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विदेशी वैज्ञानिकों ने बताए उन्नत खेती के गुर
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अमीनगर सराय (बागपत)। एमिटी यूनिवर्सिटी की ओर से चल रहे इंटरनेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम ऑन क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर प्रैक्टिस के तहत बागपत के डौला गांव पहुंचे विदेशी कृषि वैज्ञानिकों का ग्रामीणों ने स्वागत किया। वैज्ञानिकों ने गांव के किसानों की फसलें देखी तथा उन्नत खेती के गुर भी बताए। उन्होंने फसलों को मौसम की मार से बचाने के लिए पॉलीथन के बजाए पुआल का प्रयोग करने की सलाह दी।
आस्ट्रेलिया, बांग्लादेश और काबुल से आए विदेशी वैज्ञानिकों का डेलिगेशन बुधवार को एमिटी यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स के साथ बागपत के डौला गांव पहुंचा। टीम ने किसान राजू से उगाई गई खीरे, राजमा, धनिया व अन्य सब्जियों की खेती के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने किसान को और अधिक लाभ लेने के गुर भी सिखाए। साथ ही फसलों को मौसम की मार से बचाने के लिए पॉलिथीन बजाए पुआल का इस्तेमाल करने की सलाह दी। गन्ने की फसल के साथ-साथ अन्य फसलें उगाने की सलाह दी। बताया कि किसान सहफसली खेती कर अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। पेस्टीसाइड के इस्तेमाल को बंद करने व जैविक खेती करने की सलाह दी। कृषि की नई तकनीकों के बारे में भी जानकारी दी। टीम में ऑस्ट्रेलिया से आए डॉ. कदमबोट सिद्दीकी, डॉ. अमीन मुगीरा व काबुल से आए डॉ. सैयद समीउल्लाह हकीमी, डॉ. सेली मोहम्मद मौजूद रहे। एमिटी की ओर से डॉ नूतन कौशिक के अलावा बागपत कृषि विज्ञान केंद्र से डॉ रविंद्र राठी, डॉ उत्तम राठी, डॉ भूपेंद्र कुमार मौजूद रहे।
विदेशी मेहमानों ने लिया गन्ने और छाछ का स्वाद
अमीनगर सराय। बुधवार को डौला गांव पहुंचे विदेशी महमानों के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने उन्हें गन्ने का रस और छाछ पीने के लिए दी। रस व छाछ पीकर विदेशी मेहमानों ने इनके स्वाद की काफी तारीफ की।
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बदलते मौसम और फसलों पर चर्चा की
खेकड़ा। बुधवार को आस्ट्रेलिया, अफगानिस्तान, बंगलादेश के कृषि वैज्ञानिक का दल खेकड़ा कृषि विज्ञान केंद्र पर पहुंचे। उन्होंने मौसम में बदलाव होने पर अच्छी पैदावार के बारे में जानकारी प्राप्त की। खेकड़ा कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. उत्तम राठी, डॉ. भूपेंद्र सिंह, डॉ. सरिता जोशी आदि ने माला पहना और गुलाब भेंट कर स्वागत किया। सभी वैज्ञानिक क्षेत्र के बड़ागांव निवासी पूर्व कर्नल नरेंद्र त्यागी के फार्म हाउस पर पहुंचे। यहां उन्होंने बिना पेस्टीसाइड के तैयार किए जा रहे अमरूद, अनार, आम के बागान को देखा और जानकारी हासिल की। कृषि वैज्ञानिक डॉ. उत्तम राठी, डा भूपेंद्र सिंह ने बताया कि बदलते मौसम के अनुसार बीज को तैयार किया जाता है। इस दौरान आस्ट्रेलिया से डॉ. एमिन मुजियर, काबुल यूनिवर्सिटी से डॉ. समीउल्लाह हाकिमी, बांग्लादेश से डॉ. शेख अहमद, डॉ. राशिद, डॉ. राकिब हुसैन, एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा से डॉ. मयंक राय, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. बीएस राय, डॉ. जमशेर, डॉ. विजय कुमार, डॉ. अंशुमन, डॉ. नूतन कौशिक, डॉ. जोशना, अमीषा शर्मा, वंदना खुराना आदि शामिल रहे।
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आस्ट्रेलिया, बांग्लादेश और काबुल से आए विदेशी वैज्ञानिकों का डेलिगेशन बुधवार को एमिटी यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स के साथ बागपत के डौला गांव पहुंचा। टीम ने किसान राजू से उगाई गई खीरे, राजमा, धनिया व अन्य सब्जियों की खेती के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने किसान को और अधिक लाभ लेने के गुर भी सिखाए। साथ ही फसलों को मौसम की मार से बचाने के लिए पॉलिथीन बजाए पुआल का इस्तेमाल करने की सलाह दी। गन्ने की फसल के साथ-साथ अन्य फसलें उगाने की सलाह दी। बताया कि किसान सहफसली खेती कर अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। पेस्टीसाइड के इस्तेमाल को बंद करने व जैविक खेती करने की सलाह दी। कृषि की नई तकनीकों के बारे में भी जानकारी दी। टीम में ऑस्ट्रेलिया से आए डॉ. कदमबोट सिद्दीकी, डॉ. अमीन मुगीरा व काबुल से आए डॉ. सैयद समीउल्लाह हकीमी, डॉ. सेली मोहम्मद मौजूद रहे। एमिटी की ओर से डॉ नूतन कौशिक के अलावा बागपत कृषि विज्ञान केंद्र से डॉ रविंद्र राठी, डॉ उत्तम राठी, डॉ भूपेंद्र कुमार मौजूद रहे।
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विदेशी मेहमानों ने लिया गन्ने और छाछ का स्वाद
अमीनगर सराय। बुधवार को डौला गांव पहुंचे विदेशी महमानों के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने उन्हें गन्ने का रस और छाछ पीने के लिए दी। रस व छाछ पीकर विदेशी मेहमानों ने इनके स्वाद की काफी तारीफ की।
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बदलते मौसम और फसलों पर चर्चा की
खेकड़ा। बुधवार को आस्ट्रेलिया, अफगानिस्तान, बंगलादेश के कृषि वैज्ञानिक का दल खेकड़ा कृषि विज्ञान केंद्र पर पहुंचे। उन्होंने मौसम में बदलाव होने पर अच्छी पैदावार के बारे में जानकारी प्राप्त की। खेकड़ा कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. उत्तम राठी, डॉ. भूपेंद्र सिंह, डॉ. सरिता जोशी आदि ने माला पहना और गुलाब भेंट कर स्वागत किया। सभी वैज्ञानिक क्षेत्र के बड़ागांव निवासी पूर्व कर्नल नरेंद्र त्यागी के फार्म हाउस पर पहुंचे। यहां उन्होंने बिना पेस्टीसाइड के तैयार किए जा रहे अमरूद, अनार, आम के बागान को देखा और जानकारी हासिल की। कृषि वैज्ञानिक डॉ. उत्तम राठी, डा भूपेंद्र सिंह ने बताया कि बदलते मौसम के अनुसार बीज को तैयार किया जाता है। इस दौरान आस्ट्रेलिया से डॉ. एमिन मुजियर, काबुल यूनिवर्सिटी से डॉ. समीउल्लाह हाकिमी, बांग्लादेश से डॉ. शेख अहमद, डॉ. राशिद, डॉ. राकिब हुसैन, एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा से डॉ. मयंक राय, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. बीएस राय, डॉ. जमशेर, डॉ. विजय कुमार, डॉ. अंशुमन, डॉ. नूतन कौशिक, डॉ. जोशना, अमीषा शर्मा, वंदना खुराना आदि शामिल रहे।