विश्व एड्स दिवस: संक्रमित कोख से गूंज रही सेहतमंद किलकारी, चार साल में 50 बच्चे टेस्ट में पाए गए निगेटिव
एड्स को लेकर जागरुकता के चलते सरकारी और निजी अस्पताल में आने वाली प्रत्येक गर्भवती महिला की एचआईवी जांच की जा रही है। इसका नतीजा यह हुआ है कि पिछले चार साल में संक्रमित माता पिता ने स्वस्थ संतान को जन्म दिया है।
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असुरक्षित यौन संबंधों के चलते एचआईवी संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन यह जानकार खुशी होगी कि जनपद बागपत में जागरूकता के चलते नियमित उपचार कराने से बीते चार साल में हुई डिलीवरी के बाद 50 बच्चे टेस्ट में निगेटिव पाए गए हैं। इससे बचपन एड्स के खतरे से बाहर आ रहा है। वहीं, नियमित उपचार के बाद लक्षण कम होने पर एड्स ग्रसित युवक-युवती भी शादी रचा रहे हैं।
सरकारी और निजी अस्पताल में आने वाली प्रत्येक गर्भवती महिला की एचआईवी जांच की जा रही है। गर्भवती महिला के बच्चे को एचआईवी संक्रमण की आशंका 75-80 फीसदी तक होती है। गर्भवती महिलाओं को विशेष ध्यान रखना चाहिए और स्पेशल ट्रीटमेंट कराना चाहिए।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जनपद में इस समय लगभग 150 एचआईवी पीड़ित हैं। चार सालों में करीब 70 महिलाएं एचआईवी संक्रमित मिलीं। जिनका नियमित उपचार जारी है। इस अवधि में लगभग 70 महिलाओं की डिलीवरी हुई। उनसे पैदा होने वाले लगभग 50 बच्चे टेस्ट में निगेटिव पाए गए हैं। एचआईवी काउंसलर मीनाक्षी ने बताया कि बच्चा पैदा होने के डेढ़ माह, छह माह, एक साल और फिर डेढ़ साल की अवधि में एचआईवी टेस्ट कराया जाता है। यदि सभी टेस्ट निगेटिव आएं तो बच्चा स्वस्थ्य होता है।
दो जोड़ों की हो चुकी है शादी
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एचआईवी संक्रमितों को जागरूक करने वाली काउंसलर व सामाजिक संगठन अब तक संक्रमित दो जोड़ों की शादी करा चुके हैं। दोनों की सहमति मिलने पर पहले उनकी जांच कराई गई। उनका नियमित इलाज चल रहा था। जांच के दौरान दोनों के एचआईवी लक्षण कम मिले। अच्छी बात यह है कि उनसे बच्चे पैदा हुए बच्चे निगेटिव पाए गए।
ऐसे फैलता है एचआईवी
एचआईवी मुख्य रूप से तरल पदार्थों (बॉडी फ्लुइड्स) के संपर्क रक्त (मासिक धर्म/पीरियड ब्लड सहित) वीर्य और अन्य पुरुष-महिला यौन पदार्थ से एचआईवी फैलता है।
दो प्रकार का होता है एचआईवी
एचआईवी- 1 : यह प्रकार दुनिया भर में पाया जाता है और सबसे आम है।
एचआईवी-2 : ज्यादातर पश्चिम अफ्रीका, एशिया और यूरोप में पाया जाता है।
एक-दो माह में नजर आते हैं लक्षण
सीएचसी अधीक्षक डॉ. विजय कुमार ने बताया कि एचआईवी लक्षण आमतौर पर वायरस के शरीर में पहुंचने के एक से दो महीने में नजर आने लगते हैं। हालांकि ज्यादातर मामलों में इन्हें पहचानना मुश्किल होता है। ये लक्षण आम वायरल या खांसी-सर्दी से काफी मिलते-जुलते हैं।
ये हैं प्रमुख लक्षण
बुखार आना, अचानक ठंड लगना, शरीर में दर्द या टीस उठना, स्किन रैश, सिरदर्द बने रहना, गला खराब होना, उल्टी जैसा होना या बेचैनी बने रहना, पेट खराब रहना, बहुत ज्यादा थकान महसूस होना, रात में सोते समय ज्यादा पसीना आना, वजन कम होना, निमोनिया होना, बार-बार वजाइना या पीनस में इंफेक्शन होना।
ये बोली कांउसलर
सीएचसी पर तैनात एचआईवी काउंसलर मीनाक्षी ने बताया कि वर्ष 2007 में बागपत में पहला एचआईवी संक्रमित मिला था। तभी से स्वास्थ्य विभाग लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चला रहा है।
वर्ष पॉजिटिव केस
2019-20 85
2020-21 22
2021-22 25
2022-23 14 (अब तक)