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गांवों में खोजे जाएंगे वैज्ञानिक, मिलेगा सम्मान
Updated Thu, 31 May 2018 01:00 AM IST
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बागपत। गांवों में जोड़ तोड़ कर नए-नए आविष्कार करने वाले लोगों की प्रतिभा को अब उच्च स्तर पर पहचान मिलेगी। इसके लिए ग्राम प्रधानों को जिम्मेदारी दी गई है। इस संबंध में बुधवार को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं जिला विज्ञान क्लब की ओर से श्री यमुना इंटर कॉलेज में सक्रियकरण गोष्ठी हुई, इसमें जिले के ग्राम प्रधानों को जानकारी दी
इसमें बतौर मुख्य अतिथि सीडीओ पीसी जायसवाल ने कहा कि क्षेत्र में प्रतिभाएं तो बहुत हैं, लेकिन उन्हें सही प्लेटफार्म नहीं मिल पाता है। घर में ही युवा आकर्षक और बिना प्रशिक्षण के खेल-खेल में मॉडल तैयार कर देते हैं, लेकिन उनकी यह प्रतिभा घर और गांव से बाहर नहीं निकल पाती है। उन्होंने ग्राम प्रधानों से आह्वान किया कि यदि किसान, कारीगर, यांत्रिक और शिल्पकार ने किसी तकनीक के जरिए पर्यावरण को संरक्षित करने में योगदान दिया। ऐसे व्यक्ति, जो प्राकृतिक वस्तुओं से लोगों को इलाज करते हैं, ऐसे सभी लोग हमारे लिए वैज्ञानिक की तरह हैं। उन्हें पहचानने और सम्मानित करने की आवश्यकता है।
डीडीओ हुब लाल ने कहा कि बड़ी संख्या में लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं। इनमें कुछ स्वदेशी चीजों का आविष्कार करते हैं, लेकिन अनजान रहते हैं। गांव से बाहर नहीं जाते हैं। ऐसे व्यक्ति एक परियोजना तैयार करेंगे और जिला और राज्य स्तर पर प्रदर्शनियों में प्रस्तुत करेंगे। विशिष्ट अतिथि रिटायर्ड उप निदेशक डॉ. पीसी शर्मा और रिटायर्ड प्रधानाचार्य डॉ. नरेश शर्मा कहा जो लोग जड़ी बूटी और पौधों की विशेषताएं जानते हैं, उन्हें आमंत्रित करेंगे। जिला समन्वयक जिला विज्ञान क्लब डॉ. प्रीति शर्मा ने कहा कि गोष्ठी का मुख्य उद्देश जुगाड़ वैज्ञानिक और व्यक्तियों की पहचान करने के लिए प्रधानों को प्रेरित करना है। ऐसे व्यक्ति जिन्हें शिक्षा नहीं मिली और स्वदेशी वस्तुओं का आविष्कार किया है, उनकी खोज करना है। उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया जाएगा। डीपीआरओ संजय कुमार यादव ने भी प्रधानों को भी लिए प्रेरित किया। इसमें ग्राम प्रधान रामपाल धामा, संजय, दीपक, वीरेंद्र आदि प्रधान शामिल रहे।
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इसमें बतौर मुख्य अतिथि सीडीओ पीसी जायसवाल ने कहा कि क्षेत्र में प्रतिभाएं तो बहुत हैं, लेकिन उन्हें सही प्लेटफार्म नहीं मिल पाता है। घर में ही युवा आकर्षक और बिना प्रशिक्षण के खेल-खेल में मॉडल तैयार कर देते हैं, लेकिन उनकी यह प्रतिभा घर और गांव से बाहर नहीं निकल पाती है। उन्होंने ग्राम प्रधानों से आह्वान किया कि यदि किसान, कारीगर, यांत्रिक और शिल्पकार ने किसी तकनीक के जरिए पर्यावरण को संरक्षित करने में योगदान दिया। ऐसे व्यक्ति, जो प्राकृतिक वस्तुओं से लोगों को इलाज करते हैं, ऐसे सभी लोग हमारे लिए वैज्ञानिक की तरह हैं। उन्हें पहचानने और सम्मानित करने की आवश्यकता है।
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डीडीओ हुब लाल ने कहा कि बड़ी संख्या में लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं। इनमें कुछ स्वदेशी चीजों का आविष्कार करते हैं, लेकिन अनजान रहते हैं। गांव से बाहर नहीं जाते हैं। ऐसे व्यक्ति एक परियोजना तैयार करेंगे और जिला और राज्य स्तर पर प्रदर्शनियों में प्रस्तुत करेंगे। विशिष्ट अतिथि रिटायर्ड उप निदेशक डॉ. पीसी शर्मा और रिटायर्ड प्रधानाचार्य डॉ. नरेश शर्मा कहा जो लोग जड़ी बूटी और पौधों की विशेषताएं जानते हैं, उन्हें आमंत्रित करेंगे। जिला समन्वयक जिला विज्ञान क्लब डॉ. प्रीति शर्मा ने कहा कि गोष्ठी का मुख्य उद्देश जुगाड़ वैज्ञानिक और व्यक्तियों की पहचान करने के लिए प्रधानों को प्रेरित करना है। ऐसे व्यक्ति जिन्हें शिक्षा नहीं मिली और स्वदेशी वस्तुओं का आविष्कार किया है, उनकी खोज करना है। उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया जाएगा। डीपीआरओ संजय कुमार यादव ने भी प्रधानों को भी लिए प्रेरित किया। इसमें ग्राम प्रधान रामपाल धामा, संजय, दीपक, वीरेंद्र आदि प्रधान शामिल रहे।
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