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शिक्षा की अलख जगा रहा आदित्य रोटी को मोहताज
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत
Updated Tue, 22 Mar 2016 02:15 AM IST
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बागपत। साइकिल पर घूम गरीब बच्चों को साक्षर बनाने के लिए शिक्षा की अलख जगा रहा आदित्य दो जून की रोटी को मोहताज है। शासन की उपेक्षा के बावजूद आदित्य निरंतर निरक्षरों को साक्षर करने का प्रयास कर रहा है। अब आदित्य साइकिल वाले बाबा के साथ-साथ शिक्षा का भगीरथ भी कहा जाने लगा।
रिकॉर्डधारी फर्रूखाबाद निवासी आदित्य कुमार ने साइकिल पर घूम कर गरीबों को साक्षर करने का बीड़ा उठाया है। उसने अपना जीवन गरीब बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने के लिए समर्पित किया। 20 साल से साइकिल पर भ्रमण कर अधिकांश राज्यों की यात्रा कर चुके हैं। खुद के पास ही रिकॉर्ड नहीं है वह कितने बच्चों को आज तक साक्षर बना चुका है। अपनी खुद के मेहनत के बल पर साइकिल पर घूम कर बेसहारा बच्चों को साक्षर बना रहे हैं।
सोमवार को आदित्य नगर में पहुंचे। विभिन्न स्थानों पर बेसहारा बच्चों को चौपाल लगाकर पढ़ाया। निरक्षरों को अक्षर ज्ञान कराया। आदित्य बताते हैं अशिक्षा के खिलाफ लखनऊ से साइकिल यात्रा की शुरूआत की थी। तीन मई 2014 को आदित्य का नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया था। एशिया बुक ऑफर रिकॉर्ड, वंडर बुक ऑफ इंटरनेशनल रिकॉर्ड, जीनियस बुक ऑफ रिकॉर्ड, गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड, यूनिवर्सिल ऑफ रिकॉड, यूनाइटिड वर्ल्ड रिकॉर्ड, भारत वर्ल्ड रिकॉर्ड, डीडी वन, आल इंडिया रेडियो और राज्यपाल राम नाईक द्वारा निशान-ए-इमाम हुसैन आवॉर्ड से सम्मानित हो चुके आदित्य साइकिल से ही शिक्षा की गंगा बहा रहे हैं।
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आदित्य बताते हैं समाज में उसे विभिन्न नामों से बुलाते हैं, लेकिन आर्थिक सहायता के लिए कोई भी आगे नहीं आता है। हालत ऐसी हो गई है कि दो जून की रोटी के भी लाले पड़े हैं। शासन से भी कोई मदद नहीं हो रही है। उन्होंने कहा जब तक संकल्प पूरा नहीं होगा तब तक वह वापस लखनऊ नहीं लौटेगा।
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रिकॉर्डधारी फर्रूखाबाद निवासी आदित्य कुमार ने साइकिल पर घूम कर गरीबों को साक्षर करने का बीड़ा उठाया है। उसने अपना जीवन गरीब बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने के लिए समर्पित किया। 20 साल से साइकिल पर भ्रमण कर अधिकांश राज्यों की यात्रा कर चुके हैं। खुद के पास ही रिकॉर्ड नहीं है वह कितने बच्चों को आज तक साक्षर बना चुका है। अपनी खुद के मेहनत के बल पर साइकिल पर घूम कर बेसहारा बच्चों को साक्षर बना रहे हैं।
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सोमवार को आदित्य नगर में पहुंचे। विभिन्न स्थानों पर बेसहारा बच्चों को चौपाल लगाकर पढ़ाया। निरक्षरों को अक्षर ज्ञान कराया। आदित्य बताते हैं अशिक्षा के खिलाफ लखनऊ से साइकिल यात्रा की शुरूआत की थी। तीन मई 2014 को आदित्य का नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया था। एशिया बुक ऑफर रिकॉर्ड, वंडर बुक ऑफ इंटरनेशनल रिकॉर्ड, जीनियस बुक ऑफ रिकॉर्ड, गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड, यूनिवर्सिल ऑफ रिकॉड, यूनाइटिड वर्ल्ड रिकॉर्ड, भारत वर्ल्ड रिकॉर्ड, डीडी वन, आल इंडिया रेडियो और राज्यपाल राम नाईक द्वारा निशान-ए-इमाम हुसैन आवॉर्ड से सम्मानित हो चुके आदित्य साइकिल से ही शिक्षा की गंगा बहा रहे हैं।
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आदित्य बताते हैं समाज में उसे विभिन्न नामों से बुलाते हैं, लेकिन आर्थिक सहायता के लिए कोई भी आगे नहीं आता है। हालत ऐसी हो गई है कि दो जून की रोटी के भी लाले पड़े हैं। शासन से भी कोई मदद नहीं हो रही है। उन्होंने कहा जब तक संकल्प पूरा नहीं होगा तब तक वह वापस लखनऊ नहीं लौटेगा।