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'रोटी और दवाइयों के लिए तरस रहे दंगा पीड़ित'
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 05 Nov 2013 12:14 AM IST
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मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों के लिए चलाए जा रहे कैंपों में लोग इलाज और दवाइयों के साथ-साथ दो वक्त के भरपेट भोजन तक के लिए तरस रहे हैं।
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जबकि इलाके में हुए इस दंगे का बच्चों की मानसिक स्थिति पर भी काफी बुरा असर हुआ है। ज्यादातर बच्चे अब भी कैंपों में डरे सहमे हुए हैं। यह कहना है राष्ट्रीय बाल आयोग की उस टीम का जो मुजफ्फरनगर और शामली में लगाए गए कैंपों का दौरा कर लौटी है।
कैंपों में शरण लिए करीब तीन हजार बच्चों की खस्ताहाल स्थिति को बयां करते हुए आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को कैंपों में न्यूनतम आवश्यकताओं के साथ-साथ साफ सफाई पर पूरा ध्यान देने का निर्देश दिया है।
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बाल आयोग ने कैंपों की वास्तविक स्थिति को बताते हुए इस दौरे से संबंधित रिपोर्ट को तैयार कर लिया है। जिसे अगले हफ्ते केंद्र सरकार और राज्य के मुख्य सचिव को सौंपा जाएगा।
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बाल आयोग के सदस्य योगेंद्र दुबे ने बताया कि लगभग सभी कैंपों में महिलाओं और बच्चों की स्थिति खराब है। यहां बीमार और जख्मी लोगों के लिए पर्याप्त इलाज और दवा की व्यवस्था नहीं है।
वहीं दो माह से अधिक समय गुजरने के बावजूद कैंपों में बच्चों की शिक्षा के लिए भी प्रबंध नहीं किया गया है। इसलिए आयोग ने मुख्य सचिव से बच्चों के नजदीकी विद्यालयों में दाखिला कराने को भी कहा है।
दूसरी ओर बाल आयोग ने बच्चों के पोषण पर जोर देते हुए कैंपों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नियुक्त करने की व्यवस्था भी की है। उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च अदालत ने बृहस्पतिवार को कैंपों की हालत को लेकर राज्य सरकार को चेतावनी दी थी।
अदालत ने कहा था कि राज्य सरकार की रिपोर्ट और खबरों में कोई समानता नहीं है। यदि जरा सा भी संदेह हुआ तो अदालत स्वतंत्र दल को जांच के लिए प्रभावित क्षेत्रों में भेजेगी।