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ग्रामीणों ने चंदे से कराया पुल का निर्माण
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Sat, 31 Dec 2016 11:51 PM IST
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ग्रामीणों ने चंदे से कराया पुल का निर्माण
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हरैया ब्लाक के बनावें भोपतपुर गांव के ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से नाराज होकर चंदे की रकम से पुरानी सरयू नदी पर सत्तर मीटर लंबे दो मीटर चौड़े पुल का निर्माण कराया। पुल न होने से ग्रामीणों को खेती बारी के लिए चह के सहारे एक तरफ से दूसरी तरफ जाना पड़ता था। पुल बनने के बाद अब किसानों को सरयू के पार आने जाने में सहूलियत हो रही है।
पुल पर रेलिंग न होने के कारण खतरा बना रहता है। ग्रामीण अब रेलिंग बनवाने के प्रयास में जुटे हुए हैं। बनावे भोपतपुर के लोग खेती करने के लिए पुरानी सरजू नदी पर बने पुराने बांस के बने चह से होकर आना जाना करते थे। सरजू नदी के बीच लगभग 20-25 साल पहले बांस का बना चह था जिससे लोग आते जाते थे। कई बार दुर्घटनाएं भी हो गई थी।
ग्रामीणों ने कई बार जनप्रतिनिधियों से यहां पर पुल बनाने की मांग की लेकिन पुल नहीं बना तब ग्रामीणों ने स्वयं के प्रयास से पुल का निर्माण करने की ठानी। पुल निमा़ण में लगभग तीन लाख रुपये खर्च हुआ था। जिसमें समाजसेवी डा. असद इद्रीश ने 60 हजार रुपये और पूर्व सांसद रमाकांत यादव ने 10 हजार रुपये का नगद सहयोग किया था। इसके बाद ग्रामीणों ने अपने प्रयास से चंदा इकठ्ठा कर पुल का निर्माण कराया।
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ग्राम प्रधान केदार पटेल ने बताया कि इस पुल के निर्माण में गांव के लोगों ने चंदा इकठ्ठा कर बनाया। इसके लिए कई बार शासन प्रशासन से भी मांग की गई लेकिन किसी ने नहीं सुना। वहीं गांव के कई लोगों ने भी हजारों रुपये प्रदान किया। पुल तो बनकर तैयार हो गया लेकिन रेलिंग न होने से हमेशा बच्चों को लेकर डर बना रहता है।
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पुल पर रेलिंग न होने के कारण खतरा बना रहता है। ग्रामीण अब रेलिंग बनवाने के प्रयास में जुटे हुए हैं। बनावे भोपतपुर के लोग खेती करने के लिए पुरानी सरजू नदी पर बने पुराने बांस के बने चह से होकर आना जाना करते थे। सरजू नदी के बीच लगभग 20-25 साल पहले बांस का बना चह था जिससे लोग आते जाते थे। कई बार दुर्घटनाएं भी हो गई थी।
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ग्रामीणों ने कई बार जनप्रतिनिधियों से यहां पर पुल बनाने की मांग की लेकिन पुल नहीं बना तब ग्रामीणों ने स्वयं के प्रयास से पुल का निर्माण करने की ठानी। पुल निमा़ण में लगभग तीन लाख रुपये खर्च हुआ था। जिसमें समाजसेवी डा. असद इद्रीश ने 60 हजार रुपये और पूर्व सांसद रमाकांत यादव ने 10 हजार रुपये का नगद सहयोग किया था। इसके बाद ग्रामीणों ने अपने प्रयास से चंदा इकठ्ठा कर पुल का निर्माण कराया।
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ग्राम प्रधान केदार पटेल ने बताया कि इस पुल के निर्माण में गांव के लोगों ने चंदा इकठ्ठा कर बनाया। इसके लिए कई बार शासन प्रशासन से भी मांग की गई लेकिन किसी ने नहीं सुना। वहीं गांव के कई लोगों ने भी हजारों रुपये प्रदान किया। पुल तो बनकर तैयार हो गया लेकिन रेलिंग न होने से हमेशा बच्चों को लेकर डर बना रहता है।