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दुनियावी के साथ दीनी तालीम भी जरूरी
Updated Mon, 16 Apr 2018 01:08 AM IST
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बड़ौत (बागपत)। फूंस वाली मस्जिद के मदरसा नूरियां के प्रांगण में रविवार को अंजुमन मुर्शिदुल उम्मत दीनी तालीम के कार्यक्रम का आयोजन किया । इस कार्यक्रम की शुरुआत कलाम पाक की तिलावत के साथ हुई, इसमें मदरसे के छात्रों का दीनी तकरीर में मुकाबला हुआ। इस आयोजन में प्यारे नवी सल्लाहो अलैहि वसल्लम, मुफ्ती नसीर व मुफ्ती मेहरबान जैसी हस्तियों को याद किया।
मुख्य अतिथि मौलाना क़ासिम मलेशिया ने कहा कि मजहबे इस्लाम में ईमान बहुत बड़ी दौलत है और दीन-ए-इस्लाम जिंदगी गुजारने का बेहतर तरीका है। संचालन कर रहे मरकजी मस्जिद फूंस वाली के इमाम, मदरसे के जिम्मेदार व जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जिला महासचिव मौलाना आरिफ उल हक ने दीनी तालीम ओर मजहबे इस्लाम के बारे में कहा कि शिक्षा को इस्लाम में प्राथमिकता दी गई है और शिक्षा ग्रहण करना हर मुसलमान का कर्त्तव्य है। दुनियावी तालीम हमारे समाज और दुनिया में रहने को जरूरी है, परंतु इसके साथ-साथ दीनी तालीम की भी जरूरत है।
मौलाना आरिफ उल हक ने कहा कि दुनिया में सबसे अमन पसंद मजहब इस्लाम है और मदरसों में दी जाने वाली तालीम आपस में मोहब्बत व भाईचारे का पाठ पढ़ाने की दी जाती है अपने बच्चों को दीनी और दुनियावी तालीम जरूर दें, इससे वह बच्चा आगे चलकर समाज में जाकर इस्लाम की मजबूती के लिए काम करें। इस्लाम वह मजहब है जो आपस में मिल जुल कर रहने और मुल्क की एकता और मुल्क से मोहब्बत की तालीम देता है।
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मौलाना शुएब कांधला और मौलाना बदरुल हुदा ने कहा कि तालीम के साथ-साथ बच्चों के इस तरह के तकरीर के आयोजन होते रहने चाहिए, इससे बच्चों की प्रतिभा को निखरने का मौका मिलता है। इस मौके पर छात्रों ने एक से बढ़कर एक शानदार तकरीर पेश करके अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इसमें प्रथम स्थान पर इफ़्तिख़ार, द्वितीय स्थान हारिस मिलाना और तृतीय स्थान पर अनस रहा।
इस मौके पर मौलाना आरी फुल हक़ द्वारा लिखित दो पुस्तक आदा बूत ताम मौत और उस के बाद के हालात जैसी पुस्तकों का भी विमोचन किया । इसकी अध्यक्षता मदरसे के प्रबंधक मौलाना अब्दुल सत्तार ने की। इस मौके पर मौलाना रफाकत, मौलाना इस्लामुद्दीन, कारी उम्मीद, मौलाना जलालुद्दीन, मौलाना अयूब, मौलाना मजह रूल हुदा, मौलाना जाबिर, मौलाना मेंहदी, मुफ़्ती फहीम, मुफ़्ती वसीम, मुफ़्ती साकिब, मुफ़्ती सालिम, मुफ़्ती दानिश, मौलाना मुहम्मद कारी ताहिर, कारी सादिक़, कारी फ़रजुद्दीन, मौलाना मंफेद आदि रहे।
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मुख्य अतिथि मौलाना क़ासिम मलेशिया ने कहा कि मजहबे इस्लाम में ईमान बहुत बड़ी दौलत है और दीन-ए-इस्लाम जिंदगी गुजारने का बेहतर तरीका है। संचालन कर रहे मरकजी मस्जिद फूंस वाली के इमाम, मदरसे के जिम्मेदार व जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जिला महासचिव मौलाना आरिफ उल हक ने दीनी तालीम ओर मजहबे इस्लाम के बारे में कहा कि शिक्षा को इस्लाम में प्राथमिकता दी गई है और शिक्षा ग्रहण करना हर मुसलमान का कर्त्तव्य है। दुनियावी तालीम हमारे समाज और दुनिया में रहने को जरूरी है, परंतु इसके साथ-साथ दीनी तालीम की भी जरूरत है।
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मौलाना आरिफ उल हक ने कहा कि दुनिया में सबसे अमन पसंद मजहब इस्लाम है और मदरसों में दी जाने वाली तालीम आपस में मोहब्बत व भाईचारे का पाठ पढ़ाने की दी जाती है अपने बच्चों को दीनी और दुनियावी तालीम जरूर दें, इससे वह बच्चा आगे चलकर समाज में जाकर इस्लाम की मजबूती के लिए काम करें। इस्लाम वह मजहब है जो आपस में मिल जुल कर रहने और मुल्क की एकता और मुल्क से मोहब्बत की तालीम देता है।
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मौलाना शुएब कांधला और मौलाना बदरुल हुदा ने कहा कि तालीम के साथ-साथ बच्चों के इस तरह के तकरीर के आयोजन होते रहने चाहिए, इससे बच्चों की प्रतिभा को निखरने का मौका मिलता है। इस मौके पर छात्रों ने एक से बढ़कर एक शानदार तकरीर पेश करके अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इसमें प्रथम स्थान पर इफ़्तिख़ार, द्वितीय स्थान हारिस मिलाना और तृतीय स्थान पर अनस रहा।
इस मौके पर मौलाना आरी फुल हक़ द्वारा लिखित दो पुस्तक आदा बूत ताम मौत और उस के बाद के हालात जैसी पुस्तकों का भी विमोचन किया । इसकी अध्यक्षता मदरसे के प्रबंधक मौलाना अब्दुल सत्तार ने की। इस मौके पर मौलाना रफाकत, मौलाना इस्लामुद्दीन, कारी उम्मीद, मौलाना जलालुद्दीन, मौलाना अयूब, मौलाना मजह रूल हुदा, मौलाना जाबिर, मौलाना मेंहदी, मुफ़्ती फहीम, मुफ़्ती वसीम, मुफ़्ती साकिब, मुफ़्ती सालिम, मुफ़्ती दानिश, मौलाना मुहम्मद कारी ताहिर, कारी सादिक़, कारी फ़रजुद्दीन, मौलाना मंफेद आदि रहे।