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Baghpat News: चुनाव बाद भेजी जाएगी पाकिस्तान पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के भाई की शत्रु संपत्ति की जांच रिपोर्ट
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बड़ौत । पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के भाई डाॅ. जावेद मुशर्रफ की शत्रु संपत्ति में दर्ज जमीन पर इस समय कौन काबिज है, इसकी जांच तहसील स्तर पर फिलहाल शुरू कर दी गई है। हालांकि फिलहाल तहसील प्रशासनिक अधिकारी चुनाव में व्यस्त हैं। अधिकारियों का कहना है कि चुनाव के बाद मामले की जांच कर लखनऊ रिपोर्ट भेजी जाएगी।
कुछ महीने पहले लखनऊ मुख्यालय पर किसी ने शिकायत की थी कि कोताना गांव में पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के भाई डॉ. जावेद मुशर्रफ की शत्रु संपत्ति पर अवैध कब्जा है। बार-बार शिकायत के बाद भी स्थानीय अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। मंगलवार को लखनऊ स्थित कार्यालय में तैनात पर्यवेक्षक मनोज कुमार सिंह टीम के साथ कोताना गांव पहुंचे। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का पैतृक गांव कोताना है। 1947 में बंटवारे के समय पूर्व राष्ट्रपति और उनका परिवार पैतृक संपत्ति छोड़कर पाकिस्तान चले गए थे। उनके कुछ रिश्तेदार दिल्ली में रहते हैं। हालांकि कुछ दिनों बाद ही परवेज मुशर्रफ ने अपने हिस्से की जमीन बेच दी थी, लेकिन उनके भाई डॉ. जावेद मुशर्रफ ने अपनी जमीन नहीं बेची थी। बाद में यह जमीन शत्रु संपत्ति में दर्ज हो गई थी।
अब तो बस दीवार के निशां बाकी
परवेज मुशर्रफ के पूर्वज जिस मकान में रहा करते थे, वह कभी आलीशान महल था। नक्काशी की दीवारें, स्तंभ, पत्थरों के अवशेष यहां के निवासी ले गए थे। हालांकि महल की दीवार अभी बची हैं। महल में मौजूद रही एक सीढ़ी भी दिखाई देती है। महल को तोड़कर एक समतल कर दिया गया और एक प्लाट का रूप देकर उसे बेचा जा चुका है।
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मां जरीन को कोताना आने की नहीं मिली थी अनुमति
परवेज मुशर्ऱफ के पिता और मां जरीन दोनों अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़े थे। दादा ब्रिटिश सरकार में दिल्ली में मुलाजिम थे। ग्रामीणों ने बताया कि 2005 में परवेज मुशर्रफ की मां जरीन दिल्ली आई, तब वह अपने पूर्वजों के गांव कोताना आना चाहती थी, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण उनकी यह हसरत पूरी नहीं हो पाई थी।
फिलहाल पूरा प्रशासन चुनाव में जुटा है। चुनाव के बाद पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के भाई डॉ. जावेद मुशर्रफ की शत्रु संपत्ति पर कौन काबिज है, इसकी जांच की जाएगी। पूरी जांच कर इसकी रिपोर्ट लखनऊ भेजी जाएगी। - राजेश कुमार तहसीलदार बड़ौत।
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कुछ महीने पहले लखनऊ मुख्यालय पर किसी ने शिकायत की थी कि कोताना गांव में पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के भाई डॉ. जावेद मुशर्रफ की शत्रु संपत्ति पर अवैध कब्जा है। बार-बार शिकायत के बाद भी स्थानीय अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। मंगलवार को लखनऊ स्थित कार्यालय में तैनात पर्यवेक्षक मनोज कुमार सिंह टीम के साथ कोताना गांव पहुंचे। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का पैतृक गांव कोताना है। 1947 में बंटवारे के समय पूर्व राष्ट्रपति और उनका परिवार पैतृक संपत्ति छोड़कर पाकिस्तान चले गए थे। उनके कुछ रिश्तेदार दिल्ली में रहते हैं। हालांकि कुछ दिनों बाद ही परवेज मुशर्रफ ने अपने हिस्से की जमीन बेच दी थी, लेकिन उनके भाई डॉ. जावेद मुशर्रफ ने अपनी जमीन नहीं बेची थी। बाद में यह जमीन शत्रु संपत्ति में दर्ज हो गई थी।
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अब तो बस दीवार के निशां बाकी
परवेज मुशर्रफ के पूर्वज जिस मकान में रहा करते थे, वह कभी आलीशान महल था। नक्काशी की दीवारें, स्तंभ, पत्थरों के अवशेष यहां के निवासी ले गए थे। हालांकि महल की दीवार अभी बची हैं। महल में मौजूद रही एक सीढ़ी भी दिखाई देती है। महल को तोड़कर एक समतल कर दिया गया और एक प्लाट का रूप देकर उसे बेचा जा चुका है।
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मां जरीन को कोताना आने की नहीं मिली थी अनुमति
परवेज मुशर्ऱफ के पिता और मां जरीन दोनों अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़े थे। दादा ब्रिटिश सरकार में दिल्ली में मुलाजिम थे। ग्रामीणों ने बताया कि 2005 में परवेज मुशर्रफ की मां जरीन दिल्ली आई, तब वह अपने पूर्वजों के गांव कोताना आना चाहती थी, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण उनकी यह हसरत पूरी नहीं हो पाई थी।
फिलहाल पूरा प्रशासन चुनाव में जुटा है। चुनाव के बाद पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के भाई डॉ. जावेद मुशर्रफ की शत्रु संपत्ति पर कौन काबिज है, इसकी जांच की जाएगी। पूरी जांच कर इसकी रिपोर्ट लखनऊ भेजी जाएगी। - राजेश कुमार तहसीलदार बड़ौत।