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गैंगस्टर एक्ट में एक को चार साल 11 माह का कारावास
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संवाद न्यूज एजेंसी
गैंगस्टर में कारावास की सजा
बागपत। गैंगस्टर एक्ट में एक अपराधी को कोर्ट ने चार साल 11 माह के कारावास की सजा सुनाई है। उस पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
बागपत कोतवाली प्रभारी रहे अरुण कुमार द्विवेदी ने वर्ष 2016 में मुकदमा दर्ज कराया था कि इदरीश निवासी ग्राम मेवला का एक गिरोह है। उसके गिरोह के सदस्य शिब्बू उर्फ कुलदीप निवासी ग्राम लुहारा, आकाश निवासी ग्राम मेवला व नवीन निवासी ग्राम फतेहपुर हैं। गिरोह के सदस्य रंगदारी मांगना, लूटपाट व वाहन चोरी जैसे अपराध करते हैं। इसलिए ही इनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। इसकी जांच करके इनके खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। विशेष लोक अभियोजक अधिवक्ता राहुल नेहरा ने बताया कि अदालत में आकाश की फाइल अलग हो गई थी। जिसकी सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय संख्या एक के विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर अधिनियम) कृष्ण कुमार सिंह कर रहे थे। कोर्ट ने गवाही व साक्ष्य के आधार पर आकाश को दोषी मानते हुए चार साल 11 माह के कारावास की सजा सुनाई। उस पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड नहीं देने पर एक सप्ताह के साधारण कारावास की सजा बढ़ाई जाएगी।
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गैंगस्टर में कारावास की सजा
बागपत। गैंगस्टर एक्ट में एक अपराधी को कोर्ट ने चार साल 11 माह के कारावास की सजा सुनाई है। उस पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
बागपत कोतवाली प्रभारी रहे अरुण कुमार द्विवेदी ने वर्ष 2016 में मुकदमा दर्ज कराया था कि इदरीश निवासी ग्राम मेवला का एक गिरोह है। उसके गिरोह के सदस्य शिब्बू उर्फ कुलदीप निवासी ग्राम लुहारा, आकाश निवासी ग्राम मेवला व नवीन निवासी ग्राम फतेहपुर हैं। गिरोह के सदस्य रंगदारी मांगना, लूटपाट व वाहन चोरी जैसे अपराध करते हैं। इसलिए ही इनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। इसकी जांच करके इनके खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। विशेष लोक अभियोजक अधिवक्ता राहुल नेहरा ने बताया कि अदालत में आकाश की फाइल अलग हो गई थी। जिसकी सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय संख्या एक के विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर अधिनियम) कृष्ण कुमार सिंह कर रहे थे। कोर्ट ने गवाही व साक्ष्य के आधार पर आकाश को दोषी मानते हुए चार साल 11 माह के कारावास की सजा सुनाई। उस पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड नहीं देने पर एक सप्ताह के साधारण कारावास की सजा बढ़ाई जाएगी।