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दूसरों के गुणों को देखों अवगुणों को नहीं- अरूण मुनि
Updated Tue, 19 Sep 2017 01:20 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
जैन संत अरुण मुनि ने कहा दूसरों की निंदा करना ठीक नहीं, जहां तक हो सके, दूसरों के केवल गुणों को देखों और उन्हें ग्रहण करने का प्रयास करों।
वे जैन स्थानक मंडी में धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा सत्संग का आयोजन इसलिए किया जाता है कि अपने आप को प्रफ्फुल्लित करों। दूसरों के द्वारा जिन वाणी सुनने से कुछ तो परिवर्तन होना चाहिए। जब आप किसी के द्वारा जिनवाणी का श्रवण करके अपने घर जाओगें तो आपके व्यवहार को देखकर ही परिवार वाले समझ जाएंगे। उन्होंने कहा पाप किसी को नहीं पकड़ता। पाप को हम स्वयं ही पकड़ते हैं। किसी के पीठ के पीछे निंदा करना मांस खाने के बराबर होता है। इसमें आत्माराम, अनिल जैन, अतुल, हंस कुमार, कालू जैन, विजय जैन, कमलेश, सविता, चांदनी, मेघा आदि उपस्थित रहे।
जैन संत अरुण मुनि ने कहा दूसरों की निंदा करना ठीक नहीं, जहां तक हो सके, दूसरों के केवल गुणों को देखों और उन्हें ग्रहण करने का प्रयास करों।
वे जैन स्थानक मंडी में धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा सत्संग का आयोजन इसलिए किया जाता है कि अपने आप को प्रफ्फुल्लित करों। दूसरों के द्वारा जिन वाणी सुनने से कुछ तो परिवर्तन होना चाहिए। जब आप किसी के द्वारा जिनवाणी का श्रवण करके अपने घर जाओगें तो आपके व्यवहार को देखकर ही परिवार वाले समझ जाएंगे। उन्होंने कहा पाप किसी को नहीं पकड़ता। पाप को हम स्वयं ही पकड़ते हैं। किसी के पीठ के पीछे निंदा करना मांस खाने के बराबर होता है। इसमें आत्माराम, अनिल जैन, अतुल, हंस कुमार, कालू जैन, विजय जैन, कमलेश, सविता, चांदनी, मेघा आदि उपस्थित रहे।