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आजमगढ़ में दो एई, 11 जेई, दो लिपिक की सेवा समाप्त, हड़कंप
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आजमगढ़। पूर्व नगर विकास मंत्री आजम खां के कार्यकाल में जल निगम में हुई 1188 नियुक्तियों के रद करने के आदेश की जद में जनपद के भी कर्मचारी आ गए हैं। शासन के निर्देश के क्रम में यहां दो एई और 11 जेई की सेवा समाप्त कर दी गई है। इन सभी की नियुक्ति 2016 में हुई थी। इतने कर्मचारियों की एक साथ बर्खास्तगी से जल निगम का टेक्निकल स्टाफ आधे से भी कम हो गया है। महत्वपूर्ण कार्य ठप हो गए हैं।
कुछ अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि मेरिट सूची में ऊपर होने के बावजूद उनका चयन नहीं किया गया था। सपा सरकार में 2016-17 में हुई प्रदेश भर में भर्तियों में बड़े पैमाने पर धांधली की शिकायतों के बाद हाईकोर्ट ने एसआईटी को जांच सौंपी थी। एसआईटी की जांच में शिकायतें सही पाए जाने के बाद सरकार ने उन कर्मचारियों की बर्खास्तगी के आदेश दिए थे। शासन के आदेश के बाद जनपद में भी जलनिगम में कार्यरत कर्मचारियों पर गाज गिर गई है। जिन कर्मचारियों की सेवा समाप्त की गई है उनमें जल निगम के द्वितीय निर्माण खंड के सहायक अभियंता आसिफ खां, सहायक अभियंता फैसल सलामत, अवर अभियंता अभिषेक, अक्षय कुमार चौधरी, अनिल कुमार, बृजेश मद्धेशिया, गिरिजेश, लवकुश, महेश्वर दयाल, राघवेंद्र सिंह, शिवम अग्रहरि, तारकेश्वर प्रसाद, उमेश कुमार मौर्या, नैत्यिक लिपिक अमन सिंह और आशुतोष सिंह शामिल हैं। इनकी सेवा समाप्ति से जल निगम का तकनीकी स्टाफ आधे से भी कम हो गया। इससे वर्तमान समय में चल रही परियोजनाओं के भी प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद भी चुप्पी
आजमगढ़। एसआईटी की जांच के बाद जलनिगम के अधिकारियों और कर्मचारियों पर हुई इस कार्रवाई को अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। ये भी कहा जा रहा है लोगों को कार्रवाई की जानकारी चार और पांच फरवरी को मिल गई थी। एक साथ इतने लोगों के प्रभावित होने के बाद अधिकारियों और कर्मचारियों में चुप्पी है। कहीं से कोई विरोध सुनने को नहीं मिल रहा। हालांकि सूत्रों का मानना है कि कर्मचारियों का संगठन डबल बेंच में अपील करने की तैयारी कर रहा है।
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कई स्थानों का था चार्ज
जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई है उनके पास पवई, फूलपुर, अजमतगढ़, अतरौलिया, मोहम्मदपुर, मार्टीनगंज, बिलरियागंज, जहानागंज, सरायमीर, रानी की सराय, मिर्जापुर, सठियांव, जीयनपुर, हरैया, लालगंज, मेहंनगर, महाराजगंज आदि क्षेत्र की परियोजनाओं का काम था। जल निगम के पास अब तीन एई और छह जेई बचे हैं।
शासन के निर्देश पर दो एई, 11 जेई और दो लिपिक की सेवा समाप्त कर दी गई है। इससे विभाग में तकनीकि स्टाफ की कमी हो गई है। कई परियोजनाओं का काम प्रभावित है। - रणविजय सिंह, एक्सईएन, जलनिगम
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कुछ अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि मेरिट सूची में ऊपर होने के बावजूद उनका चयन नहीं किया गया था। सपा सरकार में 2016-17 में हुई प्रदेश भर में भर्तियों में बड़े पैमाने पर धांधली की शिकायतों के बाद हाईकोर्ट ने एसआईटी को जांच सौंपी थी। एसआईटी की जांच में शिकायतें सही पाए जाने के बाद सरकार ने उन कर्मचारियों की बर्खास्तगी के आदेश दिए थे। शासन के आदेश के बाद जनपद में भी जलनिगम में कार्यरत कर्मचारियों पर गाज गिर गई है। जिन कर्मचारियों की सेवा समाप्त की गई है उनमें जल निगम के द्वितीय निर्माण खंड के सहायक अभियंता आसिफ खां, सहायक अभियंता फैसल सलामत, अवर अभियंता अभिषेक, अक्षय कुमार चौधरी, अनिल कुमार, बृजेश मद्धेशिया, गिरिजेश, लवकुश, महेश्वर दयाल, राघवेंद्र सिंह, शिवम अग्रहरि, तारकेश्वर प्रसाद, उमेश कुमार मौर्या, नैत्यिक लिपिक अमन सिंह और आशुतोष सिंह शामिल हैं। इनकी सेवा समाप्ति से जल निगम का तकनीकी स्टाफ आधे से भी कम हो गया। इससे वर्तमान समय में चल रही परियोजनाओं के भी प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
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इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद भी चुप्पी
आजमगढ़। एसआईटी की जांच के बाद जलनिगम के अधिकारियों और कर्मचारियों पर हुई इस कार्रवाई को अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। ये भी कहा जा रहा है लोगों को कार्रवाई की जानकारी चार और पांच फरवरी को मिल गई थी। एक साथ इतने लोगों के प्रभावित होने के बाद अधिकारियों और कर्मचारियों में चुप्पी है। कहीं से कोई विरोध सुनने को नहीं मिल रहा। हालांकि सूत्रों का मानना है कि कर्मचारियों का संगठन डबल बेंच में अपील करने की तैयारी कर रहा है।
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कई स्थानों का था चार्ज
जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई है उनके पास पवई, फूलपुर, अजमतगढ़, अतरौलिया, मोहम्मदपुर, मार्टीनगंज, बिलरियागंज, जहानागंज, सरायमीर, रानी की सराय, मिर्जापुर, सठियांव, जीयनपुर, हरैया, लालगंज, मेहंनगर, महाराजगंज आदि क्षेत्र की परियोजनाओं का काम था। जल निगम के पास अब तीन एई और छह जेई बचे हैं।
शासन के निर्देश पर दो एई, 11 जेई और दो लिपिक की सेवा समाप्त कर दी गई है। इससे विभाग में तकनीकि स्टाफ की कमी हो गई है। कई परियोजनाओं का काम प्रभावित है। - रणविजय सिंह, एक्सईएन, जलनिगम