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ड्रग कंट्रोलर के पास धूल फांक रही फाइल
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Mon, 12 Dec 2016 11:54 PM IST
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रक्तदान शिविर
- फोटो : demo pic
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प्रदेश के टॉप टेन ब्लड बैंकों में शामिल जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक के लाइसेंस का नवीनीकरण तीन वर्षों से नहीं हुआ। नवीनीकरण की फाइल ड्रग कंट्रोलर ऑफिस में धूल फांक रही है। ब्लड बैंक का रिकार्ड बेहतर होने की वजह से इसे अनुमति के आधार पर चलाया जा रहा है।
प्रदेश सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में जुटी है ताकि गरीब को भी इलाज में पैसा बाधा नहीं बने। वहीं, सपा मुखिया संसदीय क्षेत्र में ही स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल बेहाल है। ब्लड बैंक की वर्तमान क्षमता 1400 यूनिट रक्त, एक हजार प्लाज्मा और 36 यूनिट प्लेटलेट्स रखने की है। ब्लड बैंक में हर महीने किसी न किसी संस्था की ओर से रक्तदान शिविर का आयोजन होता है। जिसके कारण यहां रक्त की कोई कमी नहीं होती है। यहां से मऊ, अंबेडकरनगर, वाराणसी, देवरिया, गोरखपुर और जौनपुर जनपदों में भी रक्त, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स की सप्लाई होती है।
ब्लड बैंक प्रभारी डा. विनय सिंह यादव की मानें तो 2013 में ब्लड बैंक का लाइसेंस फेल हो गया था। इसे रीनिवल के लिए 2013 के अंतिम महीने में ड्रग कंट्रोलर को भेज दिया गया लेकिन अभी तक नवीनीकरण नहीं हो सका है। हर छह महीने बाद रिमाइंडर भेजा जाता है। जब पत्र भेजा जाता है तो वहां से कहा जाता है कि हमारी टीम जांच के लिए जा रही है, तब तक आप लोग अपना कार्य जारी रखें। तब से हमलोग उनकी इजाजत से ब्लड बैंक का संचालन कर रहे हैं। ब्लड बैंक के अच्छे कार्य को देखते हुए हमें तीन फ्रिज और मिल रहे हैं, जिससे ब्लड बैंक की क्षमता 1500 यूनिट और बढ़ जाएगी।
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लाइसेंस रीन्यूवल की प्रक्रिया जटिल है। हम लोग इसके रीनिवल का प्रयास कर रहे हैं। कई पत्र जिले से ड्रग कंट्रोलर को भेज जा चुके हैं। जल्द ही रीनिवल हो जाएगा। - डा. जीएल केशरवानी, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, जिला चिकित्सालय
मुझे इसकी जानकारी नहीं है। अपना ब्लड बैंक प्रदेश के टॉप टेन में शामिल है। इसलिए रीन्यूवल में परेशानी नहीं होनी चाहिए। वह जल्द इसकी फाइल मंगाकर शासन को भेजेंगे। - डा. श्रीकांत तिवारी, मुख्य चिकित्साधिकारी
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प्रदेश सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में जुटी है ताकि गरीब को भी इलाज में पैसा बाधा नहीं बने। वहीं, सपा मुखिया संसदीय क्षेत्र में ही स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल बेहाल है। ब्लड बैंक की वर्तमान क्षमता 1400 यूनिट रक्त, एक हजार प्लाज्मा और 36 यूनिट प्लेटलेट्स रखने की है। ब्लड बैंक में हर महीने किसी न किसी संस्था की ओर से रक्तदान शिविर का आयोजन होता है। जिसके कारण यहां रक्त की कोई कमी नहीं होती है। यहां से मऊ, अंबेडकरनगर, वाराणसी, देवरिया, गोरखपुर और जौनपुर जनपदों में भी रक्त, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स की सप्लाई होती है।
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ब्लड बैंक प्रभारी डा. विनय सिंह यादव की मानें तो 2013 में ब्लड बैंक का लाइसेंस फेल हो गया था। इसे रीनिवल के लिए 2013 के अंतिम महीने में ड्रग कंट्रोलर को भेज दिया गया लेकिन अभी तक नवीनीकरण नहीं हो सका है। हर छह महीने बाद रिमाइंडर भेजा जाता है। जब पत्र भेजा जाता है तो वहां से कहा जाता है कि हमारी टीम जांच के लिए जा रही है, तब तक आप लोग अपना कार्य जारी रखें। तब से हमलोग उनकी इजाजत से ब्लड बैंक का संचालन कर रहे हैं। ब्लड बैंक के अच्छे कार्य को देखते हुए हमें तीन फ्रिज और मिल रहे हैं, जिससे ब्लड बैंक की क्षमता 1500 यूनिट और बढ़ जाएगी।
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लाइसेंस रीन्यूवल की प्रक्रिया जटिल है। हम लोग इसके रीनिवल का प्रयास कर रहे हैं। कई पत्र जिले से ड्रग कंट्रोलर को भेज जा चुके हैं। जल्द ही रीनिवल हो जाएगा। - डा. जीएल केशरवानी, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, जिला चिकित्सालय
मुझे इसकी जानकारी नहीं है। अपना ब्लड बैंक प्रदेश के टॉप टेन में शामिल है। इसलिए रीन्यूवल में परेशानी नहीं होनी चाहिए। वह जल्द इसकी फाइल मंगाकर शासन को भेजेंगे। - डा. श्रीकांत तिवारी, मुख्य चिकित्साधिकारी