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हिस्ट्रीशीटर को गोलियों से भूना
ब्यूरो/अमर उजाला, बालैनी
Updated Mon, 27 Jun 2016 12:34 AM IST
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पुरा गांव में हिस्ट्रीशीटर धीरज की हत्या के बाद मौके पर जांच करती पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बालैनी थाना के हिस्ट्रीशीटर धीरज (30) की रविवार को पुरा गांव में उसके ही खेत में गोलियों से भूनकर हत्या कर दी। इससे गांव में सनसनी फैल गई। मृतक हत्या के केस में सजायाफ्ता था। फिलहाल जेल से जमानत पर आया हुआ था। पता चलते ही पुलिस अफसरों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर शव को कब्जे में ले लिया है।
पुरा गांव निवासी हिस्ट्रीशीटर धीरज पुत्र राजपाल सिंह रविवार सुबह करीब सात बजे अपने घर से भैंसा-बुग्गी पर सवार होकर खेत में चारा लेने के लिए गया था। वह दोपहर तक वापस घर नहीं लौटा। इंतजार करने के बाद उसकी पत्नी बबीता दोपहर करीब डेढ़ बजे खेत में उसे तलाशने पहुंची। उसे ट्यूबवेल के अंदर धीरज का लहूलुहान हालत में शव पड़ा मिला। उसके रोने की आवाज सुनकर खेत में काम कर रहे लोग वहां पहुंच गए।
उन्होंने गांव के लोगों को घटना की जानकारी दी। इससे मौके पर काफी लोग एकत्र हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस अफसर भी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर शव को कब्जे में ले लिया। बाद में मृतक के पिता राजपाल सिंह ने अज्ञात में अपने बेटे की हत्या की तहरीर दी है।
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एएसपी अजीजुल हक ने बताया हिस्ट्रीशीटर धीरज की गोलियां मारकर हत्या की गई है। मृतक सजायाफ्ता अपराधी था। फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर आया हुआ था।
परिवार में मचा कोहराम
मृतक धीरज अपने चार भाइयों में सबसे बड़ा था। उससे छोटा भाई धीरज जेल में बंद है। उसका भाई आदेश गांव में ही रहता है और सबसे छोटा भाई अमित पिछले 16 साल से लापता है। धीरज की पिछले साल शादी हुई थी। उसके एक बेटा है। इस वारदात के बाद परिवार में कोहराम मच गया।
ऋषिपाल की हत्या में हुई थी धीरज को आजीवन कारावास
बागपत। पुलिस के अनुसार पुरा गांव के ऋषिपाल की वर्ष 2003 में हत्या हो गई थी। इसमें धीरज के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इस केस में कोर्ट से आरोपी धीरज को आजीवन कारावास की सजा हो गई थी। धीरज जेल से जमानत पर आया हुआ था।
चार गोली मारी गई धीरज को
बागपत। गांव के लोगों के अनुसार हिस्ट्रीशीटर धीरज को चार गोली मारी गई थी। एक गोली कनपटी और तीन गोली चेहरे पर अलग-अलग जगह पर लगी हुई है।
धीरज ने हत्या कर रखा था अपराध की दुनिया में कदम
बागपत। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक धीरज के खिलाफ बालैनी थाना में वर्ष 2003 में हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। वर्ष 2005 में पुलिस ने उसे आर्म एक्ट में बंद किया था और वर्ष 2006 में गुंडा एक्ट की कार्रवाई की थी।
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पुरा गांव निवासी हिस्ट्रीशीटर धीरज पुत्र राजपाल सिंह रविवार सुबह करीब सात बजे अपने घर से भैंसा-बुग्गी पर सवार होकर खेत में चारा लेने के लिए गया था। वह दोपहर तक वापस घर नहीं लौटा। इंतजार करने के बाद उसकी पत्नी बबीता दोपहर करीब डेढ़ बजे खेत में उसे तलाशने पहुंची। उसे ट्यूबवेल के अंदर धीरज का लहूलुहान हालत में शव पड़ा मिला। उसके रोने की आवाज सुनकर खेत में काम कर रहे लोग वहां पहुंच गए।
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उन्होंने गांव के लोगों को घटना की जानकारी दी। इससे मौके पर काफी लोग एकत्र हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस अफसर भी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर शव को कब्जे में ले लिया। बाद में मृतक के पिता राजपाल सिंह ने अज्ञात में अपने बेटे की हत्या की तहरीर दी है।
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एएसपी अजीजुल हक ने बताया हिस्ट्रीशीटर धीरज की गोलियां मारकर हत्या की गई है। मृतक सजायाफ्ता अपराधी था। फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर आया हुआ था।
परिवार में मचा कोहराम
मृतक धीरज अपने चार भाइयों में सबसे बड़ा था। उससे छोटा भाई धीरज जेल में बंद है। उसका भाई आदेश गांव में ही रहता है और सबसे छोटा भाई अमित पिछले 16 साल से लापता है। धीरज की पिछले साल शादी हुई थी। उसके एक बेटा है। इस वारदात के बाद परिवार में कोहराम मच गया।
ऋषिपाल की हत्या में हुई थी धीरज को आजीवन कारावास
बागपत। पुलिस के अनुसार पुरा गांव के ऋषिपाल की वर्ष 2003 में हत्या हो गई थी। इसमें धीरज के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इस केस में कोर्ट से आरोपी धीरज को आजीवन कारावास की सजा हो गई थी। धीरज जेल से जमानत पर आया हुआ था।
चार गोली मारी गई धीरज को
बागपत। गांव के लोगों के अनुसार हिस्ट्रीशीटर धीरज को चार गोली मारी गई थी। एक गोली कनपटी और तीन गोली चेहरे पर अलग-अलग जगह पर लगी हुई है।
धीरज ने हत्या कर रखा था अपराध की दुनिया में कदम
बागपत। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक धीरज के खिलाफ बालैनी थाना में वर्ष 2003 में हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। वर्ष 2005 में पुलिस ने उसे आर्म एक्ट में बंद किया था और वर्ष 2006 में गुंडा एक्ट की कार्रवाई की थी।