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मुलायम के संसदीय क्षेत्र में अखिलेश का पलड़ा भारी
शैलेंद्र मणि त्रिपाठी/आजमगढ
Updated Mon, 24 Oct 2016 12:09 AM IST
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समाजवादी पार्टी
- फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से चाचा शिवपाल, ओमप्रकाश सिंह, शादाब फातिमा और नारद राय को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किए जाने के बाद सपा का पारिवारिक कलह अब सतह पर आ गया है। प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल और अखिलेश के आमने सामने आने के बाद जिले के पार्टी पदाधिकारियों और मंत्रियों में ऊहापोह की स्थिति है।
कोई मुखर तो नहीं हो रहा है लेकिन मुख्यमंत्री की बुलाई गई बैठक में सभी नौ विधायकों की मौजूदगी से यह जाहिर हो गया है कि यहां के विधायक अखिलेश के पक्ष में हैं। पार्टी में अंदरूनी कलह किस अंजाम तक पहुंचेगा यह तो भविष्य बताएगा लेकिन यह तय है कि अगर सपा दो फाड़ हुई तो मुलायम के संसदीय क्षेत्र के ज्यादातर सपाजन अखिलेश यादव के साथ खड़े नजर आएंगे।
सूत्रों का कहना है कि अखिलेश से जुड़े पार्टी के लोगों को उनके साथ अपना राजनीतिक भविष्य बेहतर नजर आ रहा है। कौमी एकता दल का सपा में विलय को लेकर सपा प्रदेश नेतृत्व में मचे घमासान मचा था। उस दौरान सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने किसी तरह विवाद शांत कराया था लेकिन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव की ओर से अखिलेश समर्थकों पर गई कार्रवाई के बाद मनमुटाव बढ़ता ही गया। नतीजतन रविवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव सहित चार मंत्रियों बर्खास्त करने के साथ जयाप्रदा को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया।
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इस कार्रवाई के बाद माध्यमिक शिक्षामंत्री की कुर्सी फिर खतरे में पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि राजनीतिक संतुलन की मंशा से बलराम यादव के पुत्र विधायक संग्राम यादव मुख्यमंत्री अखिलेश के खेमे में हैं। जिले के नेतृत्व सूत्रों की मानें तो शीर्ष नेतृत्व के इस कलह का असर जिले की समाजवादी पार्टी पर पड़ेगा। आज जिले में पार्टी के लगभग 70 प्रतिशत नेता मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अपना नेता मान रहे हैं।
मुख्यमंत्री की लखनऊ में हुई बैठक में जिले के सभी नौ विधायक, मंत्री और जिलाध्यक्ष शामिल हुए जिससे यह प्रतीत हो रहा है कि सभी अखिलेश यादव के पक्ष में हैं। वहीं मुख्यमंत्री द्वारा अमर सिंह पर निशाना साधने के बाद अमर सिंह के समर्थक मौन साधे हैं। पूर्व में अमर सिंह के जनपद में भी उन्हें पार्टी में शामिल करने के खिलाफ आवाज उठ चुकी है। मुख्यमंत्री के उन पर दिए गए बयान के बाद अमर सिंह को अपने ही जनपद में पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं का विरोध देखने को मिल सकता है। वैसे जो भी हो आज मुलायम के संसदीय क्षेत्र में उनके पुत्र के समर्थक ज्यादा हैं।
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कोई मुखर तो नहीं हो रहा है लेकिन मुख्यमंत्री की बुलाई गई बैठक में सभी नौ विधायकों की मौजूदगी से यह जाहिर हो गया है कि यहां के विधायक अखिलेश के पक्ष में हैं। पार्टी में अंदरूनी कलह किस अंजाम तक पहुंचेगा यह तो भविष्य बताएगा लेकिन यह तय है कि अगर सपा दो फाड़ हुई तो मुलायम के संसदीय क्षेत्र के ज्यादातर सपाजन अखिलेश यादव के साथ खड़े नजर आएंगे।
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सूत्रों का कहना है कि अखिलेश से जुड़े पार्टी के लोगों को उनके साथ अपना राजनीतिक भविष्य बेहतर नजर आ रहा है। कौमी एकता दल का सपा में विलय को लेकर सपा प्रदेश नेतृत्व में मचे घमासान मचा था। उस दौरान सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने किसी तरह विवाद शांत कराया था लेकिन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव की ओर से अखिलेश समर्थकों पर गई कार्रवाई के बाद मनमुटाव बढ़ता ही गया। नतीजतन रविवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव सहित चार मंत्रियों बर्खास्त करने के साथ जयाप्रदा को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया।
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इस कार्रवाई के बाद माध्यमिक शिक्षामंत्री की कुर्सी फिर खतरे में पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि राजनीतिक संतुलन की मंशा से बलराम यादव के पुत्र विधायक संग्राम यादव मुख्यमंत्री अखिलेश के खेमे में हैं। जिले के नेतृत्व सूत्रों की मानें तो शीर्ष नेतृत्व के इस कलह का असर जिले की समाजवादी पार्टी पर पड़ेगा। आज जिले में पार्टी के लगभग 70 प्रतिशत नेता मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अपना नेता मान रहे हैं।
मुख्यमंत्री की लखनऊ में हुई बैठक में जिले के सभी नौ विधायक, मंत्री और जिलाध्यक्ष शामिल हुए जिससे यह प्रतीत हो रहा है कि सभी अखिलेश यादव के पक्ष में हैं। वहीं मुख्यमंत्री द्वारा अमर सिंह पर निशाना साधने के बाद अमर सिंह के समर्थक मौन साधे हैं। पूर्व में अमर सिंह के जनपद में भी उन्हें पार्टी में शामिल करने के खिलाफ आवाज उठ चुकी है। मुख्यमंत्री के उन पर दिए गए बयान के बाद अमर सिंह को अपने ही जनपद में पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं का विरोध देखने को मिल सकता है। वैसे जो भी हो आज मुलायम के संसदीय क्षेत्र में उनके पुत्र के समर्थक ज्यादा हैं।