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केवट संवाद सुनकर भाव विभोर हुए श्रद्धालु
ब्यूरो/अमर उजाला, अमीनगर सराय
Updated Mon, 20 Mar 2017 12:47 AM IST
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अमीनगर सराय के परशुराम खेड़ा में आयोजित भागवत कथा में शामिल श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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परशुराम मंदिर में चल रही श्रीराम कथा में पांचवें दिन कथा वाचक ने केवट का संवाद का सुनाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कहा भगवान के नाम लेने से ही दुखों का नाश हो जाता है।
पांचवें दिन कथा वाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज ने बताया वनगमन के दौरान भगवान श्रीराम की भेंट निषाद राज गरुड़ से हुई। इसके बाद नदी पार करने के लिए केवट से मिले। केवल ने राम को अपनी पीड़ा सुनाई। जब तक भगवान श्रीराम ने केवल से चरण नहीं धुलवाए, तब तक उन्हें नदी को पार नहीं करने दिया।
राम का नाम से भी सभी दुखों का विनाश हो जाता है। इसके बाद भारद्वाज ने राम-भरत मिलन प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा भरत प्रेम रूपी अमृत के सागर है। चित्रकूट से श्रीराम की चरण पादुका लेकर आए और सिंहासन पर रख दिया।
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श्रीराम के अयोध्या लौटने से पहले ही रामराज की स्थापना कर डाली। उन्होंने कहा जिस पर विवेकानंद ने अमेरिका में वेदांत का प्रचार किया और भारत को विश्व में सिरमौर बनाया। वहीं पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने गीता का सार अध्ययन करने के बाद जीवन को राष्ट्र की उन्नति में लगा दिया। जो सच्चा ज्ञानी होता है, वही समाज में श्रेष्ठ होता है।
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पांचवें दिन कथा वाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज ने बताया वनगमन के दौरान भगवान श्रीराम की भेंट निषाद राज गरुड़ से हुई। इसके बाद नदी पार करने के लिए केवट से मिले। केवल ने राम को अपनी पीड़ा सुनाई। जब तक भगवान श्रीराम ने केवल से चरण नहीं धुलवाए, तब तक उन्हें नदी को पार नहीं करने दिया।
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राम का नाम से भी सभी दुखों का विनाश हो जाता है। इसके बाद भारद्वाज ने राम-भरत मिलन प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा भरत प्रेम रूपी अमृत के सागर है। चित्रकूट से श्रीराम की चरण पादुका लेकर आए और सिंहासन पर रख दिया।
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श्रीराम के अयोध्या लौटने से पहले ही रामराज की स्थापना कर डाली। उन्होंने कहा जिस पर विवेकानंद ने अमेरिका में वेदांत का प्रचार किया और भारत को विश्व में सिरमौर बनाया। वहीं पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने गीता का सार अध्ययन करने के बाद जीवन को राष्ट्र की उन्नति में लगा दिया। जो सच्चा ज्ञानी होता है, वही समाज में श्रेष्ठ होता है।