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शव का नहीं हुआ अंतिम संस्कार, दफनाया
Updated Sun, 29 Jul 2018 01:28 AM IST
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रमाला (बागपत)।
इब्राहिमपुर माजरा गांव में बारिश के कारण महिला के शव को परिजन अंतिम संस्कार नहीं कर पाए। जब बारिश नहीं रुकी तो परिजनों ने कृष्णा नदी के किनारे शव को दफनाया। गांव में कोई श्मशान घाट न होने के कारण ग्रामीणों को परेशानी हो रही है।
इब्राहिमपुर माजरा निवासी अनिल कश्यप की 35 वर्षीय पत्नी आरती की बृहस्पतिवार को बीमारी के कारण मौत हो गई। बारिश के कारण तीन दिन तक महिला की लाश घर में ही रखी रही। श्मशान घाट न होने के कारण परिजन शव का अंतिम संस्कार नहीं कर पाए। तीन दिन बाद भी जब मूसलाधार बारिश नहीं रुकी तो ग्रामीणों ने विचार किया। मृतक महिला के परिजनों से बात की। आखिर में तय हुआ कि अंतिम संस्कार करने के बजाय शव को कृष्णा नदी के किनारे दफनाया जाएगा। परिजनों ने मूसलाधार बारिश के चलते शव को नदी के किनारे दफनाया। गांव में श्मशान घाट न होने से शव के अंतिम संस्कार का रिवाज बदलना पड़ा। इसको लेकर ग्रामीणों ने रोष जताया। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन को इस तरफ ध्यान देने चाहिए। सैकड़ों सालों से ग्रामीण खेतों में या कृष्णा नदी किनारे शवों का अंतिम संस्कार करते आ रहे हैं। कई बार श्मशान घाट की भी मांग की गई, लेकिन श्मशान घाट नहीं बना।
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इब्राहिमपुर माजरा गांव में बारिश के कारण महिला के शव को परिजन अंतिम संस्कार नहीं कर पाए। जब बारिश नहीं रुकी तो परिजनों ने कृष्णा नदी के किनारे शव को दफनाया। गांव में कोई श्मशान घाट न होने के कारण ग्रामीणों को परेशानी हो रही है।
इब्राहिमपुर माजरा निवासी अनिल कश्यप की 35 वर्षीय पत्नी आरती की बृहस्पतिवार को बीमारी के कारण मौत हो गई। बारिश के कारण तीन दिन तक महिला की लाश घर में ही रखी रही। श्मशान घाट न होने के कारण परिजन शव का अंतिम संस्कार नहीं कर पाए। तीन दिन बाद भी जब मूसलाधार बारिश नहीं रुकी तो ग्रामीणों ने विचार किया। मृतक महिला के परिजनों से बात की। आखिर में तय हुआ कि अंतिम संस्कार करने के बजाय शव को कृष्णा नदी के किनारे दफनाया जाएगा। परिजनों ने मूसलाधार बारिश के चलते शव को नदी के किनारे दफनाया। गांव में श्मशान घाट न होने से शव के अंतिम संस्कार का रिवाज बदलना पड़ा। इसको लेकर ग्रामीणों ने रोष जताया। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन को इस तरफ ध्यान देने चाहिए। सैकड़ों सालों से ग्रामीण खेतों में या कृष्णा नदी किनारे शवों का अंतिम संस्कार करते आ रहे हैं। कई बार श्मशान घाट की भी मांग की गई, लेकिन श्मशान घाट नहीं बना।
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