{"_id":"88726c267afa0509da7755fcd882c681","slug":"no-relief-for-officers-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"भैंस चोरी के मामले में हाईकोर्ट से अधिकारियों को झटका ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
भैंस चोरी के मामले में हाईकोर्ट से अधिकारियों को झटका
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Sun, 06 Sep 2015 11:54 PM IST
विज्ञापन
बागपत में भैंस चोरी के आरोपियों को बचाने के चक्कर में फंसे अफसरों को बचाने में लगे पुलिस अधिकारियों को भी हाईकोर्ट ने झटका दे दिया है। हाईकोर्ट से स्टे होने के बावजूद चांदीनगर पुलिस ने केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। इस मामले में हाईकोर्ट ने मेरठ रेंज के डीआईजी से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने केस की विवेचना एसपी से एक पद सीनियर अधिकारी से कराने के आदेश दिए हैं।
पुलिस महकमे के ही एक अधिकारी के मुताबिक इस केस की विवेचना चांदीनगर थाना के एचसीपी कालीचरण कर रहे थे। वे चाहते थे कि इस केस की विवेचना एसपी स्तर से सीनियर अधिकारी करें। इसके लिए वे हाईकोर्ट में गए थे। इसके बाद केस की विवेचना चांदीनगर थाना के तत्कालीन प्रभारी एसआई धर्मेंद्र पंवार, आरके सिंह यादव ने की। हाईकोर्ट ने 20 मार्च 2015 को इस मामले में स्टे कर दिया था।
इसके बावजूद 12 जुलाई 2015 को चांदीनगर थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार यादव ने केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। इस बारे में हाईकोर्ट ने डीआईजी से जवाब मांगा तो केस की जांच बागपत एसपी शरद सचान को सौंप दी गई। इस बारे में हाईकोर्ट को फिर अवगत कराया गया कि हाईकोर्ट ने डीआईजी से जवाब मांगा तथा केस की विवेचना एसपी से एक रैंक सीनियर अधिकारी से कराने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
इस बारे में एसपी शरद सचान ने कहा कि इस मामले में चांदीनगर थाना पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। इसके बाद केस की विवेचना वे खुद कर रहे थे। दरोगा के प्रार्थना पत्र पर हाईकोर्ट ने एसपी से एक पद सीनियर अधिकारी से विवेचना कराने के आदेश दिए हैं।
उधर, तत्कालीन चांदीनगर थाना प्रभारी (वर्तमान सिंघावली अहीर थाना इंचार्ज) अशोक कुमार यादव का कहना है कि उन्हें हाईकोर्ट के स्टे का कोई आदेश नहीं मिला था। इसलिए उन्होंने केस की विवेचना कर फाइनल रिपोर्ट लगाई है।
इनके खिलाफ है एफआईआर
-। पंकज कुमार : तत्कालीन एएसपी सीबीसीआईडी लखनऊ (फिलहाल अंबेडकर नगर एसपी है)
-। रफीक अहमद : तत्कालीन डिप्टी एसपी बड़ौत (अब मेरठ में तैनाती )
-। गजे सिंह : तत्कालीन इंस्पेक्टर सीबीसीआईडी मेरठ (रिटायर हो चुके हैं )
-। रामदत्त शर्मा: मुंशी सीओ बड़ौत
बड़ी मुश्किल से दर्ज हुआ था केस
बागपत। दरोगा उमेश कौशिक के प्रार्थना पत्र पर बागपत सीजेएम कोर्ट ने एक अगस्त 2014 को आरोपी अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दे दिए थे। हालांकि पुलिस ने पांच दिन तक केस दर्ज नहीं किया था। इस बीच आरोपियों ने कोर्ट में रिवीजन दाखिल कर दिया था। उन्हें स्टे मिल गया था। बाद में उनके प्रार्थना पत्र पर डीजे कोर्ट से न केवल स्टे खारिज हुआ, बल्कि सीजेएम कोर्ट का आदेश भी बहाल हो गया था। पांच नवंबर 2014 को चांदीनगर थाना पर रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
यह है मामला
बागपत। वर्ष 2013 में चांदीनगर थाना पर ललियाना गांव से भैंस चोरी का केस दर्ज हुआ था। इसमें फारूख, फरमान, साकिर, और शाहिद का नाम सामने आया था। पुलिस ने फारूक को गिरफ्तार किया था। बाकी तीन के परिजन उन्हें बेकसूर बताते हुए तत्कालीन एसपी से मिले, तो केस की जांच तत्कालीन सीओ रफीक अहमद को सौंप दी गई थी। सीओ ने भैंस चोरों की घटना को फर्जी बताया था।
चांदीनगर पुलिस घटना को सही बता रही थी तो जांच एसआईएस में गई, जांचकर्ता एसआई उमेश कौशिक ने चांदीनगर थाना पुलिस को सही बताया। दो अलग-अलग जांच रिपोर्ट के चलते मामला सीबीसीआईडी में भेज दिया गया था। सीबीसीआईडी ने सीओ रफीक अहमद को सही माना। साथ ही सीबीसीआईडी ने दरोगा उमेश कौशिक के खिलाफ केस दर्ज करा दिया गया था। उमेश कौशिक अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट चले गए थे। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दे दिए थे। इसके बाद चांदीनगर थाना पर आरोपी अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
विज्ञापन
पुलिस महकमे के ही एक अधिकारी के मुताबिक इस केस की विवेचना चांदीनगर थाना के एचसीपी कालीचरण कर रहे थे। वे चाहते थे कि इस केस की विवेचना एसपी स्तर से सीनियर अधिकारी करें। इसके लिए वे हाईकोर्ट में गए थे। इसके बाद केस की विवेचना चांदीनगर थाना के तत्कालीन प्रभारी एसआई धर्मेंद्र पंवार, आरके सिंह यादव ने की। हाईकोर्ट ने 20 मार्च 2015 को इस मामले में स्टे कर दिया था।
विज्ञापन
इसके बावजूद 12 जुलाई 2015 को चांदीनगर थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार यादव ने केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। इस बारे में हाईकोर्ट ने डीआईजी से जवाब मांगा तो केस की जांच बागपत एसपी शरद सचान को सौंप दी गई। इस बारे में हाईकोर्ट को फिर अवगत कराया गया कि हाईकोर्ट ने डीआईजी से जवाब मांगा तथा केस की विवेचना एसपी से एक रैंक सीनियर अधिकारी से कराने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
इस बारे में एसपी शरद सचान ने कहा कि इस मामले में चांदीनगर थाना पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। इसके बाद केस की विवेचना वे खुद कर रहे थे। दरोगा के प्रार्थना पत्र पर हाईकोर्ट ने एसपी से एक पद सीनियर अधिकारी से विवेचना कराने के आदेश दिए हैं।
उधर, तत्कालीन चांदीनगर थाना प्रभारी (वर्तमान सिंघावली अहीर थाना इंचार्ज) अशोक कुमार यादव का कहना है कि उन्हें हाईकोर्ट के स्टे का कोई आदेश नहीं मिला था। इसलिए उन्होंने केस की विवेचना कर फाइनल रिपोर्ट लगाई है।
इनके खिलाफ है एफआईआर
-। पंकज कुमार : तत्कालीन एएसपी सीबीसीआईडी लखनऊ (फिलहाल अंबेडकर नगर एसपी है)
-। रफीक अहमद : तत्कालीन डिप्टी एसपी बड़ौत (अब मेरठ में तैनाती )
-। गजे सिंह : तत्कालीन इंस्पेक्टर सीबीसीआईडी मेरठ (रिटायर हो चुके हैं )
-। रामदत्त शर्मा: मुंशी सीओ बड़ौत
बड़ी मुश्किल से दर्ज हुआ था केस
बागपत। दरोगा उमेश कौशिक के प्रार्थना पत्र पर बागपत सीजेएम कोर्ट ने एक अगस्त 2014 को आरोपी अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दे दिए थे। हालांकि पुलिस ने पांच दिन तक केस दर्ज नहीं किया था। इस बीच आरोपियों ने कोर्ट में रिवीजन दाखिल कर दिया था। उन्हें स्टे मिल गया था। बाद में उनके प्रार्थना पत्र पर डीजे कोर्ट से न केवल स्टे खारिज हुआ, बल्कि सीजेएम कोर्ट का आदेश भी बहाल हो गया था। पांच नवंबर 2014 को चांदीनगर थाना पर रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
यह है मामला
बागपत। वर्ष 2013 में चांदीनगर थाना पर ललियाना गांव से भैंस चोरी का केस दर्ज हुआ था। इसमें फारूख, फरमान, साकिर, और शाहिद का नाम सामने आया था। पुलिस ने फारूक को गिरफ्तार किया था। बाकी तीन के परिजन उन्हें बेकसूर बताते हुए तत्कालीन एसपी से मिले, तो केस की जांच तत्कालीन सीओ रफीक अहमद को सौंप दी गई थी। सीओ ने भैंस चोरों की घटना को फर्जी बताया था।
चांदीनगर पुलिस घटना को सही बता रही थी तो जांच एसआईएस में गई, जांचकर्ता एसआई उमेश कौशिक ने चांदीनगर थाना पुलिस को सही बताया। दो अलग-अलग जांच रिपोर्ट के चलते मामला सीबीसीआईडी में भेज दिया गया था। सीबीसीआईडी ने सीओ रफीक अहमद को सही माना। साथ ही सीबीसीआईडी ने दरोगा उमेश कौशिक के खिलाफ केस दर्ज करा दिया गया था। उमेश कौशिक अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट चले गए थे। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दे दिए थे। इसके बाद चांदीनगर थाना पर आरोपी अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी।