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Azamgarh News: तीजन बाई ने आजमगढ़ जेल में पंडवानी गायन की दी थी प्रस्तुति
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तीजन बाई को सम्मानित करते धनंजय चोपड़ा। संवाद
पल्हनी। प्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन हो गया है। वरिष्ठ पत्रकार धनंजय चोपड़ा ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है। चोपड़ा ने बताया कि तीजन बाई ने साल 2004 में आजमगढ़ जेल में एक ऐतिहासिक पंडवानी गायन प्रस्तुत किया था। यह संभवतः देश में पहली बार था जब किसी जेल में तीजन बाई का पंडवानी गायन आयोजित हुआ था। स्पिक मैके और संगिनी संस्था के तत्वावधान में वे कई कार्यक्रमों के लिए आजमगढ़ पहुंचीं थीं। जनवरी 2004 की कड़ाके की ठंड के बावजूद, लोग उनके गायन को सुनने के लिए उमड़ पड़े थे। जेल में कैदियों के बीच उनकी प्रस्तुति अविस्मरणीय रही। तीजन ने ‘बोल वृंदावन बिहारी लाल की जय’ की हुंकार भरकर गायन किया। इससे सभी कैदी भावविभोर हो गए। उन्होंने कहा था कि आज मैं जेल के भीतर अपनी प्रस्तुति देकर धन्य हो गई। मेरे बिहारी तो जेल में ही पैदा हुए थे। आजमगढ़ के पत्रकारों ने भी प्रेस क्लब में उनका सम्मान किया था। बाद के वर्षों में भी तीजन बाई आजमगढ़ की जेल वाली प्रस्तुति को अक्सर याद करती थीं।
धनंजय चोपड़ा ने कहा कि उन्हें तीजन बाई के सानिध्य में बैठने और उन पर मोनोग्राफ लिखने का सौभाग्य मिला। उनका लिखा मोनोग्राफ उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र ने साल 2002 में प्रकाशित किया था। यह उन पर लिखी गई पहली पुस्तक थी, जिसमें उनका गायन भी पहली बार दर्ज हुआ था। चोपड़ा ने बताया कि चार महीने पहले भी उन्होंने तीजन बाई से फोन पर बात की थी। बीमारी में भी वे अपनी कला के संरक्षण और उस पर लिखने की सलाह देती थीं।
चोपड़ा ने आगे कहा कि तीजन बाई उनसे उम्र में काफी बड़ी थीं। इसके बावजूद वे उन्हें हमेशा ''गुरु जी'' कहकर संबोधित करती थीं, जिससे वे नतमस्तक हो जाते थे। तीजन बाई ने अपनी अंतिम सांस तक कला के प्रति गहरा समर्पण बनाए रखा।
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धनंजय चोपड़ा ने कहा कि उन्हें तीजन बाई के सानिध्य में बैठने और उन पर मोनोग्राफ लिखने का सौभाग्य मिला। उनका लिखा मोनोग्राफ उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र ने साल 2002 में प्रकाशित किया था। यह उन पर लिखी गई पहली पुस्तक थी, जिसमें उनका गायन भी पहली बार दर्ज हुआ था। चोपड़ा ने बताया कि चार महीने पहले भी उन्होंने तीजन बाई से फोन पर बात की थी। बीमारी में भी वे अपनी कला के संरक्षण और उस पर लिखने की सलाह देती थीं।
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चोपड़ा ने आगे कहा कि तीजन बाई उनसे उम्र में काफी बड़ी थीं। इसके बावजूद वे उन्हें हमेशा ''गुरु जी'' कहकर संबोधित करती थीं, जिससे वे नतमस्तक हो जाते थे। तीजन बाई ने अपनी अंतिम सांस तक कला के प्रति गहरा समर्पण बनाए रखा।
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