अतुल जैन, अनुज जैन द्वारा रखी गई। इस अवसर पर विहर्ष सागर महाराज ने कहा कि दशहरा का अर्थ है, जो दस से हार गया वह पांच इंद्रियां, चार कषाय और एक मन से हार जाता है। जो इन पर विजय पा जाता है उसके लिए विजयदशमी मनाई जाती है।
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विजयदशमी के दिन कुछ जलाना है तो अपने शरीर के मन के अंदर रह रहे अहंकार, क्रोध, आडंबर, बुरे विचारों, बड़े बुजुर्गों के तिरस्कार की वृत्ति को जलाओं और आत्मा का कल्याण करों। कार्यक्रम में गुरु पूजा सुशील जैन, शास्त्र भेंट नानक जैन द्वारा किया गया। शिलान्यास की समस्त विधिविधान पूजन श्रेयांस जैन तथा अजित कुमार शास्त्री के निर्देशन में हुई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आर के जैन ने किया। पंकज जैन, अजय जैन, राकेश जैन, बालकिशन जैन, अखिलेश जैन, सुरेंद्र जैन, राजेश जैन, संदीप जैन, अंकुर जैन, राजीव अर्पित जैन रहे।