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मड़ाई की मुंहमांगी कीमत दे रहे किसान
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Mon, 20 Apr 2015 11:42 PM IST
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पहले से ही मौसम की मार झेल रहे किसान इसके मिजाज को देखकर काफी सहमे हुए हैं। खेत में बची फसल को जल्द से जल्द सुरक्षित करना चाहते हैं। जिसका परिणाम है कि गेहूं की मड़ाई के लिए उन्हें मुंहमांगी कीमत चुकानी पड़ी रही है।
सोमवार की सुबह से ही आसमान में बादलों को देखते ही किसान एक बार फिर चौक गए। हालांकि दोपहर से अच्छी खासी धूप निकल आई। धूप निकलते ही किसान जोशोखरोश के साथ बची फसल को सुरक्षित करने की तैयारी में जुट गए। लोगों ने बिजली का आसरा छोड़ ट्रैक्टर, इंजन आदि के सहारे फसलों की मड़ाई शुरू की।
गौरी नरायनपुर गांव के किसान अजय राय ने बताया कि ट्रैक्टर से फसल की मड़ाई महंगा पड़ रहा है ट्रैक्टर चालक 800 रुपये प्रति घंटे की दर से मड़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस वक्त हार्वेस्टरधारक 900 से एक हजार रुपया प्रति बीघा की दर से फसल की कटाई कर रहे हैं। इसी क्रम में भूसा संचित करने वाली मशीन रखने वाले कारोबारी 1500 से 2000 रुपये ट्राली से ले रहे हैं।
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पहलवानपुर गांव के सुरेंद्र यादव ने बताया कि बिजली से मड़ाई सस्ती पड़ती है लेकिन मौसम का जो हाल है, ऐसे में सस्ता और महंगा कौन सोचे। जैसे भी हो फसल को सुरक्षित करना है। हालांकि मड़ाई और बुआई का खर्च जोड़े तो जो पैदावार हुई है, उसे बेचकर लागत भी नहीं निकलेगी।
उधर, कुंवर प्रजापति ने बताया कि दो बार वह गेहूं को काटने के बाद बोझ को पलट कर मड़ाई के लिए सुखा चुके हैं। अब जल्द से जल्द मड़ाई करना चाहते हैं क्योंकि अगर मौसम फिर बिगड़ गया तो उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
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सोमवार की सुबह से ही आसमान में बादलों को देखते ही किसान एक बार फिर चौक गए। हालांकि दोपहर से अच्छी खासी धूप निकल आई। धूप निकलते ही किसान जोशोखरोश के साथ बची फसल को सुरक्षित करने की तैयारी में जुट गए। लोगों ने बिजली का आसरा छोड़ ट्रैक्टर, इंजन आदि के सहारे फसलों की मड़ाई शुरू की।
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गौरी नरायनपुर गांव के किसान अजय राय ने बताया कि ट्रैक्टर से फसल की मड़ाई महंगा पड़ रहा है ट्रैक्टर चालक 800 रुपये प्रति घंटे की दर से मड़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस वक्त हार्वेस्टरधारक 900 से एक हजार रुपया प्रति बीघा की दर से फसल की कटाई कर रहे हैं। इसी क्रम में भूसा संचित करने वाली मशीन रखने वाले कारोबारी 1500 से 2000 रुपये ट्राली से ले रहे हैं।
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पहलवानपुर गांव के सुरेंद्र यादव ने बताया कि बिजली से मड़ाई सस्ती पड़ती है लेकिन मौसम का जो हाल है, ऐसे में सस्ता और महंगा कौन सोचे। जैसे भी हो फसल को सुरक्षित करना है। हालांकि मड़ाई और बुआई का खर्च जोड़े तो जो पैदावार हुई है, उसे बेचकर लागत भी नहीं निकलेगी।
उधर, कुंवर प्रजापति ने बताया कि दो बार वह गेहूं को काटने के बाद बोझ को पलट कर मड़ाई के लिए सुखा चुके हैं। अब जल्द से जल्द मड़ाई करना चाहते हैं क्योंकि अगर मौसम फिर बिगड़ गया तो उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।