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किताबें पढ़ने में कम रुचि, इंटरनेट पर गुजार रहे अधिक समय

Thu, 22 Apr 2021 11:25 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 22 Apr 2021 11:25 PM IST
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Less interest in reading books, more time spent on internet
23 अप्रैल को मनाया जाता है विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस के रूप में
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संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। 23 अप्रैल को विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सभी को पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता हैै। बदलते युग में तकनीक की घुसपैठ के कारण किताबें पढ़ने में लोगों की रुचि कम हुई है। अधिकतर युवा अब फेसबुक, व्हाट्सएप तथा इंटरनेट पर अपना समय गुजारना पसंद करते हैं। किताबें अब केवल ड्राइंग रूम में सजावट का सामान बनकर रह गई है। किताबों के प्रति तेज गति से मोह भंग होना चिंताजनक है।
शिक्षिका डॉ. रेखा सिंह का कहना है कि पुस्तकें एक एहसास है। जब हम पुस्तकें पढ़ते हैं तो भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं। पुस्तकें हमेशा हमारे साथ एक दोस्त के रूप में साथ रहती है। कोरोना काल चल रहा है, यह ऐसा समय है जब हम किताबों से जुड़ सकते हैं। जो विद्यार्थी पहले कहते थे कि हमें समय नहीं मिल पा रहा है, वो अब इस समय का सदुपयोग करें और पुस्तकों से जुड़े। अगर किसी का ऑनलाइन पढ़ने में रुचि है तो आज के समय में हमारे पास ऑनलाइन भी बहुत से विकल्प है।
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शिक्षिका राजेश वर्मा का कहना है कि कोरोना काल चल रहा है। यह समय हमारे लिए अत्यंत लाभकारी सिद्घ हो सकता है। ऐसे काल में हमें भावनात्मक रूप से पुस्तकों से जुड़ने की जरूरत है। पुस्तकें हमारी मानसिक स्थिति को सही रखने में भी सहायक है। समय- समय पर पुस्तकें हमारा मार्गदर्शन करती है। कोरोना काल के समय का सदुपयोग करके किताबों से जुड़ सकते हैं।
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सचिन राठी व रवि उर्फ गुड्डू बालियान का कहना है कि किताबें विद्यार्थी के जीवन का एक अहम हिस्सा है। किसी भी विद्यार्थी की सफलता में किताबें अहम रोल अदा करती है। युवा पीढ़ी सोशल मीडिया में उलझी हुई है और किताबों से दूर होती जा रही है। हालांकि सोशल मीडिया हमारे जीवन का महत्वपूर्ण अंग बन चुका है लेकिन फिर भी हमें कुछ समय किताबें पढ़ने में लगाना चाहिए। पहले जितना पुस्तकों को समय नहीं दे पाते थे, अब कोरोना के कारण पूरा समय दे रहे हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता सुशील ढाका का कहना है कि पुस्तकें हमारी अच्छी व सच्ची मित्र हमेशा से रही है। आधुनिक युग के चलते कहीं न कहीं हम पुस्तकों से दूर हुए है। पुस्तकों से हमें अधिक से अधिक ज्ञान प्राप्त होता है। अगर हम महीने में एक किताब भी पढ़ लें तो हमारे आत्मविश्वास व सकारात्मकता में बढ़ोत्तरी हो। समय का सदुपयोग कर पुस्तकें पढ़ना एक अच्छी पहल हम इस कोरोना काल में कर सकते हैं। दोगुना समय अब हम इस समय पुस्तकों को दे रहे हैं।
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