धर्मेंद्र किरठल की पत्नी गिरफ्तार
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पुलिस के मुताबिक इस मामले में छह आरोपी कर्ण सिंह, ओमपाल सिंह, पदम सिंह, सुबोध, सुधीर और रामपाल उर्फ काला मेरठ जेल में बंद हैं। दो आरोपी साहब सिंह एवं भोपाल सिंह जमानत पर जेल से बाहर है। केस न्यायालय विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) समर पाल सिंह की कोर्ट में विचाराधीन है। केस में 11 गवाह के बयान दर्ज (गवाही) हो चुके हैं। केस की वादी सुदेश देवी की कोर्ट में गवाही नहीं हो पा रही थी।
जानकारी देने के बावजूद लंबे समय से सुदेश देवी कोर्ट गवाही देने नहीं आ रही थी। रमाला थाना प्रभारी सतीश चंद्रा ने बताया कोर्ट ने इस मामले में वादी सुदेश देवी के गैर जमानती वारंट जारी कर दिए थे। इसके बावजूद सुदेश देवी कोर्ट में पेश नहीं हुई। सोमवार को उनके मकान की कुर्की करने के कोर्ट ने आदेश दे दिए थे। मंगलवार सुबह पुलिस टीम के साथ वे उनके मकान की कुर्की करने पहुंचे तो कुर्की से पूर्व ही वहां से सुदेश देवी को गिरफ्तार किया। कोर्ट में उनकी गवाही कराई। बाद में कड़ी सुरक्षा में उन्हें घर में छोड़ा।
सुरक्षा नहीं मिलने के कारण कोर्ट नहीं पहुंची
बागपत। प्रधान सुदेश देवी के साथ कचहरी में पहुंचे लोगों ने बताया सुदेश देवी को जान का खतरा था। पुलिस अफसरों से कई बार कोर्ट आने के लिए सुरक्षा की मांग की थी। सुरक्षा नहीं मिलने के कारण ही सुदेश देवी कोर्ट में गवाही के लिए नहीं आ पा रही थी।
यह था मामला
बागपत। किरठल गांव के धर्मेंद्र की पत्नी सुदेश देवी ने रमाला थाना पर मुकदमा दर्ज कराया था कि 20 अगस्त 2004 को सुबह पांच बजे मकान में सफाई कार्य कर रही थी। उनकी देवरानी मोनिका और ननद कविता रसोई में कार्य कर रही थी। देवर हरेंद्र मकान की छत पर रसोई के पास चारपाई पर बैठकर चाय पी रहे थे।
उनके ससुर रामपाल सिंह भैंस का दूध निकाल रहे थे। चचिया ससुर सत्यवीर सिंह हुक्का भर रहे थे। इसी दौरान सुबह करीब छह बजे आठ बदमाशों ने उनके घर में घुसकर ताबड़तोड़ फायरिंग की। गोली लगने से ससुर रामपाल सिंह, चचिया ससुर सत्यवीर सिंह, देवर हरेंद्र और देवरानी मोनिका की मौके पर ही मौत हो गई थी।
ननद कविता गोली लगने से गंभीर घायल हो गई थी। इनके अलावा गोली लगने से एक कुत्ते की भी मौत हो गई थी। इस दौरान बदमाशों ने मकान पर हथगोला भी फेंका था। जो गीली मिट्टी में धंस गया था, इस कारण वह फटा नहीं था। उन्होंने कहा पुलिस की लापरवाही से ही उनके परिवार के लोगों की जान गई है। आरोपी जान से मारने की धमकी दे रहे थे। घटना के 15 दिन पूर्व भी जान का खतरा जताते हुए पुलिस से सुरक्षा की मांग की थी।
उनकी तहरीर पर रमाला थानमें गांव के ही आरोपी साहब सिंह पुत्र राम सिंह, कर्ण सिंह पुत्र साहब सिंह, भोपाल पुत्र अतल सिंह, सुबोध पुत्र भोपाल सिंह, सुधीर पुत्र गजे सिंह, पदम पुत्र गजे सिंह, ओमपाल पुत्र सुखवीर सिंह, रामपाल उर्फ काला पुत्र खेमचंद के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।