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बेगम समरू की कोर्ट थी बड़ौत कोतवाली
ब्यूरो/अमर उजाला, बड़ौत
Updated Tue, 31 May 2016 12:12 AM IST
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बड़ौत कोतवाली में मौजूद है पश्चिमी हिस्से का यह ऐतिहासिक स्थल।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
नगर कोतवाली वैसे तो अपने नवनिर्माण के बाद काफी सुंदर दिखाई देती है, इसका एक पहलू यह भी है प्राचीन ऐतिहासिक महत्व और इमारत को नष्ट करके बनाई। नगर कोतवाली कभी बेगम समरू की अदालत हुआ करती थी।
जनपद बागपत के ऐतिहासिक स्थलों व इमारतों की खोज, संरक्षण व संवर्धन अभियान में बड़ौत कोतवाली के ऐतिहासिक स्वरूप पर भी शोध कार्य किया गया, जिसमें बड़ौत कोतवाली के महत्वपूर्ण इतिहास पर से पर्दा उठा है।
शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन व उसकी टीम द्वारा जुटाए गए तथ्यों में सामने आया है कि 17वीं शताब्दी में उत्तरार्द्ध में सरधना परगने के मालिक वाल्टर रेनाल्ड समरू ने कोताना में जन्मी अपने जमाने की मशहूर नृत्यांगना के साथ शादी कर ली थी।
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शादी के कुछ ही दिनों बाद समरू की मृत्यु के उपरांत उसकी बेगम को लोग बेगम समरू के नाम से पुकारने लगे। यूरोपियन अधिकारियों और सरधना परगने के चार हजार सैनिकों के निवेदन पर मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय ने बेगम समरू को सरधना की जागीर दी थी।
वर्ष 1778 में बेगम समरू के शासन का आरंभ हुआ। बड़ौत क्षेत्र की बेटी होने के नाते बेगम समरू को कोताना बड़ौत क्षेत्र से विशेष लगाव था। शोध संस्थान की टीम द्वारा जुटाए गए तथ्यों में यह पता चला है कि वर्तमान में नवनिर्मित बड़ौत कोतवाली के स्थान पर बेगम समरू की अदालत लगती थी।
बेगम समरू ने अपने शासन के प्रारंभ होते ही अपने परगने के विभिन्न क्षेत्रों में अदालतों की स्थापना की थी। जहां पर हर माह बेगम समरू स्वयं आकर बैठती और लोगों की फरियाद सुनकर उनके फैसले दिया करती थी।
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जनपद बागपत के ऐतिहासिक स्थलों व इमारतों की खोज, संरक्षण व संवर्धन अभियान में बड़ौत कोतवाली के ऐतिहासिक स्वरूप पर भी शोध कार्य किया गया, जिसमें बड़ौत कोतवाली के महत्वपूर्ण इतिहास पर से पर्दा उठा है।
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शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन व उसकी टीम द्वारा जुटाए गए तथ्यों में सामने आया है कि 17वीं शताब्दी में उत्तरार्द्ध में सरधना परगने के मालिक वाल्टर रेनाल्ड समरू ने कोताना में जन्मी अपने जमाने की मशहूर नृत्यांगना के साथ शादी कर ली थी।
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शादी के कुछ ही दिनों बाद समरू की मृत्यु के उपरांत उसकी बेगम को लोग बेगम समरू के नाम से पुकारने लगे। यूरोपियन अधिकारियों और सरधना परगने के चार हजार सैनिकों के निवेदन पर मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय ने बेगम समरू को सरधना की जागीर दी थी।
वर्ष 1778 में बेगम समरू के शासन का आरंभ हुआ। बड़ौत क्षेत्र की बेटी होने के नाते बेगम समरू को कोताना बड़ौत क्षेत्र से विशेष लगाव था। शोध संस्थान की टीम द्वारा जुटाए गए तथ्यों में यह पता चला है कि वर्तमान में नवनिर्मित बड़ौत कोतवाली के स्थान पर बेगम समरू की अदालत लगती थी।
बेगम समरू ने अपने शासन के प्रारंभ होते ही अपने परगने के विभिन्न क्षेत्रों में अदालतों की स्थापना की थी। जहां पर हर माह बेगम समरू स्वयं आकर बैठती और लोगों की फरियाद सुनकर उनके फैसले दिया करती थी।