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लेट पहुंचा धमकी भरा खत, पुलिस में हड़कंप

Sat, 26 Dec 2015 01:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Sat, 26 Dec 2015 01:01 AM IST
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Late threatening letter arrived, police scattering
दिल्ली से सटा बागपत जनपद के मुख्य स्थान कोर्ट परिसर, कलक्ट्रेट और जिला अस्पताल समेत भीड़भाड़ वाले स्थानों को खत के माध्यम से उड़ाने की धमकी दी गई है। हालांकि विस्फोट होने की तारीख निकल चुकी है। खत में छत्तीसगढ़ के विस्फोटों का भी जिक्र किया गया है। इससे पुलिस और खुफिया विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
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दो दिन पूर्व पुलिस महकमे के नाम पोस्ट द्वारा पहुंचे खत में विस्फोट, छत्तीसगढ़ की तरह होने की बात लिखी है। कहा कि इससे मकान भी ध्वस्त हो जाएंगे। विस्फोट ऐसा होगा कि आप पता भी नहीं लगा पाएंगे। जिलेटिन विधि द्वारा भी बिल्डिंग ध्वस्त करके जानमाल की क्षति की जा सकती है।
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 खत में यह भी लिखा है कि इन घटनाओं में राजनीतिक गतिविधियों का हाथ है। सुरक्षा न की गई तो जानमाल की अपार क्षति होगी। जनता और अपने आपको बचाओ, वरना पछताओगे। पहले ही सचेत किया जा रहा है। हालांकि विस्फोट होने का समय एक नवंबर से 11 नवंबर के बीच लिखा गया है।
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तारीख निकलने के बाद भी पुलिस अफसरों और खुफिया विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। उन्होंने गोपनीय रूप से पत्र की जांच के अलावा इन स्थानों पर सुरक्षा के बंदोबस्त कर दिए हैं।

खुफिया विभाग, इन स्थानों पर आने वाले लोगों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है। इस बाबत एएसपी विद्या सागर मिश्र का कहना है कि इस तरह का खत आया है। यह किसी खुराफाती की हरकत है। खत की जांच कराई जा रही है।

आतंकियों की तो साजिश नहीं ः बागपत। बागपत का आतंकियों से पहले से ही नाता रहा है। वाराणसी ब्लॉस्ट के मुख्य आरोपी वलीउल्लाह का साथी छपरौली के टांडा गांव का जुबैर था।

जिसे मई 2006 में एसटीएफ ने जम्मू कश्मीर में मुठभेड़ में मार गिराया था। इससे पहले 31 दिसंबर 2000 को बड़ौत का यूनुस दिल्ली में भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री के साथ पकड़ा गया था।

पहले भी मिल चुके धमकी भरे खत
बागपत। बागपत में पहले भी इस तरह के खत मिल चुके है। छह माह पूर्व अधिवक्ता के चैंबर के पास खत पड़ा मिला था। इससे पहले भी कई बार इसी तरह के पत्र मिले। हर बार पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन पुलिस अभी तक खत डालने वालों का पता नहीं लगा पाई है। हालांकि ऐसे खत मिलने के बाद पुलिस ने काफी सख्ती दिखाई।


निगरानी की गई, जांच के लिए टीम गठित की, राइटिंग एक्सपर्ट की सहायता लेने की भी बात कही। लेकिन कुछ दिन सख्ती के बाद पुलिस मामले को हल्के में ले लेती है। बात आई गई हो जाती है और फिर भुला दिया जाता है। तीन-चार बार ऐसे खत आ चुके हैं, लेकिन आज तक पुलिस किसी को भी नहीं पकड़ सकी है।
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