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सिनोद को याद कर रोया पूरा गांव
आजमगढ
Updated Wed, 20 Jul 2016 11:54 PM IST
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सिनोद के पार्थिव शरीर को ले जाते पिता तूफानी राम और एसपी अजय कुमार साहनी।
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औरंगाबाद में नक्सली हमले में शहीद हुए निजामाबाद थाना क्षेत्र के गौसपुर गांव निवासी सीआरपीएफ के जवान सिनोद कुमार का शव बुधवार अपराह्न लगभग दो बजे उसके घर पहुंचा। शव पहुंचते ही परिवार के लोगों के साथ पूरा गांव बिलख पड़ा। जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ क्षेत्रीय लोगों ने अपने लाल को श्रद्धांजलि दी। पारिवारिक परंपरा के अनुसार शहीद के शव को जमीन में दफन किया गया।
सीआरपीएफ के जवान सिनोद का शव लेकर हवाईजहाज से मंदुरी हवाई पट्टी पर पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे माध्यमिक शिक्षा मंत्री बलराम यादव ने सबसे पहले शहीद को श्रद्धांजलि दी। मंत्री ने कहा कि हमने देश का एक सपूत खो दिया, जिसकी भरपाई होनी मुश्किल है। इसके बाद पुलिस अधीक्षक अजय कुमार साहनी और प्रभारी जिलाधिकारी/मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र वर्मा ने शव को कंधा दिया और पुलिस कर्मियों ने सलामी दी।
तत्पश्चात शहीद का शव उसके गांव गौसपुर शेखपुरा लाया गया। जैसे ही शव को दरवाजे पर रखा गया। वहां मौजूद घर और गांववालों की आंखें नम हो गईं। सिनोद की मां कवलपत्ती देवी और पत्नी जाह्नवी का रो-रोकर बुरा हाल था। पत्नी जाह्नवी शव से लिपट कर रो रही थी। गांव की महिलाएं उसे पकड़कर सांत्वना दे रही थी। लेकिन उनकी आंखें भी भरी हुई थीं। पिता तूफानी राम नेे अपने वीर पुत्र को अंतिम विदाई दी।
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इसके बाद शव को लगभग पौने तीन बजे दफनाने के लिए गांव के मुख्य मार्ग पर लाया गया। जहां कब्र खोदी जा चुकी थी। जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। इसके बाद सीआरपीएफ के डीआईजी समेत जवानों ने गार्ड आफ आनर दिया। इसके बाद शव को पूरे आदर के साथ दफना दिया गया। इस मौके पर पूर्व सांसद डा. बलिराम, विधायक आलमबदी, सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव आदि उपस्थित थे।
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सीआरपीएफ के जवान सिनोद का शव लेकर हवाईजहाज से मंदुरी हवाई पट्टी पर पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे माध्यमिक शिक्षा मंत्री बलराम यादव ने सबसे पहले शहीद को श्रद्धांजलि दी। मंत्री ने कहा कि हमने देश का एक सपूत खो दिया, जिसकी भरपाई होनी मुश्किल है। इसके बाद पुलिस अधीक्षक अजय कुमार साहनी और प्रभारी जिलाधिकारी/मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र वर्मा ने शव को कंधा दिया और पुलिस कर्मियों ने सलामी दी।
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तत्पश्चात शहीद का शव उसके गांव गौसपुर शेखपुरा लाया गया। जैसे ही शव को दरवाजे पर रखा गया। वहां मौजूद घर और गांववालों की आंखें नम हो गईं। सिनोद की मां कवलपत्ती देवी और पत्नी जाह्नवी का रो-रोकर बुरा हाल था। पत्नी जाह्नवी शव से लिपट कर रो रही थी। गांव की महिलाएं उसे पकड़कर सांत्वना दे रही थी। लेकिन उनकी आंखें भी भरी हुई थीं। पिता तूफानी राम नेे अपने वीर पुत्र को अंतिम विदाई दी।
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इसके बाद शव को लगभग पौने तीन बजे दफनाने के लिए गांव के मुख्य मार्ग पर लाया गया। जहां कब्र खोदी जा चुकी थी। जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। इसके बाद सीआरपीएफ के डीआईजी समेत जवानों ने गार्ड आफ आनर दिया। इसके बाद शव को पूरे आदर के साथ दफना दिया गया। इस मौके पर पूर्व सांसद डा. बलिराम, विधायक आलमबदी, सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव आदि उपस्थित थे।