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बच्चों को हौसले की उड़ान भरने दें , जीत लेंगे सारा जहान
Updated Wed, 28 Nov 2018 01:40 AM IST
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बागपत। अमर उजाला फाउंडेशन एवं बाल चित्र समिति ने मंगलवार को सेंट एंजल्स पब्लिक स्कूल, बागपत और डीएस पब्लिक स्कूल, पाबला में बाल फिल्म महोत्सव का आयोजन किया। इस दौरान बच्चों को फिल्म के माध्यम से दिखाया गया कि जिंदगी में कभी भी हौसला नहीं हारना चाहिए। सच्चाई की राह पर चलने और निडर रहने से ही जीवन में सफलता मिलती है।
मंगलवार को सेंट एंजल्स पब्लिक स्कूल, बागपत में फिल्म महोत्सव का शुभारंभ प्रबंधक अजय गोयल ने फीता काटकर किया। उन्होंने कहा कि अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से यह सराहनीय कार्य किया जा रहा है। बच्चों को इससे जीवन की राह मिलती है और निडरता पैदा होती है। इस दौरान बाल फिल्म करामाती कोट का प्रदर्शन किया । फिल्म से बच्चों ने सीखा कि मुसीबत में अपने मित्रों का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए। कभी भी लालच के वशीभूत नहीं होना चाहिए। फिल्म में दिखाया गया कि एक बच्चे को मारपीट कर घर से निकाल दिया जाता है। जब बच्चा ठंड से सिकुड़ता है तो एक वृद्ध उसे एक करामाती कोट देता है। कोट से एक बार में एक रुपये का सिक्का निकलता है, इससे बच्चा अपने सभी शौक पूरे करता है, लेकिन कुछ लालची लोग उसके करामाती कोट को चुराकर अपने लालच को पूरा करने का प्रयास करते हैं, लेकिन असफल रहते हैं। बाद में बच्चा इस कोट को समुद्र में फेंक देता है।
बंधन में न बांधे बच्चों की प्रतिभा
बागपत। बाल फिल्म महोत्सव के अंतर्गत डीएस पब्लिक स्कूल, पाबला में कभी पास, कभी फेल नामक बाल फिल्म दिखाई गई। शुभारंभ स्कूल के प्रबंधक बिल्लू प्रधान ने फीता काटकर किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन जरूरी हैं। बच्चों का बौद्धिक विकास होता है। स्कूल के सैंकड़ों छात्र-छात्राओं ने फिल्म को देखा। फिल्म में दिखाया गया कि एक बच्चा गणित विषय में होशियार है। उसे गणित की पढ़ाई में रुचि है और वह गांव में रहकर ही पढ़ाई करता है, लेकिन उसका चाचा गलत मंशा से बच्चे को शहर में ले जाता है। फिल्म में दिखाया गया कि बाद में बच्चा खुद ही शहर से गांव लौट आता है। फिल्म में बच्चों का खूब मनोरंजन भी किया । इस दौरान प्रधानाचार्य पूनम प्रधान, राजू भाटी, कर्मवीर प्रधान, राधे गुर्जर, मनित, योगेश कुमार, रेणु कुमार, पूजा देवी, हरि, कृपाल सिंह, सूरज कुमार, सत्येंद्र कुमार, सोनू मौजूद रहे।
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बच्चों ने क्या कहा
करामाती कोट से सीख मिली की कि कभी किसी चीज का लालच नहीं करना चाहिए। सत्य पथ पर आगे बढ़ने से ज्ञान हासिल होता है।
साजिया, छात्रा
फिल्म बेहद मनोरंजक थी। साथी बच्चों के साथ फिल्म देखकर बेहद अच्छा लगा। इससे भ्रांतियां भी दूर होती है।
रिया, छात्रा
स्कूल में फिल्म देखी। करामाती कोट से सीख मिलती है न तो किसी को सताना चाहिए और न ही लालच करना चाहिए।
निखित, छात्र
फिल्म में सीखा कि किसी भी साथी का मुसीबत में साथ नहीं छोड़ना चाहिए। हिम्मत से मुश्किलों का मुकाबला करना चाहिए।
यश, छात्र
मुसीबत किसी भी पर कभी भी आ सकती है, लेकिन किसी भी दोस्त का साथ नहीं छोडना चाहिए। मिलकर मुसीबतों का मुकाबला करना चाहिए।
अरशिया, छात्रा
फिल्म मनोरंजक और ज्ञान प्रद थी। इस तरह की फिल्म बच्चों को दिखाई जानी चाहिए। एक साथ फिल्म देखकर अच्छा लगा।
शशि चौहान, छात्रा
कारामाती कोट में देखने को मिला कि लालच बुरी बला होता है। मुसीबत में साथियों का साथ कभी भी नहीं छोड़ना चाहिए।
वीवी धामा, छात्रा
बच्चों को एक साथ बैठकर फिल्म दिखाई, यह बेहद अच्छा लगा। शिक्षक भी बताते हैं कि हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।
तनिश, छात्रा
बेहद रोचक फिल्म रही। फिल्म में दिखाया गया कि बच्चों पर कभी भी दबाव नहीं बनाना चाहिए। लालच बुरी बला है।
अभिषेक, छात्र
स्कूल के बच्चों के साथ फिल्म देखकर अच्छा लगा। यह बेहद अच्छा अनुभव रहा।
अर्पित धामा
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मंगलवार को सेंट एंजल्स पब्लिक स्कूल, बागपत में फिल्म महोत्सव का शुभारंभ प्रबंधक अजय गोयल ने फीता काटकर किया। उन्होंने कहा कि अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से यह सराहनीय कार्य किया जा रहा है। बच्चों को इससे जीवन की राह मिलती है और निडरता पैदा होती है। इस दौरान बाल फिल्म करामाती कोट का प्रदर्शन किया । फिल्म से बच्चों ने सीखा कि मुसीबत में अपने मित्रों का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए। कभी भी लालच के वशीभूत नहीं होना चाहिए। फिल्म में दिखाया गया कि एक बच्चे को मारपीट कर घर से निकाल दिया जाता है। जब बच्चा ठंड से सिकुड़ता है तो एक वृद्ध उसे एक करामाती कोट देता है। कोट से एक बार में एक रुपये का सिक्का निकलता है, इससे बच्चा अपने सभी शौक पूरे करता है, लेकिन कुछ लालची लोग उसके करामाती कोट को चुराकर अपने लालच को पूरा करने का प्रयास करते हैं, लेकिन असफल रहते हैं। बाद में बच्चा इस कोट को समुद्र में फेंक देता है।
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बंधन में न बांधे बच्चों की प्रतिभा
बागपत। बाल फिल्म महोत्सव के अंतर्गत डीएस पब्लिक स्कूल, पाबला में कभी पास, कभी फेल नामक बाल फिल्म दिखाई गई। शुभारंभ स्कूल के प्रबंधक बिल्लू प्रधान ने फीता काटकर किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन जरूरी हैं। बच्चों का बौद्धिक विकास होता है। स्कूल के सैंकड़ों छात्र-छात्राओं ने फिल्म को देखा। फिल्म में दिखाया गया कि एक बच्चा गणित विषय में होशियार है। उसे गणित की पढ़ाई में रुचि है और वह गांव में रहकर ही पढ़ाई करता है, लेकिन उसका चाचा गलत मंशा से बच्चे को शहर में ले जाता है। फिल्म में दिखाया गया कि बाद में बच्चा खुद ही शहर से गांव लौट आता है। फिल्म में बच्चों का खूब मनोरंजन भी किया । इस दौरान प्रधानाचार्य पूनम प्रधान, राजू भाटी, कर्मवीर प्रधान, राधे गुर्जर, मनित, योगेश कुमार, रेणु कुमार, पूजा देवी, हरि, कृपाल सिंह, सूरज कुमार, सत्येंद्र कुमार, सोनू मौजूद रहे।
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बच्चों ने क्या कहा
करामाती कोट से सीख मिली की कि कभी किसी चीज का लालच नहीं करना चाहिए। सत्य पथ पर आगे बढ़ने से ज्ञान हासिल होता है।
साजिया, छात्रा
फिल्म बेहद मनोरंजक थी। साथी बच्चों के साथ फिल्म देखकर बेहद अच्छा लगा। इससे भ्रांतियां भी दूर होती है।
रिया, छात्रा
स्कूल में फिल्म देखी। करामाती कोट से सीख मिलती है न तो किसी को सताना चाहिए और न ही लालच करना चाहिए।
निखित, छात्र
फिल्म में सीखा कि किसी भी साथी का मुसीबत में साथ नहीं छोड़ना चाहिए। हिम्मत से मुश्किलों का मुकाबला करना चाहिए।
यश, छात्र
मुसीबत किसी भी पर कभी भी आ सकती है, लेकिन किसी भी दोस्त का साथ नहीं छोडना चाहिए। मिलकर मुसीबतों का मुकाबला करना चाहिए।
अरशिया, छात्रा
फिल्म मनोरंजक और ज्ञान प्रद थी। इस तरह की फिल्म बच्चों को दिखाई जानी चाहिए। एक साथ फिल्म देखकर अच्छा लगा।
शशि चौहान, छात्रा
कारामाती कोट में देखने को मिला कि लालच बुरी बला होता है। मुसीबत में साथियों का साथ कभी भी नहीं छोड़ना चाहिए।
वीवी धामा, छात्रा
बच्चों को एक साथ बैठकर फिल्म दिखाई, यह बेहद अच्छा लगा। शिक्षक भी बताते हैं कि हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।
तनिश, छात्रा
बेहद रोचक फिल्म रही। फिल्म में दिखाया गया कि बच्चों पर कभी भी दबाव नहीं बनाना चाहिए। लालच बुरी बला है।
अभिषेक, छात्र
स्कूल के बच्चों के साथ फिल्म देखकर अच्छा लगा। यह बेहद अच्छा अनुभव रहा।
अर्पित धामा