{"_id":"57b5fe604f1c1b363c6eaecc","slug":"the-full-ghaghra-on-target-came-murali","type":"story","status":"publish","title_hn":"घाघरा के निशाने पर आया मुराली का पुरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घाघरा के निशाने पर आया मुराली का पुरा
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
Updated Thu, 18 Aug 2016 11:58 PM IST
विज्ञापन
बाढ़
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सगड़ी तहसील क्षेत्र के देवरांचल से होकर गुजरने वाली घाघरा हर साल देवारावासियों को गहरा जख्म दे जाती है। अभी पीड़ितों के जख्म भर भी नहीं पाते हैं कि फिर इस नदी की विनाशलीला बरसात में शुरू हो जाती है। देवारावासियों के लिए अब यह जख्म नासूर बन चुका है। लगभग ढाई दशक में घाघरा लगभग साढ़े छह सौ घरों और कई लोगों की जिंदगियों को लील चुकी है।
जनपद की उत्तरी सीमा को छूकर गुजरने वाली घाघरा हर बार अपने पीछे तबाही का ऐसा मंजर छोड़ जाती है। जिसे देवारावासी पूरे वर्ष सहेजते हैं। लेकिन देवारावासियों का दुर्भाग्य तो यह है कि जब तक वह अपने तबाह हुए आशियाने को फिर से सहेेंजे तब तक घाघरा फिर रौद्र रूप में तांडव मचाने के लिए उनके सामने खड़ी होती है। वर्ष 1990 में हरैया ब्लाक का उर्दिहा गांव घाघरा की धारा में विलीन हो गया।
उस समय गांव की आबादी तीन हजार थी और गांव में कुल् 350 घर थे। वर्ष 2005 में आई बाढ़ के दौरान ठीकहिया हाजीपुर गांव के 90 घर नदी में विलीन हो गए। वर्ष 2005 में ही घाघरा ने धुसवा गांगेपुर के 110 घरों का अस्तित्व समाप्त कर दिया। वर्ष 2005 में ही घाघरा चक्की गांव के 55 घरों को लील गई। इसके बाद वर्ष 2007 में एक बार फिर से घाघरा का रौद्र रूप देखने को मिला। नदी ने देवारा खास राजा के रमई का पुरवा के 25 से 30 घरों को नामोनिशान मिटा दिया। इस बार घाघरा के निशाने पर देवारा खास राजा गांव का मुराली का पुरा है। इस पुरवे में 20 परिवार निवास करता है।
विज्ञापन
गांव में दो रिहाइशी मड़ई अब तक घाघरा की धारा में विलीन हो चुकी है। इतना सब होने के बाद भी ग्रामीण अपना आशियाना छोड़ने को तैयार नहीं है। अब इसे लोगों की जिद कहें या जन्मभूमि के प्रति उनका स्नेह कि लोग जान खतरे में आज भी पानी से घिरे घरों में रहने को विवश हैं।
19 घर कटान के मुहाने पर : इस वर्ष जुलाई के प्रथम सप्ताह से घाघरा लगातार खतरा बिंदू से ऊपर बनी हुई है। अगर घाघरा द्वारा मचाई गई तबाही की स्थिति पर गौर करें तो मुराली का पुरवा के चौदह और त्रिलोकी का पुरा के पांच घर कटान के मुहाने पर हैं। तीरथ और रामअवध की मंडई घाघरा मे बिलिन हो चुकी है। वहीं देवकी, मुराली, तीर्थराज, रामबृक्ष, लालबचन, राधेश्याम, जगदीश, परसन, लालधर, पूजन, प्रकाश, छत्रधारी, रामकवल, लोरिक, रामचंदर आदि के घर कटान के मुहाने पर हैं। यह सभी लोग अपना सामान घरों से हटा चुके हैं।
फिर बढ़ा घाघरा का जलस्तर : विगत चार दिनों तक घटने के बाद गुरुवार को घाघरा के जलस्तर में एक बार फिर से वृद्घि देखने को मिली। नदी दोनों गेजों पर खतरा बिंदू के पार हो गई। बुधवार की शाम चार बजे बदरहुंआ नाले पर नदी का जलस्तर 71.66 मीटर और डिघिया नाले पर 71.72 मीटर था। जो गुरुवार को बढ़कर बदरहुंआ नाले पर 71.72 मीटर और डिघिया नाले पर 70.67 मीटर हो गया। जो बदरहुंआ पर खतरा बिंदू से चार सेमी और डिघिया पर 27 सेमी खतरा बिंदू से ऊपर है।
अधिकारी आए और गए, दोबारा नहीं ली सुधि : देवकी, राधेश्याम, लालधर, सुदर्शन, सबिता, सुराजी का कहना है कि एक महीने से ऊपर हो गया। घाघरा नदी का कटान जब धीरे-धीरे आबादी के तरफ आना शुरू हुआ तो हम लोग अपना आशियाना उजाड़ कर गोरखपुर के बिसरा गोला में और रौनापार की नई बस्ती में अपने सामान को पहुंचाना शुरू किए। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी और कर्मचारी आए और चले गए। लेकिन हमारी सुधि नहीं लीथ। क्या हमको जमीन और मुआवजे की जरूरत नहीं है।
लगभग साढ़े चार सौ बीघे जमीन काट चुकी है घाघरा : घाघरा नदी इस वर्ष लगभग चार से पांच किलोमीटर कृषि योग्य भूमि को काटकर आबादी के पास पहुंच गई है। गोरखपुर के बिसरा, गोपालपुर गांव के लोगों की लगभग ढ़ाई से तीन बीघा जमीन घाघरा इस वर्ष काट चुकी है। वहीं देवारा खास राजा के 50 से 60 लोगों की लगभग डेढ़ सौ बीघया जमीन नदी की धारा में विलीन हो चुकी है। सबसे दुखद तो यह है कि कटान पीड़ितों को मुआवजा तो दूर अब तक उनकी कटी जमीन की पड़ताल भी नहीं हो सकी है। जिस बात को लेकर लोगों में प्रशासन के प्रति गुस्सा है।
विज्ञापन
जनपद की उत्तरी सीमा को छूकर गुजरने वाली घाघरा हर बार अपने पीछे तबाही का ऐसा मंजर छोड़ जाती है। जिसे देवारावासी पूरे वर्ष सहेजते हैं। लेकिन देवारावासियों का दुर्भाग्य तो यह है कि जब तक वह अपने तबाह हुए आशियाने को फिर से सहेेंजे तब तक घाघरा फिर रौद्र रूप में तांडव मचाने के लिए उनके सामने खड़ी होती है। वर्ष 1990 में हरैया ब्लाक का उर्दिहा गांव घाघरा की धारा में विलीन हो गया।
विज्ञापन
उस समय गांव की आबादी तीन हजार थी और गांव में कुल् 350 घर थे। वर्ष 2005 में आई बाढ़ के दौरान ठीकहिया हाजीपुर गांव के 90 घर नदी में विलीन हो गए। वर्ष 2005 में ही घाघरा ने धुसवा गांगेपुर के 110 घरों का अस्तित्व समाप्त कर दिया। वर्ष 2005 में ही घाघरा चक्की गांव के 55 घरों को लील गई। इसके बाद वर्ष 2007 में एक बार फिर से घाघरा का रौद्र रूप देखने को मिला। नदी ने देवारा खास राजा के रमई का पुरवा के 25 से 30 घरों को नामोनिशान मिटा दिया। इस बार घाघरा के निशाने पर देवारा खास राजा गांव का मुराली का पुरा है। इस पुरवे में 20 परिवार निवास करता है।
विज्ञापन
गांव में दो रिहाइशी मड़ई अब तक घाघरा की धारा में विलीन हो चुकी है। इतना सब होने के बाद भी ग्रामीण अपना आशियाना छोड़ने को तैयार नहीं है। अब इसे लोगों की जिद कहें या जन्मभूमि के प्रति उनका स्नेह कि लोग जान खतरे में आज भी पानी से घिरे घरों में रहने को विवश हैं।
19 घर कटान के मुहाने पर : इस वर्ष जुलाई के प्रथम सप्ताह से घाघरा लगातार खतरा बिंदू से ऊपर बनी हुई है। अगर घाघरा द्वारा मचाई गई तबाही की स्थिति पर गौर करें तो मुराली का पुरवा के चौदह और त्रिलोकी का पुरा के पांच घर कटान के मुहाने पर हैं। तीरथ और रामअवध की मंडई घाघरा मे बिलिन हो चुकी है। वहीं देवकी, मुराली, तीर्थराज, रामबृक्ष, लालबचन, राधेश्याम, जगदीश, परसन, लालधर, पूजन, प्रकाश, छत्रधारी, रामकवल, लोरिक, रामचंदर आदि के घर कटान के मुहाने पर हैं। यह सभी लोग अपना सामान घरों से हटा चुके हैं।
फिर बढ़ा घाघरा का जलस्तर : विगत चार दिनों तक घटने के बाद गुरुवार को घाघरा के जलस्तर में एक बार फिर से वृद्घि देखने को मिली। नदी दोनों गेजों पर खतरा बिंदू के पार हो गई। बुधवार की शाम चार बजे बदरहुंआ नाले पर नदी का जलस्तर 71.66 मीटर और डिघिया नाले पर 71.72 मीटर था। जो गुरुवार को बढ़कर बदरहुंआ नाले पर 71.72 मीटर और डिघिया नाले पर 70.67 मीटर हो गया। जो बदरहुंआ पर खतरा बिंदू से चार सेमी और डिघिया पर 27 सेमी खतरा बिंदू से ऊपर है।
अधिकारी आए और गए, दोबारा नहीं ली सुधि : देवकी, राधेश्याम, लालधर, सुदर्शन, सबिता, सुराजी का कहना है कि एक महीने से ऊपर हो गया। घाघरा नदी का कटान जब धीरे-धीरे आबादी के तरफ आना शुरू हुआ तो हम लोग अपना आशियाना उजाड़ कर गोरखपुर के बिसरा गोला में और रौनापार की नई बस्ती में अपने सामान को पहुंचाना शुरू किए। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी और कर्मचारी आए और चले गए। लेकिन हमारी सुधि नहीं लीथ। क्या हमको जमीन और मुआवजे की जरूरत नहीं है।
लगभग साढ़े चार सौ बीघे जमीन काट चुकी है घाघरा : घाघरा नदी इस वर्ष लगभग चार से पांच किलोमीटर कृषि योग्य भूमि को काटकर आबादी के पास पहुंच गई है। गोरखपुर के बिसरा, गोपालपुर गांव के लोगों की लगभग ढ़ाई से तीन बीघा जमीन घाघरा इस वर्ष काट चुकी है। वहीं देवारा खास राजा के 50 से 60 लोगों की लगभग डेढ़ सौ बीघया जमीन नदी की धारा में विलीन हो चुकी है। सबसे दुखद तो यह है कि कटान पीड़ितों को मुआवजा तो दूर अब तक उनकी कटी जमीन की पड़ताल भी नहीं हो सकी है। जिस बात को लेकर लोगों में प्रशासन के प्रति गुस्सा है।