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त्योहार के सीजन में टिकट दलाल सक्रिय, वसूल रहे मनमाना किराया

Sat, 14 Nov 2020 07:47 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 14 Nov 2020 07:47 PM IST
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Ticket brokers active during festival season, charging arbitrary fare
आजमगढ़। दीपावली और छठ पर्व की भीड़ बढ़ते ही ई टिकटों के अवैध कारोबारियों की सक्रियता भी बढ़ गई है। शहरों में ही नहीं, कस्बों और गांवों में भी इनका जाल फैल चुका है। रेलवे काउंटरों पर जहां एक भी तत्काल कंफर्म टिकट नहीं मिल रहा, वहीं कुछ ट्रेवेल एजेंसियों और मोबाइल की दुकानों में बैठे अवैध कारोबारी फर्जी साफ्टवेयर की मदद से धड़ल्ले से कंफर्म टिकट बुक कर रहे हैं। इतना ही नहीं यह कारोबारी अन्य राज्यों के रेलवे स्टेशनों के पीआरएस सिस्टम से टिकट निकाल रहे और आजमगढ़ में प्रिंट निकाल रहे। बदले में यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं।
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यहां तुरंत हो जा रहा कंफर्म टिकट
इंटरनेट की दुनिया में आइआरसीटीसी के समानांतर चल रहे फर्जी साफ्टवेयर रेलवे की वेबसाइट से भी तेज चलते हैं। सुबह दस बजे जैसे ही रेलवे काउंटरों पर टिकटों की बुकिंग शुरू होती है, वे अपना काम करना शुरू कर देते हैं। रेलवे काउंटर पर बैठा क्लर्क जब तक यात्री का नाम और पता भरकर पूछताछ करता है। तब तक नेट पर 80 से 90 फीसद कंफर्म टिकट बुक हो जाते हैं।
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ऐसे हो रही गड़बड़ी
तत्काल टिकट की दलाली करने वाले एजेंट, अपने रिश्तेदार, दोस्त और अन्य के नाम पर मेल आईडी के जरिए आईआरसीटीसी की आईडी बनाते हैं। एक आईडी से एक माह में अधिकतम छह तत्काल टिकट बनती हैं, लेकिन यदि 100 आईडी होती हैं तो 600 टिकट बनती हैं। तत्काल होने के कारण इनमें आरक्षित सीट मिलने की संभावना अधिक है, इसलिए परेशान यात्री को इसके लिए दो से तीन गुना तक किराया वसूला जाता है। वह मजबूर होकर देते भी हैं।
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संभलकर आईडी का करें प्रयोग
आईआरसीटीसी ने ऑनलाइन टिकट को बढ़ावा देने के यात्रियों को पर्सनल आईडी से टिकट बनाने की सुविधा दी है, लेकिन कई बार यात्री, आईडी से अपनी टिकट बनाने की बजाए, दोस्त, रिश्तेदार या जान-पहचान के लोगों की तत्काल टिकट बनाने लगते हैं। कन्फर्म टिकट होने के कारण इनसे अधिक दाम भी वसूलते है। आरपीएफ के मुताबिक टिकट बनाना अपराध नहीं है, लेकिन इन टिकट को बेचना अपराध है। ऐसी पर्सनल आईडी पर ज्यादा नजर रखी जा रही है, जिसने हाल के तीन से चार माह में लगातार, अलग-अलग नाम से तत्काल टिकट बनाई हैं।

छत्तीसगढ़ से आजमगढ़ कैसे पहुंचा रेल टिकट
रेल विभाग के सूत्रों के अनुसार छतीसगढ़ में टिकट बना और दलाल के माध्यम से टिकट की पीडीएफ आजमगढ़ पहुंचाया गया। आजमगढ़ में मौजूद दलाल ने स्कैन कर पीआरएस का टिकट निकाल दिया। रेल सूत्रों का कहना है कि इस तरह का खेल काफी दिनों से चल रहा है, जिसकी अब गहनता से जांच शुरू हो गई है।
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