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चौगामा क्षेत्र की 85 हजार हेक्टेयर भूमि है प्यासी
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत
Updated Mon, 09 May 2016 01:11 AM IST
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दाहा गांव में झाड़ियों से अटी पड़ी चौगामा नहर।
- फोटो : अमर उजाला
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दोघट। चौगामा की प्यासी धरती को जलमग्न करने के उद्देश्य से 1978 में चौगामा नहर परियोजना का शुभारंभ उप्र के तत्कालीन सिंचाई मंत्री बलबीर सिंह ने बुढ़ाना में किया था। 38 साल बाद भी परियोजना में आधा अधूरा काम हुआ। जो उस समय इसकी लागत का अनुमान सिंचाई विभाग ने लगाया था, उससे 20 गुना धनराशि इस पर खर्च हो चुकी है, लेकिन अभी तक इसका निर्माण अधूरा है।
चौगामा क्षेत्र की 85 हजार हेक्टेयर खेती की भूमि आज भी प्यासी है। हर वर्ष गर्मियों में किसानों की इसकी याद आती है। आंदोलन होते हैं, नहर विभाग के अधिकारी किसानों को आश्वासन देकर चले जाते हैं। यह पिछले 30 साल से हो रहा है।
चौगामा नहर का निर्माण जिस समय शुरू हुआ था, उस समय यहां का भूमिगत जल स्तर 40 फुट नीचे था, जो आज 120 फुट नीचे चला गया है। भूमिगत जल सतह एक-एक हर जल विहीन होती जा रही है। क्षेत्र को उप्र सरकार ने डार्क जोन घोषित कर दिया है। क्षेत्र में नलकूप के नये विद्युत कनेक्शनों पर पाबंदी लगा दी है।
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यहां पर बहने वाली हिंडन-कृष्णा नदी का जल स्रोत भी सूख गया है। इनमें केवल चीनी मिलों, पेपर मिलों व दूसरे कल कारखानों का जहरीला पानी बह रहा है। जो यहां बीमारियां फैलाने के सिवाय कुछ नहीं कर रही है। 1978 में चौगामा नहर खरीफ नहर थी। आज भी खरीफ नहर ही है। उस समय इसमें एक जुलाई से 10 अक्तूबर तक पानी छोड़ने की योजना थी, पूर्वी यमन नहर में पानी उपलब्धता पर। क्षेत्र जल संकट से जूझ रहा है। खेतों में खड़ी फसलें सूख रही हैं। हर वर्ष भूमिगत जल स्तर 70 सेमी नीचे जा रहा है।
शासन-प्रशासन और नहर विभाग के अधिकारी क्षेत्र से मुंह मोडे़ बैठे हैं। शायद लातूर जैसी स्थिति के इंतजार में हैं। चौगामा नहर में पानी सहारनपुर के कल्लरपुर से लोई माइनर के माध्यम से लोई में हैड बनाकर निरपुड़ा, टीकरी, कुरथल शाखा मिलाना, भड़ल, गैडबरा, दोघट, भगवानपुर, सूजती माइनरों के माध्यम से क्षेत्र की 85 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करनी थी। सभी शाखाओं और माइनरों का निर्माण आज तक टेल तक नहीं हुआ। खेती की सिंचाई के लिए कुलाबों और नालियों का निर्माण नहीं हुआ। जब भी इसमें पानी छोड़ा जाता है, तो ये नहरें कई-कई जगहों से टूट जाती है।
उप्र किसान खेत मजदूर कांग्रेस के प्रदेश संयोजक चौधरी ओमकार सिंह, किसान अधिकार आंदोलन के संयोजक चौधरी नरेंद्र राणा, पंवार खाप के चौधरी धर्मवीर सिंह पंवार, चौधरी राजेंद्र सिंह, प्रमोद तोमर, विनोद तोमर, महेंद्र सिंह राठी आदि किसानों ने कहा चौगामा नहर के लिए शीघ्र ही बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। आंदोलन जब तक जारी रहेगा, जब तब मांग पूरी नहीं होगी।
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चौगामा क्षेत्र की 85 हजार हेक्टेयर खेती की भूमि आज भी प्यासी है। हर वर्ष गर्मियों में किसानों की इसकी याद आती है। आंदोलन होते हैं, नहर विभाग के अधिकारी किसानों को आश्वासन देकर चले जाते हैं। यह पिछले 30 साल से हो रहा है।
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चौगामा नहर का निर्माण जिस समय शुरू हुआ था, उस समय यहां का भूमिगत जल स्तर 40 फुट नीचे था, जो आज 120 फुट नीचे चला गया है। भूमिगत जल सतह एक-एक हर जल विहीन होती जा रही है। क्षेत्र को उप्र सरकार ने डार्क जोन घोषित कर दिया है। क्षेत्र में नलकूप के नये विद्युत कनेक्शनों पर पाबंदी लगा दी है।
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यहां पर बहने वाली हिंडन-कृष्णा नदी का जल स्रोत भी सूख गया है। इनमें केवल चीनी मिलों, पेपर मिलों व दूसरे कल कारखानों का जहरीला पानी बह रहा है। जो यहां बीमारियां फैलाने के सिवाय कुछ नहीं कर रही है। 1978 में चौगामा नहर खरीफ नहर थी। आज भी खरीफ नहर ही है। उस समय इसमें एक जुलाई से 10 अक्तूबर तक पानी छोड़ने की योजना थी, पूर्वी यमन नहर में पानी उपलब्धता पर। क्षेत्र जल संकट से जूझ रहा है। खेतों में खड़ी फसलें सूख रही हैं। हर वर्ष भूमिगत जल स्तर 70 सेमी नीचे जा रहा है।
शासन-प्रशासन और नहर विभाग के अधिकारी क्षेत्र से मुंह मोडे़ बैठे हैं। शायद लातूर जैसी स्थिति के इंतजार में हैं। चौगामा नहर में पानी सहारनपुर के कल्लरपुर से लोई माइनर के माध्यम से लोई में हैड बनाकर निरपुड़ा, टीकरी, कुरथल शाखा मिलाना, भड़ल, गैडबरा, दोघट, भगवानपुर, सूजती माइनरों के माध्यम से क्षेत्र की 85 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करनी थी। सभी शाखाओं और माइनरों का निर्माण आज तक टेल तक नहीं हुआ। खेती की सिंचाई के लिए कुलाबों और नालियों का निर्माण नहीं हुआ। जब भी इसमें पानी छोड़ा जाता है, तो ये नहरें कई-कई जगहों से टूट जाती है।
उप्र किसान खेत मजदूर कांग्रेस के प्रदेश संयोजक चौधरी ओमकार सिंह, किसान अधिकार आंदोलन के संयोजक चौधरी नरेंद्र राणा, पंवार खाप के चौधरी धर्मवीर सिंह पंवार, चौधरी राजेंद्र सिंह, प्रमोद तोमर, विनोद तोमर, महेंद्र सिंह राठी आदि किसानों ने कहा चौगामा नहर के लिए शीघ्र ही बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। आंदोलन जब तक जारी रहेगा, जब तब मांग पूरी नहीं होगी।